एमएमआरडीए, PESO और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल; स्थानीय लोगों ने उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग उठाई
थाना /भिवंडी
थाना : भिवंडी के अंजूर (Anjur) गांव एवं आसपास के क्षेत्रों में संचालित बड़ी संख्या में एलपीजी गोदामों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि इनमें से कई गोदाम कथित रूप से एमएमआरडीए (MMRDA) की आवश्यक अनुमति के बिना बनाए और संचालित किए जा रहे हैं। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह औद्योगिक सुरक्षा और नियामकीय व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय हो सकता है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि किसी परियोजना के लिए एमएमआरडीए की अनुमति अनिवार्य है, तो बिना अनुमति इन गोदामों का निर्माण और संचालन कैसे हुआ? साथ ही यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि संबंधित विभागों ने समय रहते जांच और कार्रवाई क्यों नहीं की।
आरोपों के अनुसार, यदि एमएमआरडीए की अनुमति उपलब्ध नहीं थी, तो फिर संबंधित एलपीजी गोदामों को पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) से लाइसेंस किस आधार पर जारी किया गया? शिकायतकर्ताओं ने इस पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन या अधिकारियों की लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित पक्षों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि एलपीजी जैसे अत्यधिक ज्वलनशील पदार्थ का बड़े पैमाने पर भंडारण सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील विषय है। यदि भविष्य में किसी प्रकार की आग, विस्फोट या अन्य दुर्घटना होती है और जनहानि होती है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? यह प्रश्न प्रशासन के सामने खड़ा है।
इस संबंध में एमएमआरडीए के अतिरिक्त कलेक्टर (अतिक्रमण) शिवाजी देवबंद ने बताया कि “इस मामले की जांच की जा रही है।” हालांकि शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि मामला लंबे समय से लंबित था, तो अब तक विस्तृत जांच और कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उनका यह भी आरोप है कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि किन अधिकारियों ने कथित रूप से ऐसे गोदामों के निर्माण और संचालन में सहयोग या लापरवाही बरती।
स्थानीय नागरिकों ने राज्य सरकार से मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए, संबंधित विभागों की भूमिका की समीक्षा की जाए तथा यदि किसी प्रकार की अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो दोषी अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
(नोट: इस समाचार में उल्लिखित आरोप शिकायतकर्ताओं और स्थानीय स्रोतों द्वारा लगाए गए हैं। संबंधित विभागों और अधिकारियों का विस्तृत पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)
