मुंबई: मुंबई महानगरपालिका के एम-ईस्ट वार्ड के स्वास्थ्य विभाग में वैद्यकीय अधिकारी की कथित मनमानी और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर नागरिकों में भारी रोष देखने को मिल रहा है। आरोप है कि जन्म प्रमाण पत्र में बच्चों का नाम दर्ज कराने जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया को सीमित समय में बांध दिया गया है, जिससे सैकड़ों परिवार परेशान हैं।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, बच्चों का नाम जन्म प्रमाण पत्र में दर्ज कराने के लिए केवल दोपहर 1 बजे तक ही आवेदन स्वीकार किए जाते हैं। इसके बाद आने वाले लोगों को बिना आवेदन लिए वापस भेज दिया जाता है। मजदूरी, नौकरी और अन्य कार्यों में व्यस्त रहने वाले लोगों के लिए समय पर पहुंचना मुश्किल हो जाता है, जिसके कारण उन्हें बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
इस कथित अव्यवस्था का सबसे बड़ा असर नवजात और छोटे बच्चों पर पड़ रहा है। जन्म प्रमाण पत्र में नाम दर्ज न होने से आधार कार्ड, राशन कार्ड और अन्य आवश्यक दस्तावेज नहीं बन पा रहे हैं। कई बच्चों का स्कूलों में प्रवेश भी अटक गया है, जिससे उनके भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं।
नागरिकों का कहना है कि सरकारी विभाग का उद्देश्य जनता की समस्याओं का समाधान करना होना चाहिए, लेकिन यहां उल्टा जनता को परेशान किया जा रहा है। लोगों ने आरोप लगाया है कि कुछ मिनट की देरी होने पर भी आवेदन लेने से इंकार कर दिया जाता है।
अब सवाल यह है कि क्या संबंधित प्रशासन इस गंभीर समस्या का संज्ञान लेगा? क्या जन्म प्रमाण पत्र में नाम दर्ज करने की प्रक्रिया को जनहित में सरल और नियमित बनाया जाएगा? और क्या इस कथित लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई कार्रवाई होगी?
फिलहाल नागरिकों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर समस्या का समाधान करने और बच्चों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की मांग की है।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं अजीमुद्दीन सैय्यद ने मांग की है कि संबंधित वैद्यकीय अधिकारी की कार्यप्रणाली की जांच की जाए तथा जन्म प्रमाण पत्र संबंधी लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा किया जाए, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।
