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By: इन्द्रेश तिवारी
मछलीशहर: हलषष्ठी का व्रत श्री कृष्ण के बड़े भाई बलराम जी के जन्म के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।इस दिन व्रत व पूजा करने की परम्परा है।छठ का निर्जला व्रत विशेषकर पुत्रवती महिलायें पुत्र की दीर्घायु के लिये करती हैं।ज्योतिष शिरोमणि शैलेश मोदनवाल का कहना है कि इस दिन बलराम के अस्त्र हल की भी पूजा की परम्परा है।इस व्रत में भैंस के दूध व उससे निर्मित दही व घी का ही प्रयोग किया जाता है।
षष्ठी देवी की पूजा के लिये महिलायें तालाब के किनारे व मंदिर में जमीन पर चौक बनाकर, मालिन के बनाये हरछठ के झरबेरी,पलास की टहनियों व कांस की डाल को एक साथ बांधने के बाद चना,गेंहू,जौ,धान,अरहर,मूँग,मक्का व महुआ की बांस की टोकरी में भरकर दूध,दही व गंगाजल अर्पित करते हुये छठ देवी की पूजा किया।बाबा बलराम दास मंदिर जमालपुर में ठाकुर के तालाब पर,टेकारडीह,दिंयावा महादेव मन्दिर,कस्बे के हनुमान मन्दिर आदि में ललही माता की पूजा के लिये महिलाओं की सुबह भीड़ लगी रही।
Reporter - Khabre Aaj Bhi
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