पनवेल : स्कायरूट एयरोस्पेस ने आज अपने ‘विक्रम-1’ प्रक्षेपण यान की पहली परीक्षण उड़ान के लिए प्रक्षेपण अवधि (लॉन्च विंडो) खुलने की घोषणा की। विक्रम-1 भारत में निजी क्षेत्र द्वारा विकसित पहला ऑर्बिटल श्रेणी का रॉकेट है।
टेस्ट फ्लाइट-1 का प्रक्षेपण 12 जुलाई के बाद किसी भी दिन किए जाने की योजना है। हालांकि, यह एसडीएससी-शार, श्रीहरिकोटा स्थित प्रक्षेपण स्थल पर असेंबली और परीक्षण प्रक्रिया पूरी होने के साथ-साथ मौसम, सुरक्षा तथा प्रक्षेपण क्षेत्र की अंतिम मंजूरी पर निर्भर करेगा। यह प्रक्षेपण अवधि 4 अगस्त तक खुली रहेगी।
स्कायरूट एयरोस्पेस के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी पवन कुमार चंदाना ने कहा, “मिशन ‘आगमन’ का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य विक्रम-1 की प्रत्येक प्रणाली के वास्तविक उड़ान के दौरान प्रदर्शन से संबंधित महत्वपूर्ण आंकड़े एकत्र करना है। प्रक्षेपण से लेकर उड़ान के प्रत्येक चरण तक यह यान किस प्रकार कार्य करता है, इसे हम समझना चाहते हैं। यह डेटा केवल जमीनी परीक्षणों के माध्यम से पूरी तरह प्राप्त नहीं किया जा सकता। इस डेटा के आधार पर हम अपने डिजाइन का सत्यापन करेंगे और एक विश्वसनीय तथा उच्च आवृत्ति वाले व्यावसायिक प्रक्षेपण कार्यक्रम के निर्माण के लिए भविष्य के प्रक्षेपण यानों के विकास को दिशा देंगे। विक्रम-1 की उड़ान के साथ ही भारत का निजी अंतरिक्ष उद्योग एक ऐसे ऐतिहासिक पड़ाव पर पहुंचेगा, जिसे इससे पहले कभी हासिल नहीं किया गया था।”
स्कायरूट एयरोस्पेस के सह-संस्थापक नागा भरत डाका ने कहा, “भारत में प्रक्षेपण यान बनाने के सपने से लेकर अब ऑर्बिटल उड़ान का प्रयास करने तक का यह सफर अतुलनीय रहा है। वर्ष 2022 में विक्रम-एस के माध्यम से हमने अपनी तकनीकी आधारभूत क्षमताओं का सफलतापूर्वक सत्यापन किया था। अब विक्रम-1 के माध्यम से हम भारत में विकसित, भारत और विश्व के लिए एक विश्वसनीय तथा उच्च आवृत्ति वाले प्रक्षेपण कार्यक्रम की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा कदम उठा रहे हैं।”
उन्होंने कहा, “इस मिशन को तकनीकी प्रदर्शन और सीखने के अवसर—दोनों उद्देश्यों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। भारत सरकार, इन-स्पेस, इसरो, हमारे निवेशकों और सहयोगियों द्वारा हम पर जताए गए विश्वास के कारण ही यह संभव हो सका है।”
विक्रम-1 लगभग सात मंजिला इमारत जितना ऊंचा, बहु-चरणीय ऑर्बिटल प्रक्षेपण यान है। इसका निर्माण पूरी तरह कार्बन कम्पोजिट संरचना में किया गया है। इस यान में कंपनी द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित प्रणोदन प्रणालियों का उपयोग किया गया है, जिनमें 3डी-प्रिंटेड इंजन और उच्च थ्रस्ट वाले ठोस ईंधन रॉकेट बूस्टर भी शामिल हैं।
लो-अर्थ ऑर्बिट में 350 किलोग्राम वजन तक के छोटे उपग्रहों को प्रक्षेपित करने के लिए डिजाइन किए गए विक्रम-1 के पहले मिशन में 450 किलोमीटर की ऊंचाई और 60 डिग्री ऑर्बिटल इन्क्लिनेशन वाली कक्षा को लक्ष्य बनाया जाएगा।समाचार–2
सेक्टर-6 स्थित राजमाता जिजाऊ उद्यान की टूटी फिसलपट्टी की तत्काल मरम्मत की मांग
नवी मुंबई, 14 जुलाई 2026 : नेरुल सेक्टर-6 स्थित राजमाता जिजाऊ उद्यान की फिसलपट्टी टूटी हुई अवस्था में है। इसके कारण उद्यान में खेलने आने वाले छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता उत्पन्न हो गई है। फिसलपट्टी के टूटे होने से दुर्घटना की आशंका बढ़ गई है, जिससे अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों में चिंता का वातावरण है।
इस उद्यान में प्रतिदिन बड़ी संख्या में बच्चे खेलने के लिए आते हैं। लेकिन टूटी हुई फिसलपट्टी के कारण बच्चे इसका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं और उन्हें निराशा का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही, यदि यह खतरनाक स्थिति इसी प्रकार बनी रही तो किसी भी समय गंभीर दुर्घटना घट सकती है।
इस संबंध में शिवसैनिक महादेव माणिकराव पवार ने नवी मुंबई महानगरपालिका के आयुक्त श्री कैलास शिंदे को ज्ञापन सौंपकर टूटी हुई फिसलपट्टी की तत्काल मरम्मत कराने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने उद्यान में लगे सभी खेल उपकरणों का निरीक्षण कर आवश्यक मरम्मत कार्य तत्काल किए जाने की भी मांग की है।
