जौनपुर : अहमद खा मंडी में 22 मुहर्रम के मौके पर पारंपरिक ऐतिहासिक जुलूस-ए-अलम और ज़ुलजनाह बेहद अकीदत और गमगीन माहौल में निकाला गया। इस मजलिसी प्रोग्राम और जुलूस में भारी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत कर कर्बला के शहीदों को याद किया।
मौलाना सैफ अब्बास और हसन अकबर खान ने पेश किया खराज-ए-अकीदत
जुलूस से पहले आयोजित मजलिस को देश के जाने-माने धर्मगुरुओं ने संबोधित किया:मुख्य भाषण: हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन मौलाना सैयद सैफ अब्बास किबला ने कर्बला के ऐतिहासिक संदर्भ और हजरत इमाम हुसैन की शहादत के मकसद पर रौशनी डाली।
पहला भाषण: ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के सेक्रेटरी और ‘शेरे-पूरवांचल’ मौलाना हसन अकबर खान ने कौम को एकजुट रहने और हुसैनियत के रास्ते पर चलने का पैगाम दिया।
दूसरा भाषण: खतीबे-अहले-बेत हुसैन अकबर खान साहब (रईस, रन्नो) ने अपनी तकरीर से मजलिस में मौजूद अकीदत मंदों को भावुक कर दिया।
अंजुमनों का नौहाख्वानी और ‘आग का मातम’ मजलिस के बाद अहमद खा मंडी से अलम (पवित्र झंडे) और ज़ुलजनाह (पवित्र घोड़े) का जुलूस निकाला गया।
धार्मिक समूह: अंजुमन इमामिया रन्नो और अंजुमन अज़ाए हुसैन के नौहाख्वानों ने दर्द भरे अंदाज में नौहाख्वानी और सीनाज़नी की।
विशेष अनुष्ठान: जुलूस का मुख्य आकर्षण और सबसे भावुक पल ‘आग का मातम’ रहा। अकीदतमंदों ने दहकते हुए लाल अंगारों पर चलकर मातम किया और इमाम हुसैन के प्रति अपनी गहरी आस्था प्रकट की। सफल आयोजन और व्यवस्था
इस पूरे गरिमामय और ऐतिहासिक कार्यक्रम का सफल संयोजन स्थानीय समाज सेवी सोनू साहब और शानू साहब, द्वारा किया गया। इस मौके पर मुख्य रूप से आले रसूल,सैयद राजू,अफजल,सुनील,रियाजुल,कन्हैया लाल मौर्य,मुशर्रफ रज़ा,मेहंदी,इंतजार,मेराज हैदर , मिनहाल दरोगा खान आदि सेकड़ो लोग मौजूद रहे।
प्रशासन और स्थानीय लोगों के सहयोग से पूरा जुलूस शांतिपूर्ण और सलीके से संपन्न हुआ।
