मुंबई : कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के श्री उदय सुरेश भाई ठक्कर ने कहा पश्चिम एशिया में जारी क्षेत्रीय तनाव और खाड़ी देशों की मांग में कमी का सीधा प्रभाव भारतीय बासमती निर्यात पर पड़ा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार मार्च और अप्रैल के संयुक्त निर्यात मूल्य में लगभग 24–25% की गिरावट देखी गई, जो पिछले वर्ष के 1105.36 मिलियन डॉलर से घटकर 838.34 मिलियन डॉलर रह गया। मार्च में निर्यात 27.4% और अप्रैल में 20.9% तक कम हुआ।
भारत प्रतिवर्ष लगभग 60 लाख टन बासमती चावल निर्यात करता है, जिसमें से लगभग 40 लाख टन खाड़ी देशों को भेजा जाता है। सऊदी अरब, ईरान, इराक, यूएई और यमन जैसे देश कुल निर्यात का लगभग 50% हिस्सा रखते हैं, जबकि इराक, बहरीन, ईरान और कतर में शिपमेंट 50% से 90% तक घट गया है। हालांकि सऊदी अरब और इजराइल में गिरावट की गति धीमी हुई है
जॉर्डन के माध्यम से री-रूटिंग बढ़ने से व्यापार में कुछ राहत के संकेत मिले हैं, जिससे जॉर्डन का हिस्सा बढ़कर लगभग 15% तक पहुंच गया है। दूसरी ओर, भारतीय निर्यातक अब यूरोप और अन्य वैकल्पिक बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं, जहां यूके में 80%, इटली में 67% और नीदरलैंड में 18% की वृद्धि दर्ज की गई है।
चीन भी एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक बाजार बनकर उभरा है, जहां अप्रैल में निर्यात 155% बढ़कर 1 मिलियन डॉलर से अधिक पहुंच गया। इस संकट का असर पंजाब और हरियाणा जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों पर भी पड़ सकता है, जहां देश के लगभग 70% बासमती चावल का उत्पादन होता है। साथ ही डीएपी और यूरिया जैसे कृषि इनपुट की आपूर्ति पर दबाव तथा किसानों की लागत बढ़ने की आशंका भी जताई गई है। (kvi) का मानना है कि बाजार विविधीकरण, नए निर्यात गंतव्यों की खोज, APEDA के गुणवत्ता मानकों का पालन तथा मजबूत लॉजिस्टिक रणनीति अपनाकर भारत इस चुनौती को अवसर में बदल सकता है।
