नवी मुंबई : “घनकचरा प्रबंधन नियम 2026” दिनांक 1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में लागू हो चुके हैं। देश के सर्वश्रेष्ठ स्वच्छ शहरों की “सुपर स्वच्छ लीग” श्रेणी में शामिल नवी मुंबई शहर इनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पूरी तरह तैयार हो गया है। इसी संदर्भ में नवी मुंबई महानगरपालिका मुख्यालय के ज्ञान केंद्र में महानगरपालिका आयुक्त डॉ. कैलास शिंदे की अध्यक्षता में एक विशेष जानकारीपूर्ण कार्यशाला आयोजित की गई। इस अवसर पर अतिरिक्त आयुक्त श्री सुनील पवार, घनकचरा प्रबंधन उपआयुक्त डॉ. अजय गडदे, अतिरिक्त नगर अभियंता श्री अरविंद शिंदे तथा सभी विभागों के स्वच्छता अधिकारी, स्वच्छता निरीक्षक एवं स्वच्छता कार्यों के पर्यवेक्षक उपस्थित थे।
कार्यशाला में आयुक्त ने सभी विभागों की स्वच्छता व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की। प्रत्येक विभाग में कार्यरत स्वच्छता कर्मियों की संख्या, उनके पर्यवेक्षकों की संख्या, कार्य समय तथा प्रत्येक संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी की जिम्मेदारियों की जानकारी ली गई।
कचरा परिवहन करने वाले वाहनों की समय-सारिणी का अध्ययन करते हुए कचरा संग्रहण एवं परिवहन की निगरानी संबंधी प्रक्रियाओं की समीक्षा की गई। नवी मुंबई महानगरपालिका द्वारा दैनिक कचरा संग्रहण एवं परिवहन प्रणाली पर अत्याधुनिक एकीकृत आईसीसीसी (ICCC) प्रणाली के माध्यम से निगरानी एवं नियंत्रण किया जाता है। आयुक्त ने निर्देश दिए कि इस नियंत्रण प्रणाली का डैशबोर्ड प्रत्येक स्वच्छता अधिकारी और निरीक्षक के मोबाइल पर तत्काल उपलब्ध कराया जाए तथा कार्यशाला समाप्त होने के बाद उसी स्थान पर उसका प्रशिक्षण भी दिया जाए।
आयुक्त ने बताया कि अनेक स्थानों पर सड़क किनारे खड़े वाहनों के नीचे का कचरा साफ नहीं हो पाता है। इसलिए नियमित सफाई कार्यों में इस पर विशेष ध्यान दिया जाए। सड़कों, फुटपाथों, डिवाइडरों तथा उन स्थानों की सफाई की गुणवत्ता बढ़ाने के निर्देश दिए गए जहाँ अक्सर कचरा डाला जाता है। स्वच्छता अधिकारियों एवं निरीक्षकों को प्रतिदिन गंभीरता से निगरानी करने तथा लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए।
सड़क किनारे अवैध रूप से बैठने वाले फेरीवाले भी बड़ी मात्रा में गंदगी फैलाते हैं। इस विषय को विभागीय अधिकारियों के संज्ञान में लाकर उनके विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
स्वच्छता संबंधी निरीक्षण और रिपोर्ट प्रस्तुत करने हेतु ऑनलाइन प्रणाली विकसित करने तथा स्वच्छता अधिकारियों एवं निरीक्षकों द्वारा दैनिक समीक्षा, घनकचरा प्रबंधन उपआयुक्त स्तर पर सप्ताह में दो बार समीक्षा, अतिरिक्त आयुक्त स्तर पर साप्ताहिक समीक्षा तथा महानगरपालिका आयुक्त स्तर पर प्रत्येक पंद्रह दिन में समीक्षा की व्यवस्था शुरू करने के निर्देश दिए गए।
इसी प्रकार शौचालय प्रबंधन की भी विभागवार समीक्षा की गई। हाल ही में महानगरपालिका कर्मचारियों द्वारा क्षेत्र के 384 सार्वजनिक एवं सामुदायिक शौचालयों का निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण में पाए गए सुधार संबंधी कार्यों को सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग द्वारा तत्काल पूरा करने के निर्देश दिए गए। साथ ही स्वच्छता निरीक्षकों को अपने क्षेत्र की स्वच्छता जांच के दौरान शौचालयों की नियमित सफाई और उपयोग योग्य स्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
शौचालय प्रबंधन की नियमित निगरानी और नियंत्रण के लिए शीघ्रता से “टॉयलेट क्लीनिंग ऐप” विकसित करने का सुझाव भी आयुक्त ने दिया। साथ ही सीबीडी बेलापुर पारसिक हिल स्थित विश्वनाथ महाराज समाधि मंदिर तथा बेलापुर किले के निकट सिडको गेस्ट हाउस के पास नागरिक सुविधाओं के लिए शौचालय निर्माण का सुझाव भी दिया गया।
नए नियमों के अनुसार कचरे का चार प्रकारों में वर्गीकरण आवश्यक है। इसके लिए:
गीले कचरे हेतु हरे रंग का बड़ा डिब्बा
सूखे कचरे हेतु नीले रंग का बड़ा डिब्बा
घरेलू खतरनाक कचरे हेतु काले रंग का छोटा डिब्बा
सैनिटरी कचरे हेतु गुलाबी रंग का छोटा डिब्बा
जल्द उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
चार प्रकार के कचरे
1. गीला कचरा (Wet Waste): बचा हुआ भोजन, सब्जियों के छिलके, चाय की पत्ती आदि जैव-विघटनशील पदार्थ।
2. सूखा कचरा (Dry Waste): कागज, गत्ता, प्लास्टिक सामग्री, धातु, कांच तथा पुनर्चक्रण योग्य वस्तुएं।
3. घरेलू खतरनाक कचरा (Domestic Hazardous Waste): बैटरियां, दवाइयां, बल्ब, पेंट के डिब्बे, सिरिंज आदि।
4. सैनिटरी कचरा (Sanitary Waste): सैनिटरी पैड, डायपर, पट्टियां तथा अन्य स्वच्छता संबंधी अपशिष्ट।
आयुक्त ने निर्देश दिए कि इन चारों प्रकार के कचरे का पृथक्करण उत्पत्ति स्थल पर ही किया जाना चाहिए तथा नागरिकों में इसके प्रति व्यापक जनजागरण किया जाए। इनका संग्रहण और परिवहन भी अलग-अलग किया जाए तथा इस विषय पर कड़ाई से निगरानी रखी जाए। संबंधित सोसायटियों एवं संस्थाओं को यह स्पष्ट जानकारी दी जाए कि बिना वर्गीकृत कचरा उठाया नहीं जाएगा।
नए नियमों के अनुसार 20,000 वर्ग फुट से अधिक निर्मित क्षेत्र वाली इमारतें, प्रतिदिन 40,000 लीटर से अधिक जल उपयोग करने वाले प्रतिष्ठान अथवा प्रतिदिन 100 किलोग्राम से अधिक कचरा उत्पन्न करने वाली बड़ी आवासीय सोसायटियां, होटल, मॉल, अस्पताल, बाजार, शैक्षणिक संस्थान, व्यावसायिक परिसर तथा अन्य बड़े प्रतिष्ठान अपने परिसर में ही गीले कचरे के प्रसंस्करण की व्यवस्था करेंगे तथा उसकी पंजीकरण प्रक्रिया सीपीसीबी (CPCB) पोर्टल पर पूरी करेंगे।
साथ ही उन्हें प्रत्येक वर्ष 30 जून तक वार्षिक विवरण प्रस्तुत करना होगा। नियमों का पालन न करने पर जुर्माना एवं कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। संबंधित संस्थाओं को इस संबंध में जागरूक करने तथा आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
नवी मुंबई शहर स्वच्छता के क्षेत्र में देशभर में सदैव अग्रणी रहा है और इसमें यहां के जागरूक नागरिकों की सक्रिय भागीदारी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। महानगरपालिका आयुक्त डॉ. कैलास शिंदे ने नागरिकों से अपील की है कि वे घनकचरा प्रबंधन नियम 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन में भी इसी प्रकार सहयोग करें तथा कचरे का उत्पत्ति स्थल पर ही चार प्रकारों में पृथक्करण सुनिश्चित करने में अपना पूर्ण योगदान दें।
