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दिलदारनगर /गाजीपुर : 15 अगस्त का दिन हमारे देश के लिए सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि वह ऐतिहासिक क्षण है जब भारत ने आज़ादी की सांस ली और दासता की जंजीरों को तोड़ा। इस आज़ादी की गाथा में हर धर्म, जाति और समुदाय के लोगों ने अपना लहू बहाया। भारतीय मुस्लिम समाज ने भी इस संघर्ष में अद्वितीय और अमूल्य योगदान दिया, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।
स्वतंत्रता संग्राम में मुस्लिमों की अग्रणी भूमिका
स्वतंत्रता की लड़ाई में मुस्लिमों का योगदान 1857 की प्रथम क्रांति से ही साफ़ तौर पर देखा जा सकता है। इस क्रांति का नेतृत्व बहादुर शाह ज़फ़र ने किया, जिन्होंने हिंदू-मुस्लिम एकता का बिगुल बजाया। तात्या टोपे, रानी लक्ष्मीबाई के साथ-साथ मौलवी अहमदुल्ला शाह, खान बहादुर खान रोहिल्ला, बख्त ख़ाँ, और हकीम अहमद हुसैन जैसे वीरों ने अंग्रेज़ी साम्राज्य को चुनौती दी।
अज़ीम क्रांतिकारी और स्वतंत्रता सेनानी
उल्लमा-ए-हिंद की भूमिका : मौलाना अबुल कलाम आज़ाद, मौलाना हुसैन अहमद मदनी, मौलाना मुहम्मद अली जौहर, मौलाना शौकत अली, मौलाना बरकतुल्लाह भोपाली और मौलाना अब्दुल बारी फरंगी महली जैसे नेताओं ने न सिर्फ आज़ादी का नारा बुलंद किया, बल्कि अपने लेखन, भाषण और आंदोलनों से जनजागरण फैलाया।
क्रांतिकारी संगठन : रेशमी रुमाल आंदोलन, गदर पार्टी और सिल्क लेटर मूवमेंट में अनेक मुस्लिम क्रांतिकारियों ने अंग्रेज़ी हुकूमत को हिलाकर रख दिया।असहयोग और खिलाफत आंदोलन : महात्मा गांधी के नेतृत्व में चले असहयोग आंदोलन में मुस्लिम समाज ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया और हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल पेश की।
कुर्बानियों की लंबी सूची
स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हज़ारों मुस्लिमों ने अपनी जान कुर्बान की। अनेक क्रांतिकारियों को काला पानी की सज़ा दी गई, कई को फांसी पर चढ़ा दिया गया, और अनेक को जेलों में तड़प-तड़प कर शहीद होना पड़ा। इन बलिदानों ने आज़ादी की नींव को मजबूत किया।
आज के भारत में मुस्लिम समाज की भूमिका
आज जब हम 15 अगस्त 2025 मना रहे हैं, हमें याद रखना चाहिए कि आज़ादी सिर्फ एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। मुस्लिम समाज आज भी शिक्षा, विज्ञान, कला, खेल, राजनीति और सामाजिक सेवा के क्षेत्रों में देश को आगे बढ़ाने में योगदान दे रहा है।
शिक्षा के क्षेत्र में नए संस्थान और विश्वविद्यालय।
सामाजिक सेवा में मानवाधिकार व भ्रष्टाचार विरोधी अभियानों में सक्रिय भूमिका।
विज्ञान और तकनीक में उल्लेखनीय उपलब्धियां।
मैं, डॉ. वसीम रज़ा, राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं एंटी करप्शन मिशन की ओर से, भारत के सभी नागरिकों से अपील करता हूँ कि हम अपने देश की आज़ादी की रक्षा करें, आपसी भाईचारे और एकता को मज़बूत करें, और यह संकल्प लें कि हम किसी भी तरह के भेदभाव से ऊपर उठकर अपने वतन की तरक्की के लिए कार्य करेंगे।आज का दिन हमें यह याद दिलाता है कि आज़ादी की कीमत कुर्बानी है, और इसे बनाए रखना हमारी जिम्मेदारी है।
Reporter - Khabre Aaj Bhi
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