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नयी दिल्ली : कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज़ आलम ने जम्मू कश्मीर सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा कश्मीर पर केंद्रित 25 किताबों पर प्रतिबन्ध लगाने के निर्णय को तानाशाही बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की है.
शाहनवाज़ आलम ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि एजी नूरानी, अरुनधती रॉय और अनुराधा भसीन जैसे लेखकों की विश्व स्तरीय किताबों को भड़काऊ बताकर प्रतिबंधित करना साबित करता है कि मोदी सरकार कश्मीर मुद्दे पर ऐतिहासिक, सारगर्भित और तथ्यात्मक विश्लेषणों को छुपाना चाहती है. आज वो संविधान प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत कश्मीर पर लिखे गए किताबों को प्रतिबंधित कर रही है तो कल संविधान पर भी प्रतिबन्ध लगा सकती है. क्योंकि संविधान की मूल भावना से लेकर उसका एक-एक अनुच्छेद आरएसएस की मनुवादी विचारधारा के खिलाफ़ है.
शाहनवाज़ आलम ने कहा कि केंद्र सरकार ने कश्मीर को एलजी के माध्यम से नियंत्रित करके उसे अशांत करने की रणनीति के तहत ऐसा किया है. इससे फायदा सिर्फ़ पाकिस्तान को होगा. क्योंकि इससे विश्व समुदाय में कश्मीर पर भारत के नज़रिये के खिलाफ़ जनमत बनेगा. इससे यह सन्देश जाएगा कि भारत कश्मीर के मुद्दे पर अभिव्यक्ति की आज़ादी का गला घोंट रहा है. ऑपरेशन सिन्दूर के बाद दुनिया को अपने साथ कर पाने में पीएम मोदी की विफलता के कारण पहले ही दूसरे देश हमसे दूरी बना चुके हैं. इस निर्णय के बाद यह रवैय्या और बढ़ेगा. उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय कश्मीर के मुद्दे पर विश्व जनमत भारत के साथ रहता था और पाकिस्तान अलग-थलग पड़ जाता था. लेकिन मोदी सरकार में स्थिति उल्टा हो गया है.
Reporter - Khabre Aaj Bhi
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