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नवी मुंबई : रूस के सुदूर पूर्वी भाग में एक बहुत शक्तिशाली मापांक 8.8 रिक्टर स्केल जो समुद्री गहराई लगभग 19 किमी थी, रूस के कम्चत्का प्रायद्वीप के पास के पूर्व-सागर तट पर रूस के समय के अनुसार दोपहर 12:46 बजे आया। यह 1952 के भूकंप (माकांक ~9.0) के बाद कम्चत्का में सबसे भारी झटका माना जा रहा है ।
भूकंप के बाद उत्पन्न सुनामी की चेतावनियाँ प्रशांत महासागर के कई देशों में जारी की गईं। रूस में सेवरो कुरीस्ल्क शहर में सुनामी की लहरें 3–5 मीटर ऊँची रहीं, तट पर कई भवनों में क्षति और कुछ लोग घायल हुए, लेकिन मौतों की कोई पुष्टि नहीं हुई। क्लाउचीव्सकोय ज्वालामुखी में विस्फोट भी हुआ, इसमें लावा प्रवाहित हुआ। वहीं जापान के पूर्वी तट विशेषकर होकैडो और फुकुशिमा के आसपास 1.2 से 1.3 मीटर तक की लहरें देखी गईं। लगभग 2 लाख लोगों को तटीय क्षेत्रों से हटने का निर्देश दिया गया। वैसे एक महिला की मृत्यु सामने आई। उसका निधन वाहन से नीचे गिरने के कारण हुआ । फुकुशिमा पावर स्टेशन को सावधानीवश के खाली कराने का आदेश भी हुआ लेकिन कोई रेडियोलॉजिकल समस्या नहीं हुई। अमेरिका में हवाई, कैलिफोर्निया, वाशिंगटन, अलास्का में असर देखा गया। हवाई में जल स्तर 1.7 मीटर तक आया। कई क्षेत्रों में प्रभावित लोगों को निकालने में परेशानी हुई और हवाई यात्रा में विलंब हुए या गड़बड़ आ गई। केलिफोर्निया में और ओरगान की तटवर्ती रेखा पर 0.5–1 मीटर तक की लहरें देखी गईं, ब्रिटिश कोलंबिया में कुछ छोटी तरंगें महसूस की गईं । यूएस वेस्ट कोस्ट और अलास्का सहित कई भागों में चेतावनियाँ जारी की गईं और बाद मे इसकी तीव्रता घटा दी गईं।
अन्य प्रशांत देश जैसे फिलीपींस ताइवान इंडोनेशिया फ्रेंच पोलिनेशिया चिल्ली कोलंबिया न्यू जीलैंड जैसे देश भी प्रभावित हुए। जहां 0.5–1 मीटर तक की तरंगों की चेतावनी दी गई और कुछ स्थानों पर तटवर्ती आपातकालीन घोषणा की गई। वही फ्रेंच पोलिनेशिया और मर्कोसेस आइलैंड आदि में 2–2.5 मीटर की तरंगें देखने को मिलीं। दक्षिण अमेरिका और न्यू जीलैंड में भी चेतावनी जारी हुई और तटों से दूर रहने की सलाह दी गई ।
प्रमुख देशों ने सुनामी चेतावनी एवं अवधि चेतावनी तुरंत जारी की। वही चिंता की बातयह है कि वैज्ञानिकों ने 7.5 तक के बड़े आफ्टर इफेक्ट भूकंप आने की संभावना जताई है। जो अगले कुछ दिनों तक सतर्क रहने की आवश्यकता दिखाते हैं। लेकिन फिलहाल भारत के लिए राहत की बात यह है कि भारत के सुनामी वार्निंग सेंटर ने स्पष्ट किया है कि इस 8.8 तीव्रता वाले भूकंप से भारतीय तटों या हिंद महासागर क्षेत्र में कोई प्रभाव या सुनामी खतरा नहीं है।
कुल मिलाकर यह भूकंप हमारे समय का सबसे शक्तिशाली 2011 के जापानी भूकंप के बराबर सबसे बड़ा है। प्रभाविते तटीय देशों में विश्वस्तरीय चेतावनी प्रणालियाँ सक्रिय रही, जिससे व्यापक क्षति और मृत्यु की स्थिति टल गई। भारत में कोई प्रभाव नहीं था। और इसमें किसी तरह की सुनामी संभावना पूरी तरह से खारिज किया गया है।
हालाँकि, प्रभावित क्षेत्रों में अगले कुछ दिन तक आफ्टर शाक और समुद्री सतह में अस्थिरता बनी रहने की संभावना है, इसलिए वहाँ के स्थानीय आपदा प्रबंधन से संपर्क बनाए रखना आवश्यक रहेगा। भूकंप और सुनामी जैसे प्राकृतिक आपदाओं में समय पर चेतावनी और सतर्कता जानलेवा हो सकती है। भारत में प्रभावित नहीं होने की पुष्टि के बावजूद, वैश्विक स्तर पर प्रभावित क्षेत्रों में सतर्कता बनाए रखना ज़रूरी है।
Reporter - Khabre Aaj Bhi
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