दुलहिपुर के जाफरी स्ट्रीट में 5 मोहर्रम की मजलिस अजाखाने एमौहम्मद जाफर में हूवी

By: Shakir Ansari
Jul 12, 2024
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दुल्हीपुर : जिसमे जाकिर ए एहलेबैत हाजी यासिर हैदर जाफरी साहब ने खिताब किया और हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की कर्बला में दी गई इंसानियत जिंदा रखने की अजीम कुर्बानी का जिक्र किया 

नेजामत करते हुवे राहिब जाफरी ने बताया की हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने कर्बला के मैदान में विपरीत परिस्थितियों में भी अपने हर रिश्तों की कैसे कदर की जाती है इसकी मिसाल खुद अमल कर के दी 

सन 61 हिजरी में जब इंसान को इंसान नहीं समझा जाता था यजीद जैसा दुर्दांत आतंकवादी शासन कर रहा था उस जालिम हुकूमत में अरब लोग अपने यहां गुलाम खरीद कर रखते थे और जानवरों से भी बत्तर सलूक किया करते थे उस समय जब गुलामों को अपने से दूर खड़ा किया जाता था उस समय हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने अपने गुलाम हब्शी गुलाम को अपने सीने से लगाया और कयामत तक के लिए अपने उस हब्शी गुलाम को आसमान का एक ऐसा सितारा बना दिया जिसका जिक्र कयामत तक बड़े फक्र से होता रहेगा

भारत के सपूत गांधी जी ने अपनी जीवनी में लिखा है की मैने जालिम के खिलाफ बिना डरे आवाज बुलंद करने का हौसला हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम से सीखा है इस लिए मेने जब अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ पहला मोर्चा खोला जिसको डंडी यात्रा नाम दिया उस यात्रा में अपने साथियों की संख्या मैने हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के पाक साथियों की संख्या के बराबर लिया और

72 लोगो के समूह को लेकर मैं हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का नाम लेकर फिरंगी हुकूमत के खिलाफ निकला और ईमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के आशिर्वाद से गुलाम हिन्दुस्तान को आजाद करा कर दम लिया गांधी जी आगे कहते है 

मेने अहिंसा का पाठ हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम से सीखा है इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम एक महान संत थे ‌।सैकड़ों की संख्या में हर धर्म के मानने वाले लोग मौजूद थे।

जिसमे अटल ध्रुव, चंदन पटेल, विनय सोनकर , विजय पटेल प्रधान जी राम नरेश पटेल प्रधान जी , सरदार यशवीर सिंह जी एक्स पीडब्ल्यूडी जेई साहब , नफीस गुड्डू जी अयूब खां गुड्डू जी मोनू जयसवाल जी , लेक्चरर जैगम अब्बास साहब डाक्टर शकील आबिदी साहब वसी रजा जाफरी सीओ साहब , एडवोकेट जाफर मेहदी साहब काशिफ जाफरी साहब शेमु भाई सहित सैकड़ों लोगो ने शिरकत की


Shakir Ansari

Reporter - Khabre Aaj Bhi

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