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नवी मुंबई : जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती जा रही है वैसे वैसे नवी मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में पानी की किल्लत कृत्रिम तरीके से करने का प्रयास भी बढ़ता जा रहा है। यह आरोप नवी मुंबई के किसी भी नागरिक से आप पूछे वह बोले को तैयार हैं। जब पानी की किल्लत नहीं होती है तब किसी भी सरकारी एजेंसी को पाइपलाइन का मेंटेनेंस नहीं करना होता है लेकिन जब पानी की किल्लत होती है तब 1 दिन की पानी सप्लाई का नोटिस जारी करने के बाद दूसरे दिन भी अचानक क्यों बढ़ा दी जाती है यह प्रश्न आज सभी नवी मुंबई के निवासियों के मस्तिष्क में उठ रहा है।
उदाहरण के लिए इस बार एक नोटिस आई थी की 10 अप्रैल की सुबह 10 बजे से 11 तारीख की सुबह 10 बजे तक पानी नहीं आएगा लेकिन उसको अचानक 11 तारीख को बढ़ाकर 12 तारीख को कर दिया। इसके अलावा 10 तारीख की सुबह भी पानी नहीं दिया। और लोग अब यह कहने लगे हैं कि 12 तारीख को भी सुबह यदि पानी आएगा तो कुछ देर आएगा यानी पानी की शॉर्टेज की जाएगी। क्या कारण है की गर्मी बढ़ने के साथ मेंटेनेंस अचानक बढ़ने लगता है? पानी सप्लाई करने वाली एजेंसी और सरकारी विभागों का घालमेल तो नहीं जो पानी की कमी पैदा कर पानी सप्लाई करने वाले ठेकेदारों की जेबें गर्म करने का एक तरीका हो। एक बोतल दो पहले ₹35 में मिलती थी आज ₹100 में भी नहीं मिल रही है। क्या जब पानी सप्लाई बंद होती है तब सभी कुएं भी सूख जाते हैं? यह आरोप सरकारी एजेंसियों पर जिनमें सिडको मुख्य भागीदार है उन पर लगाया जाता है। यह गर्मी के साथ और अधिक बढ़ता जाता है। अक्सर सोसाइटी में इस कारण झगड़े और मारपीट होते रहते हैं। महिलाएं दूसरों की सोसाइटी में एक बोतल पानी के लिए निवेदन करती हुई दिखाई पड़ सकती है। क्या सेटेलाइट सिटी के नाम पर नवी मुंबई में इसी प्रकार की लूटपाट जारी रहेगी या फिर सिर्फ गर्मी में ही पानी की लाइन की मेंटेनेंस होगी यह सोचने की बात है?
Reporter - Khabre Aaj Bhi
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