शेट्टी समाज बड़ा ही दिल वाला व संघर्षशील होता है- रमेश शेट्टी

By: Surendra
Oct 23, 2022
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- विनोद प्रधान 

  (व्यक्ति)

समाज सेवा पर गोस्वामी तुलसीदास ने बड़ी सुंदर पंक्ति लिखी है," परहित सरिस धर्म नहीं भाई" अर्थात दूसरों की भलाई से बढ़कर कोई भी धर्म नहीं है।  ये  ऐसा कार्य है जिसके कारण लोग अमर हो जाते हैं और लोग उन्हें सदियों तक याद रखते हैं। गौरतलब है कि सेवाभावी मनुष्य को समाज में सम्मान की नजर से देख देखा जाता है क्योंकि वह व्यक्ति अपने निजी स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज के पीड़ित, दुखी व जरूरतमंदों की मदद करता है। शायद इसीलिए रमेश टी.शेट्टी (अण्णा) के प्रति अपने शेट्टी समाज में ही नहीं बल्कि हर समाज के लोगों में उनका आदर व सम्मान है। कर्नाटक स्थित कारकल तालुका के सानोर गांव में जन्मे श्री शेट्टी अपने पिता के. पी. थिमप्पा शेट्टी के बुलावे पर सन् १९६९ में मुंबई आए। परंतु मुंबई का माहौल कुछ खराब होने की वजह से वापस लौट गए। गांव में पीयूसी की परीक्षा देने के वे वापस मुंबई आए और मात्र 50 रुपए में नौकरी से अपने संघर्षमय जीवन की शुरुआत की। अपने संघर्ष भरे दौर की दास्तान बताते हुए श्री शेट्टी कहते हैं कि संघर्ष हमें जीवन का सुखद अनुभव कराता है और उसे सतत सक्रिय बनाता है। संघर्ष का दामन थामकर न केवल हम लोग बढ़ते हैं बल्कि जीवन जीने के सही अंदाज़ का आनंद प्राप्त करते हैं। सन् १९७६ में उन्हें एक होटल में मैनेजर की नौकरी मिली। अपने जीवन के संघर्ष के साथ समाज सेवा में एक खास मुकाम हासिल करने वाले श्री शेट्टी ने पहले दो होटल चलाने के लिए लिया फिर सन् १९८४ स्वयं के " मीनाक्षी रेस्टोरेंट एंड बार" की शुरुआत की। ४६ वर्ष व्यवसाय व समाज सेवा में सक्रिय रहने वाले ६८ वर्षीय रमेश शेट्टी का मानना है कि हम जो कुछ भी बनते हैं उसमें जितना योगदान हमारे परिश्रम का होता है उतना ही हमारे सामाजिक ढांचे का भी होता है। इसीलिए समाज से हमे जो मिला है उसे लौटाना हम सबका दायित्व है। आज श्री शेट्टी विभिन्न संस्थाओं से जुड़े हुए हैं जिनमें शिव साईं मंदिर प्रतिष्ठान, सीबीडी के ट्रस्टी व कोषाध्यक्ष, श्री उत्सव मंडल के अध्यक्ष, कॉसमॉस क्रिकेट क्लब के अध्यक्ष, मुंबई बंट्स एसोसिएशन के सदस्य, कर्नाटक संघ, वाशी  के सदस्य तथा होटल ओनर्स एसोसिएशन, नवी मुंबई के संस्थापक सदस्य के रूप में कार्यरत हैं। उक्त सामाजिक, धार्मिक व क्रीड़ा संस्थाओं के माध्यम से श्री शेट्टी ने अनगिनत जरूरतमंदों को सहायता पहुंचाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके अलावा राजनीतिक क्षेत्र में भी उनका खासा अनुभव रहा है। सन् १९८३ से अब तक वह नवी मुंबई कांग्रेस में उपाध्यक्ष पद पर कार्यरत है। उनका कहना है कि सर्वधर्म समभाव का नारा लेकर चलने वाली कांग्रेस का १४० वर्षों का इतिहास रहा है। इसी पार्टी के नेतृत्व में मैंने ४० वर्षों तक लोगों की सेवा की है। कोरोना तथा आपातकाल में जरूरतमंदों को सहायता, रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य जांच शिविर, नेत्र चिकित्सा शिविर, रक्तदान शिविर जैसे अनेकों सेवाभावी कार्य किए हैं। अपने शेट्टी समाज के बारे में गर्व से श्री शेट्टी का कहना है कि शेट्टी समाज बड़ा ही दिलवाला व संघर्षशील होता है। शायद उसी संघर्ष का परिणाम है कि आज यह समाज सुखी व संपन्न है। श्री शेट्टी का कहना है कि आज मैं लोगों की सेवा करते- करते जिस मुकाम पर पहुंचा हूं उसने मेरे माता-पिता के अलावा मेरी धर्मपत्नी लता शेट्टी, पुत्र निशांक, शशांक, पुत्री दीपशिखा, पुत्रवधू नेहा, पोता राधय्या का महत्वपूर्ण सहयोग रहा है। मैं उनका सदैव आभारी रहूंगा। अंत में युवा पीढ़ी को अपने संदेश में उनका कहना है कि आप जिस किसी क्षेत्र में रहे, पूरी मेहनत और लगन से काम करें, याद रहे आपकी यह मेहनत सिर्फ आपको ही नहीं, बल्कि देश को भी विकास की राह पर ले जाएगी।


Surendra

Reporter - Khabre Aaj Bhi

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