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by : नवनीत मिश्र
संत कबीर नगर : भक्ति काल के निर्गुण उपासक संत कबीर दास जयंती की उनकी निर्वाण स्थली सहित जिले के अनेक जगहों पर गुरुवार को मनाई गई। इस अवसर पर लोगों ने संत कबीर दास की तस्वीर पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित की। इसी क्रम में में पी.डी.पी.जी. कालेज, खलीलाबाद के हिन्दी विभाग के तत्वावधान में आयोजित वर्चुअल कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ०प्रमोद कुमार त्रिपाठी ने संत कबीर के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। कहा कि कबीर महान क्रांतिकारी, समाज सुधारक और निर्गुण भक्ति धारा के संत थे। उन्होंने हिदू-मुसलमान दोनों को उपदेश दिया। ईश्वर की सर्व व्यापकता के बारे में हिदुओं को कहा कि पत्थर पूजे हरि मिले तो मैं पूजूं पहाड़, उससे तो चक्की भली पीस खाए संसार। तो वहीं मुसलमानों से कहा कि कंकड़ पत्थर जोड़ के मस्जिद लियो चुनाय, ते चढ़ी मूला बांग दे, क्या बहरा हुआ खुदाय?
इस तरह संत कबीर ने प्रभु का आत्म साक्षात्कार कर समाज के लिए आदर्श स्थापित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सचिव श्रीमती पुष्पा चतुर्वेदी व संचालन रीतेश त्रिपाठी ने किया।
Reporter - Khabre Aaj Bhi
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