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उर्दू शिक्षकों के ४७३ स्वीकृत पदों पर नियुक्ति आदेश भी जारी हो: रिजवी
By: जावेद बिन अली
छत्तीसगढ़ रायपुर :अंग्रेजों के जमाने में दुनिया की तमाम देशों की सेना साथ रहते थे lऔर सेनाओं के आम भाषाओं के मिलाप के बाद जो भाषा उत्पन्न हुई वह उर्दू कहलाई उर्दू के माने होते हैं लश्कर(सेना) यही वजह है अगर सही उच्चारण पर कमांड हासिल करना है तो उर्दू सीखना जरूरी हैlऔर इस की खूबी के कारण लाख मिटाने की कोशिश के बावजूद भी भारतीय फिल्म से नहीं मिटाया जा सका और आज भी कुछ राज्य जिंदा रखने की कोशिश कर रहे हैं lउसमें छत्तीसगढ़ का भी नाम शामिल हो गया है ।
जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के मीडिया प्रमुख, मध्यप्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम के पूर्व अध्यक्ष, पूर्व उपमहापौर तथा वरिष्ठ अधिवक्ता इकबाल अहमद रिजवी ने मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल द्वारा शैक्षणिक जगत में क्रांतिकारी कदम उठाते हुए १४५८० शिक्षकों की नियुक्ति का मार्ग प्रशस्त करने वाला आदेश जारी कर दिया है,।वह एक सराहनीय सामयिक एवं अपेक्षित कदम है। जकांछ इस निर्णय का स्वागत करता है तथा यह अपेक्षा करता है कि नियुक्ति में केवल स्थानीय बेरोजगारों को ही अवसर दिया जाए। यह सभी प्रदेशवासियों की भी दिली तमन्ना है। उम्मीदवार के लिए छत्तीसगढ़ के बोर्ड परीक्षा से मेट्रिक पास करना अनिवार्य होना चाहिए तथा स्थानीय बेरोजगारों को ही नियुक्ति में प्राथमिकता दिया जाना चाहिए।
वरिष्ठ अधिवक्ता इकबाल अहमद रिजवी ने माननीय मुख्यमंत्री को स्मरण दिलाते हुए प्रथम मुख्यमंत्री स्व. अजीत जोगी के कार्यकाल में सृजित ४७३ उर्दू शिक्षकों का चयन इस नियुक्ति में शामिल किया जाना चाहिए । क्योंकि २००३ में आचार संहिता लागू हो जाने के कारण उर्दू शिक्षकों की चयनित सूची जारी नहीं हो सकी थी । तथा पंद्रह वर्षों की भाजपा सरकार में कई बार स्मरण दिलाने के बावजूद जारी नहीं की गई थी। उन्ही ४७३ उर्दू शिक्षकों के सर्वे उपरान्त स्वीकृत पदों पर भाजपा ने जानबूझकर नियुक्ति आदेश नहीं निकाले जो भाजपा की मुस्लिमों एवं उर्दू के प्रति एलर्जी को दर्शाता है। भाजपा शासनकाल में मुस्लिमों को चपरासी के पद के लायक भी नहीं समझा जाता था। मुख्यमंत्री से अपेक्षा है कि भाजपा शासन में उपेक्षित मुस्लिम बेरोजगारों को उम्मीद है कि उनकी फरियाद पर मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री अवश्य ध्यान देंगे।
Reporter - Khabre Aaj Bhi
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