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जौनपुर।जब किसी पत्रकार की लेखनी जनहित में सवाल उठाने लगे, जब उसकी सच्चाई सत्ताधारी वर्ग की आंखों की किरकिरी बनने लगे, और जब उसका नाम जन-जन की ज़ुबान पर आने लगे — तब कई बार झूठ का सहारा लेकर साजिशें रची जाती हैं। ऐसा ही एक मामला तब सामने आया जब डॉ. नाज़िया द्वारा पत्रकार तामीर हसन शीबू के खिलाफ एक फर्जी मुकदमा दर्ज कराया गया।यह मुकदमा स्पष्ट रूप से एक ईमानदार, निर्भीक और निष्पक्ष पत्रकार की छवि को धूमिल करने का प्रयास प्रतीत होता है। मगर यह भी उतना ही स्पष्ट है कि झूठे आरोपों और कागज़ी हमलों से न तो पत्रकारिता की आत्मा को मारा जा सकता है, और न ही सच की आवाज़ को खामोश किया जा सकता है।पत्रकार तामीर हसन शीबू ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा:"यह मुकदमा मेरे लिए रुकावट नहीं बल्कि उस रास्ते की पुष्टि है, जिस पर मैं सच और जनहित के लिए चल रहा हूं। मैं डरने वाला नहीं हूं। झूठ के पर्दे को हर बार सच की रोशनी फाड़ती रही है और आगे भी फाड़ेगी।"जनता भी अब समझने लगी है कि जब सत्ताधारी या प्रभावशाली लोग पत्रकारों के खिलाफ झूठे मुकदमे दायर करते हैं, तो यह दरअसल उनकी असहिष्णुता, बौखलाहट और पराजय का प्रतीक होता है। इतिहास गवाह है कि कलम को जितनी बार डराने की कोशिश की गई, वह उतनी ही बुलंद होकर उठी है।
Reporter - Khabre Aaj Bhi
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