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मुंबई : कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के उपाध्यक्ष एवं ठाणे जिला होलसेल व्यापारी वेलफेयर महासंघ के अध्यक्ष श्री सुरेश भाई ठक्कर ने कहा कि मई के पहले सप्ताह में पूरे देश में प्री-मानसून गतिविधियाँ तेज होने की संभावना है। देश के लगभग सभी हिस्सों में बारिश और गरज-चमक देखने को मिलेगी, भले ही यह अलग-अलग समय पर हो। इस बार बारिश गुजरात और राजस्थान के अंतिम छोर तक पहुंचेगी, जहां आमतौर पर इस मौसम में मौसम प्रणाली असर नहीं डालती है। यह बारिश प्री-मानसून पीक रेनफॉल (PMPR) साबित हो सकती है, जो आगामी मानसून सीजन से भी जुड़ी हुई है।
मानसून पर असर डालती है प्री-मानसून बारिश
मार्च से मई के बीच होने वाली प्री-मानसून बारिश का सीधा असर जून में आने वाले दक्षिण-पश्चिम मानसून पर पड़ता है। अगर पहले भारी या जल्दी बारिश हो जाए तो यह मिट्टी की नमी बढ़ाती है और बाद में मानसून की बारिश को और मजबूत बनाती है। वहीं, अगर इस दौरान मौसम शुष्क रहे, तो मानसून कमजोर रह सकता है। ज्यादा प्री-मानसून बारिश ट्रोपोस्फियर(क्षोभमंडल) को गर्म करती है, जिससे मानसून प्रणाली अधिक सक्रिय हो जाती है, जिससे दक्षिण और मध्य भारत में मानसून की बारिश बढ़ जाती है। बता दें, मध्य भारत (Central India) में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, विदर्भ (महाराष्ट्र का पूर्वी भाग) और झारखंड (कभी-कभी शामिल किया जाता है) आता है। वहीं, दक्षिण भारत (South India) में कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल, गोवा राज्य और पुडुचेरी (केंद्रशासित प्रदेश, दक्षिण भारत में स्थित) और लक्षद्वीप (दक्षिण भारत के पास द्वीप समूह) आते हैं।
मौसम को सक्रिय कर रहे हैं कई सिस्टम
देश में प्री-मानसून गतिविधियों की तीव्रता और अवधि बढ़ाने के पीछे कई मौसमी सिस्टम एक साथ सक्रिय हो रहे हैं। एक पश्चिमी विक्षोभ और इसके कारण बनने वाला चक्रवाती परिसंचरण उत्तर भारत में एक पूर्व-पश्चिम ट्रफ रेखा बनाएंगे और पूरे सिंधु-गंगा के मैदानों तक फैल जाएगी। यह ट्रफ रेखा पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में बारिश, आँधी और तेज हवाओं को बढ़ाएगी।
पूर्वोत्तर भारत में पूरे हफ्ते एक्टिव रहेगा मौसम
बांग्लादेश और उससे सटे पूर्वोत्तर भारत पर बना चक्रवातीय परिसंचरण 1 से 8 मई तक इस क्षेत्र में बारिश और गरज-चमक की गतिविधियाँ बनाए रखेगा। यह गतिविधियाँ 6 से 8 मई के बीच और भी तीव्र हो सकती हैं। इसके अलावा पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और ओडिशा के त्रिसंधि क्षेत्र में बने चक्रवातीय परिसंचरण और दक्षिण की ओर ट्रफ के कारण इन राज्यों में अच्छी बारिश, गरज-चमक, तेज़ हवाएं और बिजली गिरने की घटनाएँ होंगी।
दक्षिण भारत में भी बढ़ेगी प्री-मानसून गतिविधियाँ
दक्षिण भारत में मौसमी ट्रफ सक्रिय होती दिख रही है, जिसके साथ छोटे-छोटे चक्रवातीय परिसंचरण भी बन सकते हैं। इससे मध्य और दक्षिण भारत के राज्यों जैसे मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, गोवा, तमिलनाडु और केरल में भी प्री-मानसून गतिविधियाँ बढ़ेंगी।
गुजरात में भी पहुंचेगा प्री-मानसून तूफान
प्री-मानसून स्पेल के अंतिम चरण में 7 और 8 मई को गुजरात के अधिकांश हिस्सों तक गरज-चमक और आंधी की गतिविधियाँ पहुंचेंगी। आमतौर पर गुजरात इन तूफानों से अछूता रहता है क्योंकि ना तो उत्तरी सिस्टम वहां तक पहुंचते हैं और ना ही दक्षिण की ओर से कोई असर होता है। लेकिन इस बार अरब सागर से आ रही नम दक्षिण-पश्चिमी हवाएं राजस्थान के सिस्टम से टकराकर, सौराष्ट्र, कच्छ और मध्य गुजरात तक मौसम को प्रभावित करेंगी।
प्री-मानसून पीक और मानसून आगमन के बीच गहरा संबंध
यह जो प्री-मानसून पीक रेनफॉल है, इसका मानसून आगमन से गहरा संबंध होता है। इस तरह की तेज गतिविधियाँ मानसून के आने से 30 से 40 दिन पहले की सूचना देती हैं। इस बार के हालात देखकर लगता है कि मानसून में देरी की संभावना कम है और यह नियमित समय से थोड़ा पहले ही भूमध्यरेखीय क्षेत्रों में दस्तक दे सकता है। अंडमान सागर के आसपास यह कुछ समय तक ठहरेगा और फिर पूरे भारत में फैल जाएगा। मानसून का समय पर आना खेतों में जीवन लाता है, सूखी नदियों में पानी बहता है और धरती के साथ-साथ लोगों के मन को भी ताजगी से भर देता है।
Reporter - Khabre Aaj Bhi
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