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*पोखरी में फिसलकर डूबे मजदूर का 36 घंटे बाद मिला शव*
*शव को देखकर परिजन बिलबिलाकर चीखने चिल्लाने लगे परिजनों का रो रो कर बुरा हाल*
*छोटी बच्ची मृतक पापा को देखकर रोने लगी पापा पापा कह कर चीखने और चिल्लाने लगी*
चंदौली । अलीनगर थाना क्षेत्र के पुरैनी गांव में गुरुवार भोर में 40 वर्षीय मजदूर रामदरस उर्फ मूसे का शव गोताखोर बुलाकर 36 घंटे बाद शनिवार को सुबह पोखरे से बाहर निकाला गया।
घटना के बाद पूरे गांव में सनसनी फैल गई गवाह में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों ने तुरंत बचाने का प्रयास किया, लेकिन अंधेरा और पोखरी की दलदली स्थिति के कारण सफलता नहीं मिली। रातभर चले बचाव अभियान के बावजूद डूबे व्यक्ति का कोई सुराग नहीं मिला, शुक्रवार सुबह एनडीआरएफ और गोताखोरों की टीम को बुलाया गया, लेकिन पोखरे में दलदल की कठिन परिस्थितियों के कारण रेस्क्यू कार्य में बाधा आती रही, आखिरकार, शनिवार को गोताखोर और स्थानीय प्रशासन की मदद से रामदरस का शव पोखरे से बाहर निकाला गया।
परिजनों और ग्रामीणों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि समय पर बचाव दल और संसाधन उपलब्ध कराए गए होते, तो रामदरस को बचाया जा सकता था।
ग्रामीण ओंकार नाथ उपाध्याय ने प्रशासन पर बचाव कार्य में हीलाहवाली का आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस और प्रशासन औपचारिकता में लगे रहे. वहीं, एक अन्य ग्रामीण सूरज पटेल ने भी बचाव कार्य में देरी पर सवाल उठाए.
रामदरस अपने परिवार का इकलौता सहारा थे। उनकी पत्नी विंध्यवासिनी और चार बच्चे—पूजा, राधा, निशा, और किशन—घटना से सदमे में हैं. उनकी करुण पुकार ने मौके पर मौजूद लोगों की आंखें नम कर दीं.
प्रशासन ने परिजनों को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है। इस घटना ने पूरे गांव में शोक और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है. ग्रामीणों ने प्रशासन से ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए कदम उठाने की मांग की है
Reporter - Khabre Aaj Bhi
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