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By : रिपोर्ट - जैक
मुंबई : बहाई धर्म १८४४ में ईरान देश में प्रारम्भ हुआ। एक को बाब (द्वार) कहकर सम्बोधित करते थे । लोगों को यह शिक्षा देवी की प्रभु एक महान सार्वलौकिक ईश्वर को प्रकट करेगा। जिसके विषय में सभी धर्म में भविष्यवाणियां की गई है, जो मन को संगठित करेगा और जो शांति का युग लायेगा।
बाव की शिक्षाओं के प्रसार के छह वर्षो के अल्पकाल में ही हजारों व्यक्तियों ने बाद में विश्वास स्थापित कर लिया। उनका दिव्य संदेश प्रत्येक स्थान पर रुढिवादी धर्मसस्था तथा सरकारी अफसरों द्वारा किये गये कड़े विरोध का सामना करता हुआ ईरान के एक छोर से दूसरे छोर तक फैल गया। तदुपरांत कारावास की अवधि आई। अन्त में ईरान के तबरेज नगर के सार्वजनिक चौक में एक फौजी टुकड़ी द्वारा गोलियां मारकर उनको शहीद कर दिया गया। इसी प्रकार उनके हजारों वफादार प्रेरणाप्राप्त अनुयायी भी शहीद कर दिए गये। एक ऐसे धर्म के लिए जिसे प्रभु ने मानवहित के लिए उत्पन्न किया था । वे अपने जीवन का बलिदान देने में प्रसन्न थे।
सन् १८६३ में चन्द बचे हुए बाबियों को बहाउल्लाह ने सूचना दी कि वे ही इस युग के लिए निर्धारित वह ईश्वरावतार है । जिनके विषय में बाब ने भविष्यवाणी की थी। उन्होने उन लोगों को यह कहते हुए संगठित हो जाने का निर्देश दिया कि केवल एक सामान्य धर्म तथा व्यवस्था के अंतर्गत ही संसार स्थायी शांति प्राप्त कर सकता है। उन्होंने स्पष्ट रूप से बतलाया कि भयानक युद्ध संसार में फल जायेंगें तथा उन संस्थाओं,विचारों और धारणाओं को नष्ट कर देंगें . जो लोगों को उस एकता से परे रखते हैं । जो उनका जन्मसिद्ध अधिकार है। बहाउल्लाह एक सम्मानित मंत्री के सुपुत्र थे । जिन्होंने कई वर्षो तक विशिष्टता के साथ ईरानी राज्य की सेवा की। उनकी दिव्य शिक्षाओं के कारण उन्हें सारी पार्थिव संपदाओं से वंचित कर दिया गया ।
अब देखें बहाई संदेश को संक्षेप में
हिंदी भाषा में दिनकर को 'सूर्य' 'सूरज', तमिल में 'सूर्यम', अरबी में 'अम्' में उर्दू में 'आफताब' तथा अंग्रेजी में 'सन' कहकर सम्बोधित किया जाता है। उसी एक सूर्य के से भिन्न-भिन्न नाम हैं। इसी प्रकार से प्रत्येक मौसम में सूर्य भिन्न भिन स्थानों से उदित होता है, परंतु यह सदा ही सूर्य होता है। अब हम आपको एक अत्यन्त उत्तम संदेश देते हैं। प्रसन्न हो जाइए,क्योंकि प्रभु ने पुनः हमारे पास सत्य के सूर्य को भेजा है। हमें अपने सभी दुखों तथा शोकों से मुक्ति दिलाने के लिए उसने अपने आपको एक महापुरुष के रुप में प्रकट किया है। इस युग के लिए ईश्वरावतार का नाम बहाउल्लाह अर्थात का प्रकाश या तेज है। यह हमारे लिए बहुत सी सुन्दर शिक्षायें लाये हैं। भगवान बहाउल्लाह कहते हैं कि क प्रभु के हाथ में एक बांसुरी की भांति है, इसलिए बहाउल्लाह की वाणी स्वयं ईश्वर की अपनी ही मधुर स्वरलहरियां हैं। इस युग के लिए ईश्वर की शिक्षाओं में से कुछ यहाँ प्रस्तुत है।
बहाई के संदेश को, उसके मुताबिक
१. मनुष्यमात्र की एकता।
२. सत्य की स्वतंत्र खोज।
३. समस्त धर्मों की नींव एक है।
४. धार्मिक एकता अनिवार्य है।
५. धर्म विज्ञान तथा तर्क के अनुसार होना चाहिए।
६. पुरुषों तथा स्त्रियों की समानता ।
७. आर्थिक समस्या का आध्यात्मिक समाधान।
८. पूर्वाग्रह का सर्वथा त्याग।
९. विश्वव्यापी शांति ।
१०. सब के लिए शिक्षा ।
११. एक विश्वव्यापी भाषा ।
१२. एक अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय ।
एक सत्य दूसरे सत्य का खण्डन नहीं करता । प्रकाश चाहे किसी भी दीप में रहा हो,प्रकाश ही है। गुलाब का,पुष्प सदा सुंदर ही होता है, चाहे वह किसी भी उद्यान में क्यों न खिल रहा हो। तारों में समान उज्वलता होती है, चाहे वे पूर्व दिशा में चमके या पश्चिम दिशा में। पक्षपात को त्याग कर सत्य-सूर्य से प्रेम करो चाहे वह किसी भी दिशा से उदित क्यों न हो रहा हो।
Reporter - Khabre Aaj Bhi
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