
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने केंद्रीय दल के साथ की बैठक, अगले छह से आठ महीनों के लिए राहत योजनाओं की तैयारी
मुंबई : महाराष्ट्र में सूखे की गंभीर स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने किसानों, खेतिहर मजदूरों और ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को अगले छह से आठ महीनों तक राहत देने के लिए व्यापक नियोजन शुरू किया है। रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने, जरूरतमंदों तक अनाज पहुंचाने, पेयजल की व्यवस्था करने तथा पशुधन के लिए चारा और पानी उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में रविवार को मुंबई स्थित वर्षा सरकारी आवास पर राज्य की सूखा स्थिति का जायजा लेने आए केंद्रीय दल के साथ बैठक हुई। इस दौरान मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि केंद्रीय दल सूखाग्रस्त क्षेत्रों का दौरा कर जल्द ही अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेगा, जिससे प्रभावित नागरिकों की समस्याओं और सूखे की वास्तविक स्थिति को केंद्र तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
केंद्रीय दल ने सूखाग्रस्त गांवों का किया दौरा
केंद्र सरकार के अधिकारियों की तीन टीमों ने अहिल्यानगर, सोलापुर, जालना, बीड, धाराशिव, वाशिम और यवतमाल सहित विभिन्न जिलों के सूखाग्रस्त गांवों का दौरा किया। इस दौरान टीमों ने खेतों, जलस्रोतों और फसलों की स्थिति का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया तथा किसानों से बातचीत कर उनकी समस्याओं की जानकारी प्राप्त की।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि केंद्रीय दल के व्यापक दौरे से किसानों और ग्रामीण नागरिकों की कठिनाइयों को समझने में मदद मिली है। इससे सूखे की गंभीरता और प्रभावित लोगों की समस्याओं की वास्तविक जानकारी केंद्र सरकार तक पहुंच सकेगी।
बारिश में लंबे अंतराल से फसलों को भारी नुकसान
मुख्यमंत्री ने बताया कि मानसून के शुरुआती दो महीनों में अच्छी बारिश होने के कारण इस वर्ष रिकॉर्ड कृषि उत्पादन की उम्मीद थी। लेकिन फसलें फूल आने की अवस्था में थीं, तभी बारिश में लगभग दो महीने का लंबा अंतराल आ गया। इसका सबसे अधिक असर कई क्षेत्रों में सोयाबीन की फसल पर पड़ा। इसके अलावा कपास, तूर और गन्ने की फसलें भी प्रभावित हुई हैं।
पानी की कमी के कारण रबी फसलों की बुवाई की संभावना कम हो गई है। वहीं, गर्मियों की फसलों की खेती के अवसर भी सीमित हो गए हैं। ऐसे में किसानों के लिए खरीफ फसल में हुए नुकसान की भरपाई रबी या ग्रीष्मकालीन फसलों से करना मुश्किल होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती के साथ-साथ खेतिहर मजदूरी पर निर्भर छोटे किसानों के सामने भी आजीविका का संकट पैदा हो गया है। इसलिए रोजगार योजनाओं और खाद्य सुरक्षा कार्यक्रमों के माध्यम से प्रभावित परिवारों को सहायता उपलब्ध कराने की योजना बनाई जा रही है।
पेयजल आपूर्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि मुंबई और पुणे जैसे बड़े शहरों को हाल में हुई बारिश से कुछ राहत मिली है, लेकिन महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे गांवों में जलस्रोत सूखने लगे हैं। ऐसी स्थिति में कई गांवों में टैंकरों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराना पड़ेगा।
राज्य सरकार टैंकरों से जलापूर्ति की व्यवस्था को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए तकनीक का उपयोग करने की योजना तैयार कर रही है, ताकि प्रत्येक प्रभावित गांव तक समय पर पानी पहुंचाया जा सके।
मुख्यमंत्री ने बताया कि अगस्त 2027 तक उपलब्ध पानी के उपयोग में पहली प्राथमिकता पेयजल को दी गई है। नागरिकों और पशुधन के लिए आवश्यक पानी का अलग से प्रावधान किया गया है। इसके बाद ही अन्य जरूरतों के लिए पानी उपलब्ध कराया जाएगा। इस व्यवस्था को सख्ती से लागू किया जाएगा।
जलस्रोतों के पुनर्जीवन के लिए विशेष अभियान
सूखे की स्थिति से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से जलाशयों से गाद निकालने, जलस्रोतों की मरम्मत करने और उन्हें पुनर्जीवित करने के कार्य बड़े पैमाने पर किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इससे पहले राज्य के 25 हजार गांवों में किए गए कार्यों से लाभ मिला था। इन क्षेत्रों में 15 से 17 प्रतिशत तक पानी की कमी होने के बावजूद लोगों को राहत मिली थी।
उन्होंने कहा कि इस बार भी जल संरक्षण से जुड़े कार्यों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा। इन कार्यों की निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सॉफ्टवेयर तथा मोबाइल ऐप का उपयोग किया जाएगा।
पशुधन के लिए चारा और पानी की व्यवस्था
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि विभिन्न जिलों में उपलब्ध चारे का भंडार लगभग 90 से 120 दिनों तक पर्याप्त रहने का अनुमान है। जिन जलग्रहण क्षेत्रों की मिट्टी में नमी उपलब्ध है, वहां चारा उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
सरकार द्वारा घोषित दरों पर उपलब्ध चारा खरीदकर उसके भंडारण की व्यवस्था की जाएगी। जरूरत पड़ने पर अच्छी बारिश वाले अन्य राज्यों से भी चारा मंगाने पर विचार किया जाएगा।
पशुधन को बचाने के लिए आवश्यकता के अनुसार चारा शिविर और पशु शिविर शुरू करने का विकल्प भी अपनाया जाएगा। सरकार का उद्देश्य सूखे के दौरान किसानों को राहत देने के साथ-साथ उनके पशुधन की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
जल संरक्षण कार्यों से ग्रामीणों को मिलेगा रोजगार
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को जल संरक्षण से जुड़े कार्यों में शामिल किया जाएगा। ‘माथा से पायथा’ यानी पहाड़ी के ऊपरी हिस्से से निचले हिस्से तक जल संरक्षण की अवधारणा के तहत मौजूदा संरचनाओं की मरम्मत और नई संरचनाओं का निर्माण जनभागीदारी से किया जाएगा।
इससे एक ओर जलस्रोतों का संरक्षण होगा, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इससे प्रभावित नागरिकों को आर्थिक सहायता और राहत भी मिलेगी।
केंद्र से आर्थिक सहायता दिलाने के प्रयास तेज
मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि राज्य सरकार केंद्र सरकार के निर्धारित मानकों के अनुसार आंकड़ों पर आधारित विस्तृत और सटीक ज्ञापन प्रस्तुत करेगी।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अग्रिम ज्ञापन प्रस्तुत करने के संबंध में राज्य सरकार से संपर्क किया था। इसके अनुसार राज्य सरकार ने अपना ज्ञापन सौंप दिया है।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने अंतर-मंत्रालयी समूह की बैठक जल्द आयोजित कर राहत सहायता देने की प्रक्रिया तेज करने का आश्वासन दिया है।
फसल बीमा का दायरा अपेक्षाकृत कम होने के बावजूद जिन किसानों ने बीमा सुरक्षा ली है, उन्हें जल्द से जल्द इसका लाभ दिलाने के लिए राज्य सरकार केंद्र के सहयोग से प्रयास करेगी।
बैठक में मंत्री गिरीश महाजन, मंत्री दत्तात्रय भरणे, मंत्री मकरंद जाधव-पाटील सहित राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

