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ग़ाज़ीपुर : महान साहित्यकार कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद्र की 141वीं जयंती के अवसर पर ग़ाज़ीपुर सदर स्थित सरजू पाण्डे पार्क और सेवराई तहसील के दिलदार नगर पंचायत स्थित जनार्दन ज्वाला के निवास पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें महान कथाकार के साहित्यिक योगदान पर विस्तृत प्रकाश डाला गया।
दिलदारनगर में आयोजित विचार गोष्ठी में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा अपने विचारों को साझा करते हुए गाजीपुर जनपद के वरिष्ठ पत्रकार व लेखक रामअवतार शर्मा जी ने कहा दुनिया के महानतम रचनाकारों में मुंशी प्रेमचंद्र का विशेष स्थान है। प्रेमचंद्र की कालजयी रचनाएं उनकी महानता का उद्घोष करती हैं। जब तक साहित्य संसार रहेगा तब तक उनकी रचनाएं प्रासंगिक रहेंगीं। एक संस्मरण को साझा करते हुए बताया कि जैनेंद्र जी को जो पत्र प्रेमचंद जी ने लिखा है,दिल्ली निवास के दौरान उसका संग्रह पढ़ने का सुअवसर मिला। पत्र लेखन की शैली अनूठी है। उनके पत्रों को जो पढ़ता है। उसके मुंह से वाह निकल पड़ता है।
कवि और संचालक कुमार प्रवीण ने कहा प्रेमचंद की तरह उनकी रचनाओं के पात्र भी सरल और सादे थे उनकी सभी कृतियां माटी से जुड़ी है। खेत खलिहानो और चौपालों की सुगंध प्रचुर मात्रा में है। उनकी रचनाएं भारत के गावों का प्रतिनिधित्व करती है। संचालन करते हुए जनार्दन ज्वाला ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद की रचना गोदान,गबन के अलावा उनकी कहानियों ने आम आदमी को बहुत प्रभावित किया। उनकी कहानियां बूढ़ी काकी, ईदगाह ,कफन दुनिया की उत्कृष्ट रचनाओं में गिनी जाती हैं। इस अवसर पर शायर खुर्शीद खां प्रेमचंद को दुनिया का एक बड़ा रचनाकार बताया। इनके अलावा सुरेंद्र पांडे,अवनिश शर्मा आदि भी अपने विचारों को साझा किया। अंत में गोष्ठी के आयोजक काशी विद्यापीठ के पत्रकारिता के छात्र रोहित पटवा ने इस गोष्टी में अपने विचारों को साझा करने वाले सभी विचारकों को हृदय से आभार व्यक्त किया।
"जोआदमी कौम से जितनी नफरत करता है,समझ लिजिए कि वह खुदा से उतनी ही दूर है"-प्रेमचंद
ग़ाज़ीपुर सरजू पांडेय पार्क में अखिल भारतीय कायस्थ महासभा गाजीपुर के तत्वाधान में आयोजित गोष्ठी में महासभा के जिलाध्यक्ष अरुण कुमार श्रीवास्तव ने उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वह हिंदी साहित्य के महान लेखक ही नहीं वह एक महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी थे । स्वतंत्रता आंदोलन में उन्होंने ब्रिटानी हुकूमत के खिलाफ जमकर कलम चलायी । वह हमेशा समाज में व्याप्त कुरीतियों, कुप्रथाओं के खिलाफ संघर्ष करते रहे । वह साहित्य को सच्चाई के धरातल पर उतारने वाले लेखक थे । वह अपने लेखनी से सदैव समाज में व्याप्त गैरबराबरी समाप्त कर समतामूलक समाज की स्थापना के लिए संघर्षरत रहे । आज जब देश में जाति और धर्म के नाम पर नफरत फ़ैलाने की कोशिश हो रही है ऐसे दौर में मुंशी प्रेमचंद जी आज भी प्रासंगिक हो उठे हैं ।
इस अवसर पर मुख्य रूप से कौशल श्रीवास्तव, परमानन्द श्रीवास्तव, चन्द्रप्रकाश श्रीवास्तव,अमर सिंह राठौर, विवेक श्रीवास्तव,आनन्द श्रीवास्तव,गौरव श्रीवास्तव, अमरनाथ श्रीवास्तव, अरुण सहाय, राजेश कुमार श्रीवास्तव,आशुतोष श्रीवास्तव, कमल श्रीवास्तव,अश्वनी कुमार श्रीवास्तव, नन्हें,नवीन श्रीवास्तव,इन्द्रजीत आदि उपस्थित थे । इस गोष्ठी का संचालन जिला महामंत्री अजय कुमार श्रीवास्तव ने किया ।
Reporter - Khabre Aaj Bhi
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