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गाजीपुर : जनपद गाजीपुर के प्रसिद्ध शायर एवं साहित्यकार तथा इतिहासकार ख़ाक यूसुफपुरी के ७६ वें जन्मतिथि के अवसर पर यूसुफपुर-मोहम्मदाबाद स्थित नौशाद अंसारी के हाल पर एक सेमिनार और मुशायरे का आयोजन ख़ाक फाउंडेशन के सौजन्य से किया गयाl जिसमें नगर के शायर कवि एवं प्रबुद्ध जनों ने शिरकत किया और ख़ाक यूसुफपुरी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित किया गया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के तौर पर इलाहाबाद से तशरीफ लाए इफ़्तिख़ार सिद्दीक़ी उपाध्यक्ष माइनारटीज डेवलपमेंट फाउंडेशन इलाहाबाद ने कहा कि ख़ाक साहब की शायरी और लेखन समाज को नई दिशा प्रदान कर सकती है lउनकी रचनाओं में दबे कुचले शोषित लोगों के हक़ अधिकार की बात की गई हैl इसलिए उनकी रचनाओं को जल्द से जल्द प्रकाशित करवाने की दिशा में कार्य प्रारम्भ कर देना चाहिए
विशिष्ट अतिथि तालीमी बेदारी के डॉ वसीम अख़्तर ने कहा कि ख़ाक यूसुफपुरी न सिर्फ़ शायर थे बल्कि एक ऐसे साहित्यकार थे lजिन्हें अभी ज़माने ने जाना ही नहीं जिन्होंने साहित्य की विभिन्न विधाओं पर उत्कृष्टता के साथ काम किया है।
इस अवसर पर डॉ सय्यद ज़फ़र असलम ने ख़ाक यूसुफपुरी पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत करते हुए बताया कि ख़ाक साहब की विभिन्न शीर्षकों से हिन्दी उर्दू भोजपुरी में लगभग ३१ पुस्तकें शीर्षक सहित उपलब्ध हैं lजिनमें गद्य और पद्य दोनों शामिल हैं lलेकिन समस्त अप्रकाशित हैं।
सेमिनार में बोलते हुए वरिष्ठ पत्रकार जावेद बिन अली ने इतिहासिक हालात का ध्यान दिलाते हुए कहां की आजादी के बाद हमने अपने बुजुर्गों के कारनामों को जानने का प्रयास छोड़ दिया। जिसके कारण हमारे बुजुर्गों के खिदमत मंजरे आम पर नहीं आने के कारण साहित्य से लेकर अपने आजादी के महान क्रांतिकारि महात्मा गांधी के जान के रक्षक बत्तख मियां अंसारी और १८५८ के दूसरे शहीद-ए-आजम भिखारी मियां अंसारी को नहीं जानते हैंl
इस अवसर पर मुशायरे का आयोजन भी हुआ जिसमें फैयाज अंसारी ने नात पाक से शुरुआत की।
नबी के शहर में दो पल गुज़र जाए तो अच्छा है
मुकद्दर इस तरह अपना संवर जाए तो अच्छा है
उसके बाद दानिश गाजीपुरी ने
हमे पता है वो हीरे की तरह था लेकिन
हमारे साथ में वो खाक बन के रहता था
बड़ा अदीब था शायर था और मुफक्किर था
फकत् खुदा को पता है कि खाक क्या क्या था
कैफ़ गाजीपुरी ने -
मेरे आशिक की शकल में यारों ,मलकुल मौत दरमियान में था
चंचल यूसुफपुरी ने -
जब कभी वो शिकार करता है ,पहले अपनों पे वार करता है
नज़र यूसुफ़पुरी ने -
नज़र के तीर चलाअो जबान मत खोलो ,हमारी प्यास बुझाओ जबान मत खोलो ॥
असवदी #ज़िकरा ने -
जमीं से जुड़के रहे वो तमाम उम्र मगर ,खलील ख़ाक एक आसमान जैसे थे॥
अहकम गाजीपुरी ने -
लोग समझे या न समझे मैं चिरागे वक्त हूं, । रौशनी के वास्ते महफ़िल में जल जाता हूं मैं ॥
परचम मोहम्मदाबादी ने-
ख़ून का दरिया कहीं पर भी बहा देता हूं । मैं देख लीजिए आप मुझको आज का नेता हूं मैं ।।
आलम मोहम्मदाबादी ने -
रू ए जाना है रू ब रू मेरे फिर भी सीरे नज़र नहीं होती ।
आसी यूसुफपुरी ने -
शर्त इतनी है फकत हसरते परवाज़ रहे । बांधकर फिर तुझे सय्याद नहीं रख सकता ॥
सी पी #सुमन ने -
ये मानता हूं कि कतरा हूं मैं सुमन लेकिन । सुना है कोई समन्दर मेरी तलाश में है॥
सैफी सलेमपुरी ने -
दिए जलते हैं जिनके घर में घी के,। वो क्या जाने मसाइल तीरगी के ॥
ज़फ़र असलम ने -
ये कैसी भीड़ है जो सच से भी इन्कार करती है। कि मां तो सबकी होती है सभी से प्यार करती है॥
इरशाद जनाब खलीली ने -
अमीरी अपने सारे ऐब दौलत से छुपाती है । ग़रीबी साथ में नाइत्तेफाकी ले के आती है । अपने अपने कलाम पढ़कर महफ़िल में ख़ूब वाहवाही लूटीl
इस मौके पर उपस्थित श्रोताओं में नाजिम रजा, आस मोहम्मद अंसारी, सुल्तान अहमद, शमसुज्जोहा, नौशाद अंसारी, एहतिशाम ज़ख्मी, अरशद नेता, फिरोज़ अंसारी, गुरु प्रजापति, आसिम, अफजाल, संदीप, सनाउल्लाह, इनआम, वकील, इकराम, यावर, युसुफ़ इत्यादि उपस्थित रहे। अध्यक्षता मोहम्मद हुसैन #एमडीभाई ने किया संचालन #इरशाद जनाबखलीली ने किया अंत में #मोहम्मदकैफ़ अंसारी सभासद ने धन्यवाद ज्ञापित कियाl
Reporter - Khabre Aaj Bhi
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