To view this video please enable JavaScript, and consider upgrading to a web browser that supports HTML5 video
मुंबई : संगीत एक कला ही नहीं बल्कि एक साधना भी है। इसमें सफलता के शिखर पर वही पहुंच सकता है जिसे संगीत से प्रेम हो और जो संगीत की पूजा करना जानता हो। राजस्थान में प्रतिभाशाली संगीतकारों की कोई कमी नहीं है। जिनकी कम्पोजिशन और आवाज सुनकर दर्शक आज भी मंत्रमुग्ध हो जाते है।आज की तारीख में कई राजस्थानी संगीतकार बॉलीवुड में एक खास जगह बना चुके है।फिल्म संगीत की दुनिया में दिलीप सेन,समीर सेन,ललित सेन,गुणवंत सेन व राज सेन किसी पहचान के मोहताज नहीं है।ये मिट्टी व खुश से राजस्थानी है और हिंदी तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ की फिल्मों में संगीत देते हैं।इन्होने पिछले एक दशक में भारत और भारत से बाहर भी खूब नाम कमाया है।इनका जन्म राजस्थान में चुरू जिले के एक छोटे से कस्बे सुजानगढ़ में हुआ।ये भी कहा जाता है कि सेन परिवार के एक पूर्वज केसरी सेन कभी तानसेन के शिष्य रहे थे।
फिल्मी दुनिया में दिलीप सेन के पिता जमाल सेन का कोई सानी नहीं था,जमाल सेन ने कलकत्ता रेडियो पर पहली बार वंदे मातरम गाया।जमाल सेन रविन्द्र नाथ टैगोर के साथ भी काम कर चुके हैं।लेकिन वे आखिरी दिनों में गुमनामी की जिंदगी जीते हुए चले गए।मगर बाद में उनके बेटे दिलीप सेन और पोते समीर सेन ने जमाल सेन का सपना पूरा किया व उनकी जोड़ी नब्बे के दशक की महान जोड़ी बनकर सामने आई व ना केवल उन्होने अनेक कीर्तिमान रचे बल्कि राजस्थान के नाम को अपने पिता जमाल सेन के नाम को बुलंदियों तक पहुंचा दिया।दिलीप सेन के चाचा के लड़के राज सेन फिल्म इंडस्ट्री में एक जाना माना वो उभरता हुआ नाम है जो लगातार सारे देश में सुजानगढ़ के सेन संगीत घराने का नाम ऊंचाईयों पर ले जा रहा है।। म्यूजिक डायरेक्टर के रूप में उन्होंने हिट काम किया,साउंड इंजीनियर काम करते हुए अपने गांव सुजानगढ व राजस्थान का नाम रोशन किया।राज सेन जाने माने सुजानगढ़ के सेन परिवार के ही एक नायाब नगीने है।प्रस्तुत है उनसे बातचीत के कुछ अंश:-
अपने बचपन व फैमिली बैकग्राउंड के बारे में बताओ?
मेरे पिताजी मोहम्मद सेन एक सरकारी कर्मचारी थे और हम पांच भाई थे।मेरे सबसे बडे़ भाई का नाम था सुरेश सेन उनसे छोटे का नाम जगदीश सेन उनसे छोटे भाई का नाम मोती सेन उनसे छोटे भाई का नाम मनीर सेन व सबसे छोटा भाई था मैं राज सेन।जैसा कि सब जानते हैं मैं संगीत घराने से ताल्लुक रखता हूं इसलिए मैं बचपन से ही यही सपना देखता था कि मूम्बई जाऊं और नाम कमाऊ। इसलिए मैं सन१९८७ को मूम्बई आ गया।
अपने संघर्ष के बारे में बताओ ?
मुंबई में मैंने काफी संघर्ष किया।मैंने १९८७ से लेकर १९९४ तक संघर्ष किया। अपने घर वालों का काम देखा उनसे सीखा। दिलीप सेन समीर सेन व ललित सेन की रिकोर्डिंग देखता था।उनके पिता शंभू सेन जी के पास जाता था और उनकी रिकोर्डिंग भी देखता था।और यही सोचता था कि इंशाअल्लाह कभी मुझे भी ऐसा करने का मौका मिलेगा। मूम्बई में बहुत मेहनत की स्ट्रगल किया। मगर भगवान देता सबको है अगर मेहनत सही जगह पर करो तो।
आपको सबसे पहली फिल्म कैसे मिली वह अपने कैरियर के बारे में बताओ ?
सन १९९४ से सन 2000 तक मै एक साउंड रिकोर्डिस्ट था फिर मेरी फ़िल्में आई तबाही,शहीद-ए-कारगिल, डायल 100,अर्जुन देवा,खतरों के खिलाड़ी आदि मूवीज की।खतरों के खिलाड़ी मूवी में मिथुन चक्रवर्ती ने काम किया था।साथ में राज बब्बर ,पुरू राजकुमार व रोनित रॉय नें भी काम किया था।आज तक मैंने सत्तर फिल्मों में काम किया है जिसमें चालीस भोजपुरी है जिनमें कानुन हमार मुठ्ठी में,अब तो बन जा सजनवा हमार,बकलोल दुल्हा,पूरब और पश्चिम जैसी हिट फिल्में शामिल हैं।दो गुजराती व दो तेलुगू है जिसमें ग्रीन हंट जैसी हिट फिल्म थी।बंगाली में फिल्म की तोमाके सलाम जिसके निर्माता थे के सी बकोडि़या। के सी बकोडि़या की फिल्म फिर तेरी मेहरबानियां में भी मैने म्यूजिक कम्पोज़र के रूप में काम किया।मैंने सायरा बानो जी के साथ काम किया।
किन म्यूजिक डायरेक्टर्स को आप अपना आइडियल मानते हो ?
मुझे आर डी बर्मन बहुत पसंद थे। साथ ही साथ शंकर जयकिशन,लक्ष्मीकांत प्यारेलाल,दिलीप सेन समीर सेन,ललित सेन,और बप्पी लाहिड़ी,अन्नू मालिक का बहुत गहरा इम्पेक्ट था मुझ पर।अभी के म्यूजिक डायरेक्टर्स में मुझे सोहेल सेन,प्रीतम,विशाल-शेखर और साजिद वाजिद बहुत पसंद हैं।
उन सिंगर्स के नाम जिन्होंने आपको प्रभावित किया है। खासतौर पर आपके अंडर जिन्होंने काम किया है
सबसे पहले तो मैं नाम लेना चाहूंगा श्री पद्म भूषण श्री उदित नारायण जी का। उसके बाद उनकी वाइफ दीपा नारायण जी जो मेरी मुंहबोली बहन है ,उन्होंने मेरा बहुत सपोर्ट किया। सायरा बानो जी जी ने मेरा बहुत सपोर्ट किया।एक कलाकार हैं गोपी सप्रू जो चाइल्ड आर्टिस्ट के रूप में काफी फिल्में कर चुके हैं ने मेरा बहुत सपोर्ट किया जो ओम प्रकाश जी के साथ काम कर चुके हैं व बाद में निर्देशक के रूप में काम किया व फिर अपना न्यूज चैनल भी बनाया।अभी मैं उन्हीं की कंपनी में काम कर रहा हूं। मुझे एक्टर रविकिशन जी का भी बहुत सपोर्ट रहा।
इसके साथ कुमार शानू,अलका याज्ञनिक,शान,अदनान सामी,सोनू निगम,पलक मुछाल,हरिहरन,श्रेया घोषाल, सुनिधि चौहान, अर्जित सिंह ,मिका सिंह,आशा भोंसले, जसविंदर नरूला,सुरेश वाडेकर,मोहम्मद अजीज,साधना सरगम,राजा हसन,स्वरूप खान सहित बॉलीवुड के लगभग सभी सिंगर्स ने मेरे गाने गाए हैं।
बॉलीवुड में संगीत से मैलोडी धिरे धिरे गायब होती जा रही है। इसके बारे में आपका क्या कहना है ?
सन १९५० से लेकर सन २००१ तक का संगीत ऐसा था कि जिसे सुना जा सके उसको सिखाया जा सके।उसके बाद के अधिकतर संगीत में ना तो कोई सर है वो ना ही कोई पैर है।पहले म्यूजिक रागों में बनता था।मैलोडी होती थी। सिंगरों को रिहर्सल करवाया जाता था।सिंगर को पता होता था कि कौन हीरो गाने वाला है?कौन हीरोइन गाने वाली है?आजकल तो आर्टिस्ट को पता ही नहीं होता कि गाना किस तरह पिक्चेराइज होने वाला है।जैसे धर्मेन्द्र का गाना होता तो लगता था रफी साहब गा रहे हैं। अमिताभ बच्चन या राजेश खन्ना का गाना होता तो लगता किशोर कुमार गा रहे हैं।लता जी का गाना जैसे कि मुमताज़ गाएंगी ,शायरा बानो गाएंगी, नूतन जी गाएंगी या वहीदा रहमान गाएंगी।तो पहले एक सिस्टेमेटिक सिस्टम था। जैसे नौशाद जी,कल्याण जी आनंद जी,लक्ष्मीकांत प्यारेलाल जी,शंकर जयकिशनजी,बप्पी लाहिड़ी जी,मनमोहन जी जब संगीत देते थे तो उनको पहले से पता होता था कि फिल्म में ये हीरो हैं और ये हीरोइन हैं।आजकल सिंगरों को तो पता ही नहीं होता कि गाना किस पर पिक्चेराइज होने वाला है।
आपके अचीवमेंट क्या हैं अब तक के कैरियर में ?
मेरा सपना था लता जी आशा जी से मिलना।और मैं इनको गाते हुए देखना चाहता था।मैंने दिलीप सेन समीर सेन के स्टुडियों में इनसे मिला भी और इनको गाते हुए भी देखा।और मेरा सपना था भारत रत्न मंगेशकर फैमिली से मेरा नाम जुडे़ तो आशा जी ने मेरे साथ गाना गाया जो मेरे लिए गौरव की बात थी।एक फिल्म आई रही है मेरी 'उपर वाले दे दे छप्पर फाड़ के'जिसमें उदित नारायण,दीपा नारायण,अलका याज्ञनिक के साथ साथ आशा जी नें भी गाना गाया है।अभी मेरी एक पंजाबी फिल्म आ रही है 'वेर मेलेदा'जिसमें जसविंदर नरूला ने पूरे गाने गाए हैं।मेल सिंगर में शाहिद मालिया हैं ,दिलेर मेंहदी हैं।
आपका म्यूजिक की तरफ झुकाव कैसे हुआ ?
मैं सभी को घर में ललित सेन दिलीप सेन समीर सेन शम्भू सेन जी को जब काम करते हुए देखता था कि इस फिल्ड में इतना नाम होता है ,इतना सम्मान होता है। इतनी पब्लिसिटी होती है इतनी शोहरत हासिल होती है और साथ में हमेशा से ही दिल में यही ख्वाहिश थी कि कुछ करूं जिंदगी में। इसलिए मैंने साउंड इंजीनियर के रूप में काम किया। मेरी पहली फिल्म थी ओ जी ये दिवाना जिसमें अरविंद वघैला तथा नीलू नें काम किया था।इसके बाद मैंने जगजीत सिंह जी के साथ काम किया पंकज उधास जी के साथ काम किया।आदित्य नारायण जब छोटा बच्चा था तो उसका एलबम शहर की गोरी मैंने किया था। एक हरियाणवी गाना 'खिटपिट छोरी शहर की गोरी'भी बहुत हिट हुआ था।मेरी तमन्ना है कि मेरे देश का नाम रोशन हो,धरती का नाम रोशन हो, राजस्थान का नाम रोशन हो।मेरी एक फिल्म आ रही है 'म्हारो घर म्हारो मंदिर' जिसका टाइटल ट्रैक उदित नारायण जी ने गाया है जो बहुत अच्छा बना है और मेरी मेहनत कामयाब हुई है।जिसमें राजा हसन वो रेखा राव नें भी गाना गाया है।
म्यूजिक या गाना किस तरह तैयार करते हो ?
सिचुएशन देते हैं राइटर को जिससे वो गाना लिखकर देता है। फिर हम म्यूजिक बनाकर सिंगर से गंवाते वो म्यूजिशियन के पास जाकर मिक्सिंग करके दे देते हैं। म्यूजिक बनाना एक मेहनत का काम है। इंडस्ट्री ने मुझे खुब प्यार दिया है। सभी सिंगर्स ने भी मुझे काफी सम्मान व प्यार दिया है।
फिल्म इंडस्ट्री में आपको किसने सपोर्ट किया?
फारूख पटेल नें पहली बार मुझे ब्रेक दिया। मुझे दीपा जी,उदित जी,सायरा बानो का बहुत सपोर्ट मिला है।रवि किसन जी का मुझे खुब सपोर्ट मिला।मैंने धर्मेंद्र के साथ गीता मेरा नाम फिल्म की जो डाकुओं की फिल्म थी।
आपका सपना क्या है ?
मेरा सपना यही है कि जो कुछ मैं नहीं कर पाया वो मेरा बेटा करके दिखाए। वो भी एक बेहतरीन वो उभरता हुआ कम्पोज़र है। मेरे बेटे का एक भजन रिलीज हुआ है 'दर्शन दे दो माता'।फिर उसका एक एलबम रिलीज हुआ है दरमियान।व नागिन सिरीयल में बैकग्राउंड म्यूजिक कर रहा है।फिलहाल वह ललित सेन जी के साथ काम कर रहा है।
Reporter - Khabre Aaj Bhi
0 followers
0 Subscribers