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गाजीपुर : ये दुनिया की अदालतों का फैसला है अभी क़ुदरत का फैसला और उसका इंसाफ आना बाक़ी है।सभी मुसलमानों और इंसाफ के अलमबरदारों से अपील है कि वो आज अपने उन सभी हिंदू भाईयों को जिन्होंने मस्जिद की जगह राममंदिर की कल्पना की थी, उन्हें इस यक़ीन के साथ दिल खोलकर बधाई दें कि क़ुरआन का फरमान कभी ग़लत नहीं हो सकता। मुसलमानों की आसमानी किताब क़ुरआन में लिखा है कि "हम दिनों को लोगों के बीच उलटते फेरते रहते हैं " मतलब ये सब ख़ुदाई निज़ाम है कि आज जिसे सरदारी हासिल है कल उसे गदायी भी नसीब न हो। अल्लाह इंसांफ करने वालों को पसंद करता है और ज़ालिमों को इतिहास के सबसे गंदे पन्नों में दफन कर देता है।
उन्हें बधाई दें कि दिन के उजाले में खुलेआम तुम्हारी तरफ से की जाने वाली गुंडागर्दी को आज सरकारी तौर से मानन्यता दे दी गयी है। लेकिन कल जब तुम्हारे साथ इस तरह का इतिहास दोहराया जाए तो शिकायत न करना क्योंकि इतिहास कभी किसी को माफ नहीं करता। देश के मज़लूम मुसलमानों! अपनी नस्लों को बताते रहना कि गुंडों, नेताओं अधिकारियों जजों ने बड़ी चालाकी और होशियारी से बाबरी मस्जिद को तोड़ कर राम मंदिर बनाया था।अपनी नस्लों को बताना कि तुम्हारा तालीम में पीछे रहना, अपने किरदार में इस्लाम की सही तालीम न होना, इस्लाम के नाम पर की जाने वाली ग़लत बातों को भी जस्टिफाई करना, और एक झंडे के नीचे न आना भी इस कानूनी लड़ाई में मिली हार का कारण बना।न्यायालय का फैसला सर्वमान्य है, आस्था के आधार पर दिए गये इस फैसले को दिल से मानने वाले हमारे हिन्दू भाई बेशक कागजों की लड़ाई में जीत गये हैं। लेकिन दिलों की लड़ाई में हार गये हैं।
Reporter - Khabre Aaj Bhi
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