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By : जसवन्त सिह यादव
एटा : एक रात की बारिश ने एटा शहर की ही नहीं वल्कि पूरे जनपद के विकास की पोल खोल कर रख दी। ऐसा प्रतीत होता है। मानो सरकार का लाडला विकास घर घर में घुँस गया हो। और इस विकास ने गली मोहल्ला,सडकों बाजार ,अधिकारी एवं नेताओं को भी नहीं छोड़ा। जबरदस्ती विकास घरों में घुसता फिरता है। शहर के कई मोहल्लों में जैसे इस्लाम नगर,किदवई नगर,राम दरबार, सिंन्धीकालौनी, भगीपुर,बनगांव आदि मौहल्लों में सड़कों नालियों को तो छोड़ो घरों में दो-से तीन फीट तक दुर्गन्ध युक्त पानी के साथ घुस गया।
कई जगह टेंम्पो,तो कहीं कारें एवं कहीं बसें भी विकास की गोदी में हंँसती खिलखिलाती मिली। चारों ओर त्राहि माम-त्राहि माम जैसा नजारा देखने में था। रामलीला मैदान तो किसी झील से कम नहीं दिख रहा था। नगर पालिका कार्यालय, एसएससी कार्यालय, जिलाधिकारी कार्यालय, मेडिकल कॉलेज, जिला जज कार्यालय, चेयरमैन का कार्यालय और आवास भी इस विकास के घेरे में था।आखिर इस संपूर्ण विकास की बेह्याई का जिम्मेदार कौन है ? कुछ लोग कहते हैं। कि नगरपालिका का चेयरमैन जिम्मेदार है। चेयरमैन कहता है। कि ई.ओ जिम्मेदार है। ई.ओ.कहता है। कि जल निगम जिम्मेदार है। जल निगम कहता है। कि नगर पालिका और जिला प्रशाषन जिम्मेदार है। जिला प्रशाषन कहता है। कि इसके लिए नेता जिम्मेदार है।और नेता कहते हैं।कि उन्होने तो केवल विकास किया है। आखिर शहर की इस दुर्दशा की जिम्मेदारी कोई भी इतनी आसान बेह्याई से क्यों लेगा ? वह इसलिए नहीं लेगा।क्यों कि आम जनता जाति और धर्म मे फँसी हुई है।क्या यह विकास भी जाति और धर्म के भेदभाव को मानते हुए घरों में घुसा है?अथवा बेखौफ होकर के सबके साथ समान व्यवहार किया है। तो फिर इसी तरह आज नहीं तो कल जब ये आम जनता जागेगी और सडकों पर विकाश के पापा को दौडायेगी तब ये बेह्याई लादने वाले अपनी अपनी जिम्मेदारी समझेंगे।
Reporter - Khabre Aaj Bhi
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