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कहा जबरन थोपे गए बच्चे को नहीं देना चाहती जन्म, डीएनए करा कर गर्भ गिराने की दी जाए अनुमति
*नाबालिग का 12 अप्रैल 2019 को अपहरण कर हुआ था दुष्कर्म, मानसिक त्रासदी से गुजर रही पीड़िता*
रिपोर्टर:अफसर अली
उत्तर प्रदेश:जौनपुर-सरायख्वाजा थाना क्षेत्र निवासी15 वर्षीय नाबालिग लड़की ने आरोपित पंकज द्वारा दुष्कर्म से गर्भवती होना साबित करने के लिए डीएनए टेस्ट कराने की अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट से मांग किया है।भ्रूण के डीएनए व मुल्जिम पंकज के डीएनए से परीक्षण कराकर घटना की सत्यता व आरोपित का जुर्म साबित किया जा सकता है।आरोपित इस समय जेल में है।पीड़िता ने दरखास्त में यह भी लिखा कि वह मानसिक त्रासदी से गुजर रही है।जबरन थोपे गए गर्भ को वह जन्म नहीं देना चाहती।डीएनए टेस्ट कराने के बाद गर्भ गिराने की उसे अनुमति दी जाए।
सराय ख्वाजा थाना क्षेत्र स्थित ननिहाल में रह कर कक्षा 10 में पढ़ रही पीड़िता का 12 अप्रैल 2019 को गुरैनी बाजार से घर आते समय पंकज बहला-फुसलाकर अपहरण कर ले गया।22 अप्रैल 2019 को भंडारी स्टेशन पर छोड़ कर भाग गया।पीड़िता की मौसी ने प्राथमिकी दर्ज कराया था।पीड़िता ने मजिस्ट्रेट को दिए बयान में बताया कि आरोपित पंकज बहला फुसलाकर उसका अपहरण कर उसके साथ कई दिन तक दुराचार किया। दुष्कर्म से वह गर्भवती हो गई।5 माह का गर्भ है।पंकज द्वारा हैवानियत के साथ उसकी इज्जत लूटी गई जो जीवन भर की त्रासदी है और वह गर्भ जब जन्म लेगा तब उसे देखकर हैवानियत की याद तरोताजा होती रहेगी और वह मानसिक त्रासदी से गुजरती रहेगी।साक्ष्य के लिए भ्रूण की भी आवश्यकता है जिस वजह से वह भ्रूण को गिराने में समर्थ नहीं हो पा रही है।गर्भ में पल रहे भ्रूण को सुरक्षित रख कर उसे गिराया जाना जरूरी है।भ्रूण के डीएनए व आरोपित पंकज के डीएनए से परीक्षण कराकर घटना की सत्यता और पंकज का जुर्म साबित किया जा सकता है।पीड़िता किसी भी स्थिति में जबरन थोपे गए गर्भ को जन्म नहीं देना चाहती।चिकित्सीय न्याय शास्त्र में ऐसे गर्भ को गिराना कानूनन वैध है जिससे उस गर्भवती स्त्री को मानसिक विकार या त्रासदी होने की संभावना होती है लेकिन यदि भ्रूण सुरक्षित हुए बिना हुआ गर्भ गिरा देती है तो महत्वपूर्ण साक्ष्य नष्ट हो जाएगा।
Reporter - Khabre Aaj Bhi
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