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सेवराई/गाजीपुर : तहसील क्षेत्र के हसनपुरा, नगदिलपुर बिरउपुर परमानंदपुर आदि गांव का गंगा के रौद्र रूप के चलते मुख्य मार्ग से संपर्क टूट गया है। लोगों को आने-जाने में काफी परेशानियां हो रही हैं। तहसील प्रशासन एक ओर आपदा राहत बचाव कार्य का दावा कर रहा है दूसरी ओर ग्रामीणों को खाने पीने के सामानों के खरीदारी के लिए बाजार आना भी मुश्किल हो गया है। लोगों ने तहसील व जिला प्रशासन से मांग किया कि जल्द से जल्द बड़ी नाव की व्यवस्था की जाए जैसे लोग आवागमन कर अपनी आजीविका चला सकें।
हसनपुरा गांव निवासी विजय यादव ने बताया कि गांव से मुख्य मार्ग का संपर्क टूट चुका है किसी तरह ट्यूब व छोटी नाव के सहारे हम मुख्य सड़क तक आ पा रहे हैं। गांव चारों तरफ से पानी से घीर चुका है जिससे लोग मजबूरी वश घर में कैद हो गए हैं। सबसे ज्यादा समस्या पशु चारा की हो रही है। वही तबीयत बिगड़ने पर लोगों को उचित इलाज भी नहीं मिल पा रहा है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में बनाए गए डेरा को किसान खाली कर सुरक्षित स्थान की ओर पलायन कर रहे हैं। किसानों ने बताया कि बाढ़ की वजह से करीब कई हजार बीघा की खेती नष्ट हो चुकी है।
किसान सदानंद और संतोष ने बताया कि तहसील प्रशासन को कामाख्या धाम स्थित राहत शिविर को एक्टिव करना चाहिए जैसे अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिल सके। किसने की फैसले पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी हैं गांव के लोगों में संक्रामक बीमारियों के फैलने का भी अंदेशा बढ़ गया है। खंड विकास अधिकारी भदौरा त्रिवेणी राम और गहमर कोतवाल अशोक कुमार मिश्रा के द्वारा लगातार क्षेत्र का भ्रमण किया जा रहा है इलाकों के लोगों से बाढ़ के पानी से दूर रहने की हिदायत दी जा रही है।इस संबंध में एसडीएम संजय यादव ने बताया कि अभी प्राथमिक तौर पर बाढ़ प्रभावित इलाकों को दृष्टिगत रखते हुए नेहरू विद्यापीठ रेवतीपुर, नौली राहत शिविर को एक्टिव किया गया है। जल्द ही उन्हें लोगों के आवागमन के लिए गांव में तैनात किया जाएगा।
Reporter - Khabre Aaj Bhi
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