उर्दू पत्रकारिता के 200वीं वर्षगांठ पर राष्ट्रीय ख्यातिलब्ध पत्रकार स्व० हारून रशीद अ़लीग किए गए याद, स्वतंत्रता संग्राम में उर्दू पत्रकारिता का महान योगदान : मंसूर आलम ख़ान मनियांवी

By: Izhar
Dec 21, 2022
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सेवराई : उत्तर प्रदेश जनपद गा़ज़ीपुर के सेवराई तहसील अन्तर्गत ग्राम मनियां मे उर्दू पत्रकारिता के दो सौ वर्ष पूरे हो चुके हैं, जिसको साहित्यिक संस्था "बज़्म ए अदब" ग्राम मनियां ज़िला ग़ाज़ीपुर, उत्तर प्रदेश के संयोजन और सरफराज ख़ान उर्फ सफान के आयोजन में इस क्षेत्र के राष्ट्रीय स्तर के पत्रकार स्वर्गीय 'हारून रशीद अ़लीग' निवासी ग्राम उसिया ज़िला गा़ज़ीपुर को समर्पित करते हुए बीते रविवार को दिन में एक साहित्यिक आयोजन किया गया, जिसमें मुशायरा/कवि सम्मेलन भी सम्मिलित था। प्रदेश स्तरीय लगभग दो दर्जन शायरों, कवियों तथा साहित्यकारों ने भाग लिया। 

कार्यक्रम का आरंभ पवित्र क़ुरआन के पाठ से हुआ। तदोपरांत बज़्म में आए सभी सम्मानित शायरों, कवियों और साहित्यकारों के माल्यार्पण व सम्मान के बाद खुतबा-ए-इस्तक़बालिया/स्वागत भाषण पढ़ा गया जिसे श्री मक़सूद अली ख़ान ने पढ़़ी। "बज़्म ए अदब" मनियां के अध्यक्ष तथा इन्क़लाब उर्दू के संपादक मंडल के सदस्य श्री शाह नवाज़ ख़ान द्वारा स्वर्गीय 'हारून रशीद अ़लीग' की पत्रकारिता के क्षेत्र में की गई उत्कृष्ट सेवाओं का वर्णन करते हुए उनकी शान में एक "सताइश नामा" प्रस्तुत किया गया।  बज़्म ए अदब' मनियां के सेक्रेटरी श्री मन्सूर आ़लम ख़ान द्वारा उर्दू पत्रकारिता के इतिहास एवं प्रगति को रेखांकित करते हुए एक ऐतिहासिक "मक़ाला" प्रस्तुत किया जिसमें उर्दू सहाफी मौलवी बाकर अली की कुर्बानियों को याद करते हुए आजा़दी की लड़ाई में उर्दू पत्रकारिता के योगदान को संक्षेप में प्रकाश डाला।

सभा की अध्यक्षता क्षेत्र के ख्याति प्राप्त साहित्यकार एवं 'बारा साहित्य मंच' के अध्यक्ष श्री सरवत मह़मूद ख़ान ने की, अपने उद्बोधन में श्री सरवत महमूद साहब ने मनियां की अदबी, साहित्यिक और सामाजिक सहभागिता को रेखांकित करते हुए भविष्य में इस तरह के और भी प्रोग्राम होने की सार्थकता पर बल दिया। संचालन प्रतिष्ठित साहित्यकार और शायर श्री ख़ान ज़ियाउद्दीन मुह़म्मद क़ासिम 'कुसुम' एवं मुशायरे/कवि सम्मेलन की निज़ामत डॉ नाहिदा ख़ातून द्वारा किया गया।

शायर व कवि हुए शामिल

शायरों में वयोवृद्ध कवि अनंत देव पांडेय 'अनंत',  मिथिलेश गहमरी, शमीम ग़ाज़ीपुरी, आसी यूसुफपुरी, हंटर ग़ाज़ीपुरी, सुमन यूसुफपुरी, अहकम ग़ाज़ीपुरी, डॉक्टर साजिद ग़ाज़ीपुरी, इरशाद जनाब खलीली, मासूम रशीदी, चंचल यूसुफपुरी, बादशाह राही, जिया क़ासिम, मुमताज साहिल, अयूब सैफी और डॉक्टर सैयद ज़फर असलम वगैरह ने अपने खूबसूरत कलाम से सामयीन का दिल जीता और शायरों से बहुत वाहवाही मिली। 

दो पुस्तकें लोकार्पित

 इस मौके पर अहकम ग़ाज़ीपुरी का शेरी मजमूआ "फिक्र-ए-बेकरां" और डॉक्टर साजिद ग़ाज़ीपुरी का शेरी मजमूआ "सा'अत-ए-फ़िक्र" का रस्म इज़रा/पुस्तक विमोचन भी हुआ। अंत में डॉ नाहिदा ख़ातून द्वारा सभी अतिथियों का शुक्रिया अदा करते हुए अपराह्न तीन बजकर तीस मिनट पर सभा समाप्ति की घोषणा कर दी गई। 

क्षेत्रीय साहित्यकारों, समाजसेवियों का जमावड़ा

इस प्रोग्राम में गांव के अलावा पास पड़ोस के काफी तादाद में लोग शामिल थे जिनमें मुख्य रूप से अल दीनदार शम्सी म्यूज़ियम एंड रिसर्च सेंटर के संरक्षक पूर्व प्रधानाध्यापक हाजी मु.करीम रज़ा ख़ाँ एवं संस्थापक व संग्राहक 'कुँअर' नसीम रज़ा ख़ाँ, डॉक्टर वसीम रज़ा, अबू बकर ख़ान उर्फ बेचन, कबीर ख़ान, जियाउद्दीन टप्पू, जयदेव उपाध्याय, कृष्ण देव उपाध्याय, कमरुद्दीन ख़ान, इकराम ख़ान, तुफैल ख़ान, मदन उपाध्याय, रामकृष्ण यादव, मौलाना अमीर हम्ज़ा, शब्बीर ख़ान प्रधान, सरवर ख़ान, मोहम्मद अहमद ख़ान टीटीई, शाह आलम ख़ान टीटीई, नस्सन खान प्रधान इत्यादि प्रमुख थे।


Izhar

Reporter - Khabre Aaj Bhi

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