
जौनपुर : नगर के विवाह मैरेज लॉन में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथाव्यास पं. रजनीकांत द्विवेदी ने हनुमान महिमा, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव और पुतना वध के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि सत्संग का प्रभाव इतना गहरा होता है कि मनुष्य का पूरा जीवन बदल सकता है। सत्संग के सामने संसार के सुख और वैभव का कोई विशेष महत्व नहीं है। मनुष्य के जीवन की वास्तविक सार्थकता परमात्मा के भजन, संकीर्तन और उनकी कथा के श्रवण में है। हनुमान जी की महिमा का वर्णन करते हुए कथाव्यास ने बताया कि प्रभु श्रीराम की कथा के प्रति उनकी भक्ति और समर्पण अद्वितीय था। उन्होंने प्रसंग सुनाया कि जब प्रभु श्रीराम ने हनुमान जी से अपने साथ चलने के लिए कहा, तो हनुमान जी ने पूछा कि क्या वहां भी प्रभु की कथा सुनने को मिलेगी। जब उन्हें बताया गया कि कथा का श्रवण धरती पर ही संभव होगा, तो उन्होंने साकेत धाम जाने के बजाय यहीं रहने का निर्णय लिया। पं. द्विवेदी ने कहा कि हनुमान जी भगवान श्रीराम की कथा में इतने लीन रहते थे कि उनके लिए कथा श्रवण ही सबसे बड़ा सुख था। उन्होंने सच्चे सेवक के रूप में प्रभु की सेवा की और अपने आचरण से समर्पण, निष्ठा तथा भक्ति का आदर्श प्रस्तुत किया। मनुष्य को हनुमान जी के जीवन से प्रेरणा लेकर अपने जीवन को सार्थक बनाना चाहिए
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग सुनाते हुए कथाव्यास ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से नंद बाबा और माता यशोदा के घर आनंद छा गया। नंद बाबा ने 108 ब्राह्मणों को आमंत्रित कर अपने घर में पाठ कराया
इस प्रसंग की आध्यात्मिक व्याख्या करते हुए कथाव्यास ने कहा कि पुतना का अर्थ अविद्या है। जहां अविद्या का वास होता है, वहां विवेक का अभाव मनुष्य को संकट में डाल सकता है। इसलिए जीवन में विवेक, सत्संग और आध्यात्मिक ज्ञान का विशेष महत्व है। मनुष्य को सही और गलत के बीच अंतर समझते हुए अपने जीवन में सदाचार और भक्ति को स्थान देना चाहिए। कथा के दौरान श्रद्धालु श्रीकृष्ण जन्मोत्सव और अन्य प्रसंगों को सुनकर भावविभोर हुए। सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा की मुख्य यजमान श्रीमती विमला सेठ हैं। इस अवसर पर मनोज पाण्डेय, राकेश कुमार सिंह, सोनी, सुनील मिश्र, आचार्य सूरत तिवारी, संतोष कुमार जी, नीलम, किरण सेठ, रेखा सेठ, बबली सेठ, अर्चना, विशाल सेठ, विपिन सेठ, हर्षित सेठ, हार्दिक सेठ समेत गठना कोठी परिवार के सदस्य और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।


