

बॉयलर इंडिया 2026’ के माध्यम से उद्योगों को नया मंच – श्रम मंत्री एड. आकाश फुंडकर

ठाणे : बॉयलर उद्योग में सुरक्षा, आधुनिक तकनीक, कौशल विकास और उद्योग हितैषी व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। ‘बॉयलर इंडिया 2026’ के माध्यम से इस क्षेत्र के निर्माताओं, उद्यमियों, विशेषज्ञों, इंजीनियरों, ऑपरेटरों और ग्राहकों को एक मंच पर लाकर तकनीक एवं ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह बात श्रम मंत्री एड. आकाश फुंडकर ने कही।
वाशी स्थित सिडको प्रदर्शनी केंद्र में श्रम विभाग के बॉयलर निदेशालय की ओर से आयोजित ‘बॉयलर इंडिया 2026’ कार्यशाला, परिचर्चा एवं प्रदर्शनी का उद्घाटन मंत्री एड. आकाश फुंडकर के हाथों किया गया। इस अवसर पर वे संबोधित कर रहे थे।
कार्यक्रम में वस्त्रोद्योग मंत्री संजय सावकारे, नवी मुंबई महानगरपालिका की महापौर सुजाता पाटील, श्रम विभाग की अपर मुख्य सचिव आई.ए. कुंदन, विकास आयुक्त (असंगठित कामगार) सुशील खोडवेकर, केंद्रीय बॉयलर बोर्ड के सचिव एवं तकनीकी सलाहकार (बॉयलर) संदीप कुंभार तथा बॉयलर निदेशालय के संचालक संदीप चिवटे सहित अनेक गणमान्य उपस्थित थे।
उद्योगों की उत्पादन प्रक्रिया में बॉयलर की अहम भूमिका
मंत्री फुंडकर ने कहा कि ऊर्जा उत्पादन, चीनी उद्योग, वस्त्रोद्योग, रसायन, पेट्रोकेमिकल, खाद्य प्रसंस्करण, औषधि निर्माण, कागज उद्योग और रिफाइनरी सहित अनेक क्षेत्रों में बॉयलर उत्पादन प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए बॉयलर की सुरक्षा, कार्यक्षमता और विश्वसनीयता का सीधा संबंध उद्योग की उत्पादकता, कामगारों की सुरक्षा, ऊर्जा के कुशल उपयोग, पर्यावरण और देश की औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता से है।
उन्होंने बताया कि शासन के 150 दिवसीय कार्यक्रम के तहत ई-गवर्नेंस और नागरिक केंद्रित सेवाओं पर विशेष जोर दिया गया है। इस पहल में बॉयलर निदेशालय ने राज्य के 68 विभागों में चौथा स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने इसके लिए निदेशालय की सराहना की। बॉयलर क्षेत्र में निरीक्षण, मंजूरी और ऑडिट जैसी प्रक्रियाओं को अधिक सरल बनाने के प्रयास जारी हैं।
हादसा होने से पहले खतरे की पहचान जरूरी
मंत्री फुंडकर ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) अब भविष्य की बात नहीं, बल्कि आज के उद्योग की जरूरत बन चुकी है। बॉयलर में खराबी आने के बाद सूचना मिलने के बजाय खराबी की संभावना पहले ही पहचानकर प्रतिबंधात्मक उपाय किए जा सकते हैं या नहीं, इस पर विशेषज्ञों और उद्योग जगत को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
उन्होंने उम्मीद जताई कि ‘बॉयलर इंडिया 2026’ के माध्यम से आधुनिक तकनीक, नई अवधारणाओं और औद्योगिक सुरक्षा से जुड़े प्रभावी उपायों पर व्यापक चर्चा होगी।
नागपुर में कौशल विकास केंद्र
फुंडकर ने कहा कि बॉयलर उद्योग के भविष्य के लिए बड़े पैमाने पर कुशल मानव संसाधन की आवश्यकता है। उच्च दबाव वेल्डिंग, बॉयलर निर्माण, निरीक्षण, नॉन-डिस्ट्रक्टिव टेस्टिंग, रखरखाव, ऑटोमेशन और आधुनिक बॉयलर संचालन जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित युवाओं की जरूरत है।
इसी उद्देश्य से नागपुर में कौशल विकास केंद्र शुरू किया जा रहा है। इसे बॉयलर कौशल, वेल्डिंग, निरीक्षण और औद्योगिक सुरक्षा के लिए उत्कृष्टता केंद्र में बदलने का सरकार का प्रयास है। इससे महाराष्ट्र के युवाओं को कौशल प्रमाणपत्र के साथ रोजगार के अवसर मिलेंगे और उद्योगों को आवश्यक कुशल मानव संसाधन उपलब्ध कराने में मदद होगी।
‘सेफ्टी फर्स्ट’ केवल नारा नहीं, कार्यपद्धति बने
बॉयलर क्षेत्र में उच्च दबाव, उच्च तापमान और जटिल औद्योगिक प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। ऐसे में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना आवश्यक है। कामगारों के कारण उद्योग खड़े हैं और उद्योगों के माध्यम से देश का आर्थिक विकास हो रहा है। इसलिए कामगारों की सुरक्षा उद्योगों की मूलभूत जिम्मेदारी है।
‘सेफ्टी फर्स्ट’ केवल एक नारा न रहकर प्रत्येक उद्योग की वास्तविक कार्यपद्धति बनना चाहिए, ऐसा आह्वान मंत्री फुंडकर ने किया।
बॉयलर निर्माण से निरीक्षण तक सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी
– वस्त्रोद्योग मंत्री संजय सावकारे
वस्त्रोद्योग मंत्री संजय सावकारे ने कहा कि बॉयलर निर्माण में प्लेट रोलिंग, डिसिंग, ट्यूब शीट, ट्यूब, वेल्डिंग, विभिन्न परीक्षण, हाइड्रो टेस्टिंग और शेल टेस्टिंग जैसी अनेक प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। प्रत्येक प्रक्रिया में निर्धारित तकनीकी मानकों और सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि ‘बॉयलर इंडिया’ के माध्यम से निर्माता, विक्रेता और ग्राहक एक ही मंच पर आ रहे हैं। इससे उद्योग क्षेत्र को कारोबार और सहयोग के नए अवसर उपलब्ध होंगे।
देश-विदेश के 246 प्रदर्शकों की भागीदारी
श्रम विभाग की अपर मुख्य सचिव आई.ए. कुंदन ने ‘बॉयलर इंडिया 2026’ के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि बॉयलर औद्योगिक क्षेत्र का महत्वपूर्ण आधारस्तंभ है। इसके संबंध में व्यापक जनजागरूकता और जानकारी का आदान-प्रदान आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि ‘बॉयलर इंडिया’ का यह चौथा आयोजन है और इस वर्ष देश-विदेश के लगभग 246 प्रदर्शकों ने इसमें हिस्सा लिया है। बॉयलर की भूमिका केवल गर्मी पैदा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि ऊर्जा दक्षता बढ़ाने, कार्बन उत्सर्जन कम करने और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
केंद्रीय बॉयलर बोर्ड के सचिव एवं तकनीकी सलाहकार संदीप कुंभार ने केंद्र सरकार द्वारा बॉयलर क्षेत्र में किए जा रहे सुधारों और नई नियामक व्यवस्था की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि निर्माता, उपयोगकर्ता, मरम्मतकर्ता, फैब्रिकेटर और इंजीनियरों के बीच ज्ञान का आदान-प्रदान बढ़ाने में ‘बॉयलर इंडिया’ महत्वपूर्ण मंच साबित हो रहा है।
मंत्रियों ने प्रदर्शनी के स्टॉलों का किया निरीक्षण
इस अवसर पर श्रम मंत्री एड. आकाश फुंडकर और वस्त्रोद्योग मंत्री संजय सावकारे ने प्रदर्शनी के विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण किया। उन्होंने विभिन्न निर्माताओं द्वारा प्रदर्शित बॉयलर, आधुनिक उपकरण, तकनीक और सुरक्षा उपायों की जानकारी ली तथा संबंधित प्रतिनिधियों से संवाद किया।
कार्यक्रम में बॉयलर की विभिन्न तकनीकों पर आधारित लघु फिल्म भी दिखाई गई। प्रदर्शनी में विभिन्न प्रकार के बॉयलर, आधुनिक तकनीक, सुरक्षा उपकरण और संबंधित सेवाओं की जानकारी प्रदर्शित की गई। बॉयलर क्षेत्र की तकनीक, सुरक्षा, नियमों और कार्यप्रणाली से संबंधित जानकारीपूर्ण पुस्तकों का विमोचन भी किया गया।
कार्यक्रम में वरिष्ठ अभिनेता नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
कार्यक्रम का प्रास्ताविक बॉयलर निदेशालय के संचालक संदीप चिवटे ने किया। संचालन श्वेता शेलगांवकर ने किया, जबकि आभार उपसंचालक ए.एम. झुंझुरे ने माना।
इस अवसर पर विभिन्न राज्यों के अधिकारी, बॉयलर क्षेत्र के विशेषज्ञ, इंजीनियर, निर्माता, औद्योगिक प्रतिनिधि, ऑपरेटर और प्रदर्शक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

