
तीन साल पहले हुई थी एंजियोप्लास्टी, उसी जगह फिर बना गंभीर ब्लॉकेज,न्युईरा हॉस्पिटल में हुआ सफलतापूर्वक इलाज
नवी मुंबई : दूसरों की जान बचाने वाले 47 वर्षीय लाइफगार्ड की दिल की एक नस 95% ब्लॉक थी। ऐसी स्थिति में नवी मुंबई स्थित न्युईरा हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने तुरंत इलाज करके उन्हें नई जिंदगी दी हैं। मरीज को पहले से डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारी थी। तीन साल पहले उनकी एंजियोप्लास्टी हुई थी। इस बार पहले लगाए गए स्टेंट वाली जगह पर ही गंभीर ब्लॉकेज हो गया था। लेकिन अस्पताल के डॉक्टरों ने सफलतापूर्वक एंजियोप्लास्टी करने मरीज को नई जिंदगी दी हैं।

वाशी गाँव में रहने वाले राजाराम जोशी को पिछले आठ दिनों से सीने में दर्द हो रहा था। लेकिन जब दर्द बढ गया तो उनकी सेहत बिघडती गई। उनका ब्लड प्रेशर भी काफी बढ़ा हुआ था और ईसीजी में भी बदलाव दिखाई दिए। मरीज की पुरानी बीमारी और बढ़ते लक्षणों को देखते हुए डॉक्टरों ने तुरंत जांच शुरू की।
न्युईरा हॉस्पिटल के कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. गौरव सुराणा ने कहा, “जिस मरीज की पहले एंजियोप्लास्टी हो चुकी है, उसे सीने में दोबारा दर्द या परेशानी होने पर इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर अगर सीने में दर्द के साथ पसीना आए या सांस लेने में परेशानी हो। इस मरीज का ब्लड प्रेशर 195/120 mmHg था और ईसीजी में भी बदलाव थे। एंजियोग्राफी में पहले लगाए गए स्टेंट वाली जगह पर 95% ब्लॉकेज पाया गया।”
डॉ. सुराणा ने आगे कहा, “मरीज में ब्लॉकेज का एक कारण हाई ब्लड प्रेशर और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल हो सकता है। डायबिटीज, हाई बीपी, कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान और इन बीमारियों को नियंत्रण में न रखना दोबारा ब्लॉकेज का खतरा बढ़ सकता है। स्टेंट लगाने के बाद भी कुछ मरीजों में उसी जगह या दूसरी नस में दोबारा ब्लॉकेज हो सकता है। इस मरीज में ब्लॉकेज काफी गंभीर था और लक्षण भी बढ़ रहे थे, इसलिए बिना समय गंवाए उसी समय दोबारा एंजियोप्लास्टी करने का फैसला लिया गया।”
डॉ. सुराणा ने बताया, “मरीज की दाहिनी कोरोनरी आर्टरी में एक नया दवा-युक्त स्टेंट लगाया गया। सबसे पहले एक पतली ट्यूब के जरिए ब्लॉकेज वाली जगह तक पहुंच बनाई गई। इसके बाद एक छोटे गुब्बारे की मदद से नस को खोला गया और फिर दवा-युक्त स्टेंट लगाया गया। इससे नस खुल गई और दिल तक खून का प्रवाह बेहतर हो गया। पूरी प्रक्रिया करीब 30 मिनट में सफलतापूर्वक पूरी हुई।”
एंजियोप्लास्टी के बाद मरीज को कुछ समय के लिए आईसीयू में निगरानी में रखा गया। हालत स्थिर होने के बाद उन्हें वार्ड में शिफ्ट किया गया। 24 घंटे की निगरानी के बाद उन्हें स्थिर हालत में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। ब्लड प्रेशर की निगरानी के आधार पर उनकी दवाओं में बदलाव किया गया। डॉक्टरों ने उन्हें 15 दिन आराम करने और उसके बाद धीरे-धीरे रोजमर्रा की गतिविधियां शुरू करने की सलाह दी।
डॉ. सुराणा ने कहा, “एंजियोप्लास्टी से ब्लॉकेज को खोला जा सकता है, लेकिन इससे दिल की बीमारी का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता। जिन लोगों की पहले एंजियोप्लास्टी हो चुकी है, उन्हें सीने में किसी भी नए या दोबारा होने वाले दर्द को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसे सिर्फ गैस या थकान समझकर छोड़ना सही नहीं है। इस मरीज ने जब दर्द बढ़ने पर समय पर अस्पताल में इलाज लिया, तो गंभीर ब्लॉकेज का पता चला और समय पर इलाज संभव हुआ।”
मरीज राजाराम जोशी ने कहा, “डॉ. गौरव सुराणा और उनकी पूरी टीम ने मेरा बहुत अच्छे से इलाज किया। मुश्किल समय में डॉक्टरों ने मेरा हौसला बढ़ाया। मैं डॉक्टरों और अस्पताल के पूरे स्टाफ का दिल से धन्यवाद करता हूं।”
न्युईरा हॉस्पिटल के वाइस प्रेसिडेंट एवं सीईओ डॉ. माताप्रसाद गुप्ता ने कहां, “न्यूएरा अस्पताल में हमारा प्रयास है कि मरीजों को सही समय पर बेहतर इलाज मिल सके। दिल से जुड़ी इमरजेंसी में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। हमारी टीम जल्द जांच, सही इलाज और मरीज की जरूरत के अनुसार देखभाल पर ध्यान देती है, ताकि मरीज जल्द स्वस्थ होकर अपनी सामान्य जिंदगी में लौट सकें।”

