
वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक बालकृष्ण सावंत की भूमिका पर उठे सवाल; आंबेडकरी समाज में नाराजगी
नवी मुंबई : रबाले पुलिस थाने में भारतीय संविधान के शिल्पकार भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की तस्वीर लगाए जाने की मांग को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कुछ सामाजिक संगठनों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने इस संबंध में रबाले पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक बालकृष्ण सावंत को पत्र देकर पुलिस थाने में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की तस्वीर लगाने की मांग की है।

हालांकि, संबंधित कार्यकर्ताओं का दावा है कि इस मांग पर वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक सावंत ने यह कहते हुए आपत्ति जताई कि “सभी लोग आएंगे और हमें कई महापुरुषों की तस्वीरें लगाने के लिए कहेंगे; यह कानून के अनुसार नहीं है।” सावंत की कथित भूमिका से आंबेडकरी समाज में नाराजगी फैलने की बात कही जा रही है।
‘तस्वीर लगाने के लिए जीआर की जरूरत है क्या?’
भारतीय संविधान के शिल्पकार डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की तस्वीर देश के विभिन्न सरकारी कार्यालयों, न्यायालयों और सार्वजनिक संस्थानों में देखी जाती है। ऐसे में पुलिस थाने में डॉ. आंबेडकर की तस्वीर लगाने के लिए क्या किसी स्वतंत्र सरकारी आदेश (जीआर) या वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति आवश्यक है, यह सवाल संविधानप्रेमी नागरिकों द्वारा उठाया जा रहा है।
इस बीच, कार्यकर्ताओं ने दावा किया है कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की तस्वीर लगाने का विरोध किया गया अथवा इसके लिए विशेष ‘जीआर’ की मांग की गई। हालांकि, इस मामले में पुलिस प्रशासन की आधिकारिक भूमिका स्पष्ट होना जरूरी है।
विरोध प्रदर्शन की तैयारी?
इस मामले को लेकर आंबेडकरी समाज में नाराजगी बढ़ने की खबर है। वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक बालकृष्ण सावंत की कथित भूमिका के विरोध में मार्च निकालने की तैयारी शुरू होने की जानकारी सूत्रों से मिल रही है। साथ ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मामले की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग भी की जा रही है।
रबाले क्षेत्र में विभिन्न समाजों के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं। ऐसे में पुलिस प्रशासन सभी नागरिकों की भावनाओं और संविधान के मूल्यों का सम्मान करते हुए भूमिका अपनाए, ऐसी अपेक्षा व्यक्त की जा रही है।
‘कानून की वर्दी पहनने वाले अधिकारियों को संविधान के मूल्यों की जानकारी होना जरूरी’
आंबेडकरी समाज और संविधानप्रेमी नागरिकों का सवाल है कि “देश की कानून-व्यवस्था भारतीय संविधान के आधार पर चलती है। ऐसे में संविधान के शिल्पकार डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की तस्वीर को लेकर ऐसी भूमिका क्यों अपनाई जा रही है?”
हालांकि, संबंधित अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाने से पहले इस पूरे मामले की आधिकारिक जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाना आवश्यक है। साथ ही डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की तस्वीर सरकारी पुलिस थाने में लगाने को लेकर लागू शासन निर्णय, नियम अथवा प्रशासनिक दिशा-निर्देश क्या हैं, इसकी जानकारी पुलिस प्रशासन द्वारा सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किए जाने की मांग भी नागरिकों द्वारा की जा रही है।

