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By :मोहम्मद जावेद खान
"पढ़े लिखे युवा नाली व गटर साफ करते,*
"और अनपढ़ नेता बड़ी-बड़ी परियोजनाएं बनाते । वाह ऊपर वाले तेरा क्या इंसाफ है ।।
बेरोज़गार युवाओं को राजनीति का औज़ार बनाने वाले,इन बेरोज़गारों को अपनी राजनीति का हथियार बनाने वाले,अपना काम निकल जाए तो इन बेरोज़गारों को बेकार समझते हैं, यह सियासतदां ।
इस दौर के पढ़े-लिखे युवा नौकरी के सपने देखते हैं,और मन ही मन सोचते हैं बड़ी हसीन होगी तू, ऐ नौकरी तुझे पाने के लिए पढ़े लिखे युवा तुझ पर ही मरते हैं, पर तू झलक तक नहीं दिखाती, और हमारे नेता नौकरी के नाम पर इन बेरोज़गारों का मज़ाक उड़ाते हैं,और कहते हैं,गुलामी की ज़ंजीरों से स्वतंत्रता की शान अच्छी है,चंद रुपए की नौकरी से पंचर की दुकान अच्छी है । बेरोज़गार युवा नौकरी के लिए शहरों की तरफ दौड़ते हैं,कपड़ों की गठरी सिर पर उठाएं,अपनी मायूसी और मज़बूरी अपने घर वालों से छुपाए,खचाखच भरी ट्रेनों में बिना टिकट बड़े-बड़े शहरों की तरफ पलायन करते हैं,जेबों में डिप्लोमा और इंजीनियरिंग की डिग्री लिए हुए रोज़गार कार्यालय की लाइनों में खड़े हुए पूरा दिन भूखे प्यासे जब खिड़की पर नंबर आया बाबू ने ज़ोर से चिल्लाया कार्यालय के बंद होने का समय हो गया है,कल छुट्टी है,परसों आना मायूस चेहरों के साथ फिर एक दिन निकल जाता है,फिर रात फुटपाथ पर गुज़ारना पड़ेगी,घर से लाई हुई रोटी भी खत्म हो गई,आज रात को भूखे पेट ही सोना पड़ेगा ।
यह कहानी इस देश के पढ़े लिखे बेरोज़गारों की । कितने अरमानों से माँ बाप ने इनको पढ़ाया,बाप मज़दूरी करता था और माँ लोगों के घर पर झाड़ू पोछे का काम करती थी,माँ बाप को उम्मीद थी,उनका बेटा पढ़ लिखकर बहुत बड़ा अधिकारी बनेगा,इसलिए वह अपना पेट काट काट कर पैसे बचा कर अपने बेटे को पढ़ा लिखा रहे थे, त्यौहारों के समय अपने पुराने कपड़ों को धो कर पहन लेते थे,लोगों के घर पर मिठाईयां आती,पर यह बेटे की पढ़ाई के खर्चे की वजह से गुड़ चने से ही काम चला लेते थे,बच्चे की पढ़ाई पूरी हुई,उनके बेटे ने कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की थी,जिस दिन बेटा डिग्री लेकर घर पहुंचा,पूरे मोहल्ले में जश्न का माहौल था,एक झोपड़पट्टी में रहने वाला बच्चा इंजीनियर बन गया था।
नौकरी की तलाश में गरीब माँ बाप का इंजीनियर बेटा शहर चला जाता है,नौकरी की तलाश में दर-दर भटकता है पर नौकरी उसको नहीं मिलती इस बीच माँ का संदेशा आता है,तुम्हारे पिता बहुत बीमार है,तुम्हारी नौकरी लग गई होगी,कुछ पैसे भेज दो,संदेशा सुनकर इंजीनियर बेटे के पैरों तले ज़मीन निकल जाती है। क्योंकि वह नौकरी की तलाश में दर-दर भटक रहा था,पर उसको निराशा ही हाथ लग रही थी,उसकी पहचान एक सफाई कर्मी से हो जाती है और सफाई कर्मी उसको गटर साफ करने की नौकरी दिलवा देता है ।
यह विडंबना हमारे देश के बेरोज़गारों युवाओं की है। पढ़ा-लिखा इंजीनियर आज गटर की सफाई कर रहा है,ऐसा ही कुछ बिहार में देखने को मिला चतुर श्रेणी की नौकरी के लिए हज़ारों डिप्लोमा एवं इंजीनियरिंग डिग्री प्राप्त किए हुए बेरोज़गारों ने इस नौकरी के लिए आवेदन दिए कोई भी माता-पिता अपने बच्चे को यह सोचकर कभी इंजीनियरिंग नहीं पढ़ाते होंगे कि पढ़ाई पूरी करने के बाद वो चपरासी की नौकरी करें।
लेकिन देश में इस वक़्त सरकारी नौकरी के लिए इतनी मारामारी है कि न केवल बीटेक की डिग्रीधारक बल्कि मास्टर डिग्री वाले इंजीनियर भी चपरासी, माली, दरबान और सफाईकर्मी बनने के लिए लाइन में लगे हुए हैं ।
बिहार विधानसभा में चपरासी, माली, सफाईकर्मी और दरबान बनने के लिए चतुर्थ श्रेणी के कुल १३६ पदों पर भर्ती चल रही थी और इसके लिए पांच लाख से भी अधिक आवेदन आए थे ।
आवेदकों में सैकड़ों उम्मीदवार ऐसे थे,जिनके पास बीटेक और एमटेक की डिग्री थी,हज़ारों ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट थे। कुछ ऐसे भी थे,जो आईएएस और आईपीएस बनने के लिए यूपीएससी की परीक्षाओं प्रीलिम्स,मेन्स को भी उत्तीर्ण कर चुके थे ।
वहीं तमिलनाडु के कोयंबटूर में नगर निगम द्वारा सफाई कर्मियों की नौकरी क्या निकाली पढ़े-लिखे युवाओं का सैलाब इन नौकरियों के लिए उमड़ पड़ा सफाईकर्मी के ५४९ पोस्ट के ७० हज़ार पढ़े लिखे बेरोज़गारो ने आवेदन दिया,इसमें डिप्लोमा इंजीनियरिंग एवं स्नातक बेरोज़गार युवा थे।
क्या आप यह अंदाजा लगा सकते हैं कि,इंजीनियरिंग की डिग्री लेने के बाद कोई युवा सफाईकर्मी की नौकरी करने में दिलचस्पी दिखा सकता है,तमिलनाडु के कोयंबटूर में नगर निगम ने सफाई कर्मी के ४५९ पद के लिए नौकरी निकाली थी.इस के लिए आवेदन करने वाले युवाओं में अच्छी खासी योग्यता वाले युवा शामिल थे । इसकी वजह यह है कि देश में रोज़गार के मौकों की बहुत कमी है,यही वजह है कि सफाईकर्मी के पद के लिए इंजीनियरिंग कर चुके लोगों ने भी आवेदन दिया था ।
इंजीनियरिंग में स्नातक अरुण कुमार ने कहा, मैंने इंजीनियरिंग कर ली है, लेकिन नौकरी नहीं मिलने की वजह से मैं सफाई कर्मी की इस नौकरी के लिए आया हूँ." उन्होंने कहा कि उनके मैकेनिकल इंजीनियरिंग बैच के कम से कम 13 युवाओं ने इस सफाई कर्मी के लिए आवेदन किया था । नगर निगम के अधिकारी के मुताबिक तीन दिनों के इंटरव्यू में इंजीनियर, पोस्ट ग्रेजुएट और ग्रेजुएट हैं ।
क्या गुज़रेगी इन पढ़े-लिखे युवाओं के माँ बापो पर जब उनका पढ़ा लिखा बच्चा नालियां साफ करेगा।
तक़दीर लिखने वाले एक एहसान कर दे।
*बेरोज़गारों की तक़दीर में रोज़गार लिख दे।
जिन्दगी में ना मिले किसी पढ़े-लिखे को बेरोज़गारी का दर्द ।
तू चाहे तो इन सब की किस्मत को बुलंद कर दे ।।
Byमोहम्मद जावेद खान
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Reporter - Khabre Aaj Bhi
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