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महाराष्ट्र में सच बोलने वाले व सवाल पूछने वाले पत्रकारों का उत्पीड़न कर रही सरकार व मुंबई पुलिस
कानून और मानवाधिकारों की बात करने वाले ही लोग उड़ा रहे संविधान और कानून की धज्जियां, केंद्र सरकार को यथाशीघ्र संज्ञान लेने की जरूरत
BY: शिवप्रसाद अग्रहरि
जौनपुर : भारत जैसे लोकतंत्र में आज मीडिया की स्वतंत्रता और कार्यप्रणाली पर देश में मानवाधिकारों,कानून व सुरक्षा की बात करने वाले जिम्मेदार राजनेतागण ही सत्ता के मद में चूर हो कर नियम व कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए देखे जा रहे हैं, जो भारत जैसे लोकतंत्र के लिए खतरा है। दुर्भाग्य की बात तो यह है कि आज हिंदुस्तान की आवाम जो अपेक्षाएं देश की सरकारों से रखती है उसमें तो वह खरा उतरने की बात तो दूर लेकिन जनहितों की उपेक्षा खूब करती है। ऊपर से देश व समाज को आइना दिखाने का कार्य करने वाली मीडिया जगत को भी कही कही सच्चाई को उजागर करने के लिए इन भ्रष्ट नेताओं के झूठे आरोपों से दो चार होना पड़ता है।
कही कही यही राजनेता अपने सत्ता पद व प्रशासनिक व्यवस्था का दुरुपयोग कर बेवजह मीडिया पत्रकारों को बेइज्जत करने का कार्य भी करते हैं। उक्त बातें उत्तरप्रदेश किसान एवं खेत मजदूर कांग्रेस कमेटी के पूर्व वाराणसी मंडल महासचिव व युवासमाजसेवी शिवप्रसाद अग्रहरि ने सिकरारा में प्रेस से एक अनौपचारिक बातचीत के दौरान कही। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में सरकार व मुंबई पुलिस जिस तरीके से रिपब्लिक भारत टीवी चैनल के एडिटर इन चीफ को आज सुबह अरेस्ट किया वह बहुत ही शर्मनाक है। इस घटना की जितनी भी निंदा किया जाय कम है। देश में सभी को अभिव्यक्ति की आजादी है और कोई भी सरकार किसी की आवाज को दबा नही सकता।
आज पिछले कई महीनों से महाराष्ट्र में जो कुछ चल रहा है वह अत्यंत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। श्री अग्रहरि ने कहा कि अगर कोई भी व्यक्ति चाहे वह आम नागरिक हो,राजनेता हो,अभिनेता हो,मीडिया पत्रकार हो अगर किसी ने भी कानून का किसी तरह से उल्लंघन किया है तो उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत दंड मिलना चाहिए। लेकिन आज महाराष्ट्र सरकार व यहां की पुलिस प्रशासन ने कानून की परिभाषा ही बदलकर रख दिया है। आखिर अर्णब गोस्वामी ने कौन सा इतना बड़ा अपराध किया था जो अलसुबह ही भारी पुलिस फ़ोर्स उनके घर पहुंचकर परिजनों की मौजूदगी में दुर्व्यवहार व मारपीट की घटना करते हुए उन्हें गिरफ्तार किया गया।
यह घटना वास्तव में एक क्रूर व भ्रष्ट शासक की मानसिकता को दर्शाती है, जो शायद आज तक इतिहास में पहले कभी किसी सरकार ने इस तरह से किसी भी मीडिया एजेंसी को टारगेट नही किया होगा। कहने को तो हमारे देश के राजनेता गण ऊंचे ऊंचे मंचो पर जनाधिकारों व मानवाधिकारों के रक्षा सुरक्षा करने की बात कहते नही थकते है,लेकिन आज महाराष्ट्र की घटना पर जब एक पत्रकार को किसी सत्ता पक्ष द्वारा फर्जी तरीके से परेशान व प्रताड़ित किया जा रहा है तो राजनीतिक पंडित खामोश हो जाते है।
देश मे किसी भी घटनाओं पर पीड़ितों के यहां घड़ियाली आंसू बहाने वाले लोगों को भी शायद आज एक पत्रकार की पीड़ा नही दिखती, जिसे आज पिछले कई महीनों से महाराष्ट्र सरकार व मुम्बई पुलिस द्वारा बेवजह परेशान किया जा रहा है। महाराष्ट्र में शिवसेना,एनसीपी,कांग्रेस गठबंधन की सरकार ने आज विकास व जनहित के मुद्दे को ताख पर रखते हुए एक मीडिया न्यूज़ चैनल को टारगेट करके कानून और संविधान का मजाक उड़ाया है।
दुर्भाग्य तो इस बात का है राज्य के राज्यपाल व केंद्र सरकार तक महाराष्ट्र के इस अघाड़ी सरकार की मनमानी पर खामोश है।
Reporter - Khabre Aaj Bhi
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