"ऐ मौत तूने मुझको ज़मीदार कर दिया" : राहत इन्दौरी

By: Khabre Aaj Bhi
Aug 13, 2020
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शायर राहत इन्दौरी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए साहित्यकार, पत्रकार एवं समाजसेवी


By:वेद प्रकाश श्रीवास्तव

दिलदारनगर : मीडिया सेंटर पर स्थानीय साहित्यकारों, शायरों, पत्रकारों, बुद्धिजीवियों की बैठक वरिष्ठ साहित्यकार जनार्दन 'ज्वाला' की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में राष्ट्र के कालखंड के मशहूर शायर मरहूम राहत इंदौरी की रूह को जन्नत के लिए दो मिनट मौन रहकर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। राहत इंदौरी के समसामयिक शेरों, गजलों की चर्चा करते हुए श्री ज्वाला ने राहत के चंद शेरों की चर्चा की !

 *"दो गज सही मगर यह मेरी मिल्कियत तो है, ऐ मौत तूने मुझको ज़मीदार कर दिया"*

और एक शेर-"लोग पीपल के दरख़्तों को खुदा कहने लगे, मैं जरा धूप से बचने को इधर आया था" राहत साहब ने अपनी जमीर से कभी समझौता नहीं किया।

वहीं वरिष्ठ पत्रकार वेद प्रकाश 'वेद' ने कहा कि उनके हम राष्ट्रीय जज्बे को सलाम करते हैं। उनके शेर यादगार है

 *"मैं जब मर जाऊं तो मेरी अलग पहचान लिख देना, लहू से मेरी पेशानी पर हिंदुस्तान लिख देना"*

वहीं समाजसेवी अल् दीनदार शम्सी म्यूज़ियम एंड लाइब्रेरी के निदेशक कुँअर मुहम्मद नसीम रज़ा ख़ाँ बताया कि उनके यह शेर भी काफी मशहूर हुआ था कि

"सभी का खून है शामिल यहां की मिट्टी में, किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है"

इस शेर से प्रमाणित होता है कि आप बेलौस एवं बेलाग शायरी अपने ख्यालों में रखते थे इसलिए उनकी एक अलग पहचान थी। श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में जनार्दन ज्वाला, वेद प्रकाश वेद, कमाल अहमद खान, कुँअर मोहम्मद नसीम रजा खान, कौसर हुसैन, अभिषेक कुमार श्रीवास्तव, ऐनुद्दीन अहमद, रोहित पटवा आदि मौजूद थे।


Khabre Aaj Bhi

Reporter - Khabre Aaj Bhi

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