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By:संदीप शर्मा
गाजीपुर रेवतीपुर: बढते पर्यावरण प्रदूषण एवं उसके चलते होने वाले विभिन्न खतरों से निपटने के लिए रेवतीपुर गाँव में पर्यावरण संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया । जिसका शुभारंभ ब्लाक प्रमुख मुकेश राय ने पौधों का विधिवत् पूजन अर्चन कर किया । इस दौरान उन्होंने किसानों से इसके प्रति संकल्पित होने पर जोर दिया ताकि बढते पर्यावरण प्रदूषण पर लगाम लगाई जा सके ।आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान ब्लाक प्रमुख ने 20 विभिन्न प्रजाति के पौधों को गोंद भी लिया ।साथ ही 29 किसानों को विभिन्न प्रभारियों के कुल 500 पौधों अपने निजी खर्चे पर के विभिन्न प्रजाती नीम, चितवन,आम अधपका, एवं शरीफा के पौधों का वितरण भी किया साथ में उन्हें सुरक्षित रखने के लिए कीटनाशक दवाओं का भी वितरण किया, कहा कि प्रकृति हमारी मां है मां से छेडछाड करना अपने अस्तित्व को समाप्त करना है,साथ ही उन्होंने किसानो को जीवन में पेड़ पौधों की उपयोगिता के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में वायुमंडल में बढ़ रहे प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह जंगलों का खत्म होना है। ऐसे में अधिक से अधिक से पौधे लगाकर प्रदूषण को खत्म किया जा सकता है।कहा कि पर्यावरण शब्द पर्यावरण के संयोग से बना है। 'परि' का आशय चारों ओर तथा 'आवरण' का आशय परिवेश है। दूसरे शब्दों में कहें तो पर्यावरण अर्थात वनस्पतियों ,प्राणियों,और मानव जाति सहित सभी सजीवों और उनके साथ संबंधित भौतिक परिसर को पर्यावरण कहतें हैं वास्तव में पर्यावरण में वायु ,जल ,भूमि ,पेड़-पौधे , जीव-जन्तु ,मानव और उसकी विविध गतिविधियों के परिणाम आदि सभी का समावेश होता हैं। आज के भौतिकवाद के दौर में प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है। जो हम लोगों के लिए खतरे की घंटी है, कहा कि प्रकृति मूक, सहनशील व गंभीर है लेकिन हद से अधिक छेड़छाड़ वह पसंद नहीं करती। उसके धैर्य व सहनशीलता को उसकी कमजोरी समझने की भूल हम बरसों से कर रहे हैं लेकिन याद रखें कि वह लाचार नहीं, वह अपना प्राकृतिक न्याय अवश्य करती है। उसकी न्याय प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। कहीं भयंकर बाढ़ तो कहीं सूखा, कभी ज्वालामुखी तो कभी भूकंप। इन्हें प्रकृति की चेतावनी समझ हमें क्षमायाचना प्रारंभ करनी चाहिए, उसे हरियाली ओढ़नी का उपहार देकर प्रकृति बिनाशलीला से बच सकते है ।
प्रकृति मां के अति दोहन व शोषण की पीड़ा को भी अच्छे से समझ सकती है। इसलिए वह हर रूप में हर व्यक्ति को पर्यावरण व प्रकृति संरक्षण के संस्कार बड़ी आसानी से दे सकती है।कहा कि आज आवश्यकता है कि जन-जन में पर्यावरण के प्रति संवेदना जागृत हो, प्रकृति से सहज जुड़ाव बढ़े, तभी पर्यावरण को दूषित करने वालों के प्रति आक्रोश होगा व हम स्वप्रेरणा से स्वयं के हित में प्रयास करेंगे। यह संस्कार नारी ही दे सकती है। प्रकृति के कोप से बचने के लिए, भावी पीढ़ी को विरासत में स्वस्थ पर्यावरण देने व प्रकृति को पुनः समृद्ध बनाने कुछ प्रयास प्राथमिकता समझ होने चाहिए।इस अवसर पर जयशंकर राय, घनश्याम राय, रामरतन, रामनवमी राय,महेन्द्र उपाध्याय, शंकरदयाल, छोटे मिश्रा , दिनेश, राजू शुक्ला, राजकुमार राम, गोविन्द राय आदि मौजूद रहे ।
Reporter - Khabre Aaj Bhi
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