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सेवराई /गाजीपुर : सेवराई निर्जला कठिन व्रत रखते हुए सुहागिन महिलाओं ने मनाया हरितालिका तीज: भगवान भोले शंकर की पूजा अर्चना कर पति के लम्बी उम्र की मांगी दुआएं।
पौराणिक कथाओं के अनुसार हरतालिका तीज का व्रत सर्व प्रथम मां पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए किया था। इस दिन सुहागन महिलाएं हरतालिका तीज पर अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं। यह व्रत भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है। हरितालिका तीज को हरतालिका भी कहते हैं। हरतालिका का संबंध भगवान शिव से होता है। महिलाएं इस दिन सोलहो श्रृगांर कर निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव व पार्वती की पूजा करती है। इस व्रत को रखने से वैवाहिक जीवन की मुश्किलें भी दूर होती हैं।
सेवराई तहसील के स्थानीय गांव सहित विभिन्न स्थानों पर सुहागिन महिलाओं के द्वारा दिन की शुरुआत से ही निर्जला (बिना अन्न जल का) व्रत रखते हुए अपने पति की लंबी आयु एवं सुख समृद्धि की कामना करते हुए भगवान भोले शंकर व माता पार्वती की पूजा अर्चना की गई। भर्ती महिलाओं के द्वारा 16 श्रृंगार करते हुए अच्छे से सज धज कर देवों के देव महादेव की पूजा अर्चना की गई। इस दौरान पंडित कृष्णानंद पांडे ने व्रती महिलाओं को कथा श्रवण कराया। पूजा उपरांत व्रती महिलाएं दूसरे दिन अन्न जल ग्रहण करती हैं।
पंडित कृष्णानंद पांडेय ने बताया कि हरतालिका व्रत कथा शिवजी ने ही मां पार्वती को सुनाई थी। शिव भगवान ने इस कथा में मां पार्वती को उनका पिछला जन्म याद दिलाया था। इस व्रत से जुड़ी एक मान्यता यह है कि इस व्रत को करने वाली स्त्रियां पार्वती जी के समान ही सुखपूर्वक पतिरमण करके शिवलोक को जाती हैं।सौभाग्यवती स्त्रियां अपने सुहाग को अखंड बनाए रखने और अविवाहित युवतियां मन मुताबिक वर पाने के लिए हरितालिका तीज का व्रत करती हैं। इस दिन व्रत करने वाली स्त्रियां सूर्योदय से पूर्व ही उठ जाती हैं और नहाकर पूरा श्रृंगार करती हैं।
पूजन के लिए केले के पत्तों से मंडप बनाकर गौरी-शंकर की प्रतिमा स्थापित की जाती है। इसके साथ पार्वती जी को सुहाग का सारा सामान चढ़ाया जाता है। रात में भजन, कीर्तन करते हुए जागरण कर तीन बार आरती की जाती है और शिव पार्वती विवाह की कथा सुनी जाती है।
Reporter - Khabre Aaj Bhi
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