
नवी मुंबई : नवी मुंबई में सार्वजनिक सुविधाओं के लिए आरक्षित भूखंडों के उपयोग में किए जा रहे परिवर्तनों को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। सीबीडी बेलापुर सेक्टर-15 स्थित भूखंड क्रमांक 15 और 16 से जुड़ा मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, ये भूखंड मूल विकास योजना में पंचतारा (फाइव स्टार) होटल के लिए आरक्षित थे, लेकिन यहां आवासीय परियोजना को मंजूरी दिए जाने का आरोप पूर्व नगरसेवक विशाल डोलस ने लगाया है।
इस मामले में सूचना के अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत प्राप्त विभिन्न दस्तावेज पत्रकार परिषद में प्रस्तुत किए गए। दस्तावेजों के अनुसार, सीबीडी बेलापुर सेक्टर-15 के प्लॉट नंबर 15 और 16 मूल रूप से फाइव स्टार होटल के लिए आरक्षित थे। न्यायालय के आदेश के बाद किए गए संशोधित समझौते (Modified Agreement) में भी मूल उद्देश्य को बरकरार रखा गया था। हालांकि, बाद में भूमि उपयोग परिवर्तन (Change of Use) की प्रक्रिया शुरू किए जाने के संकेत दस्तावेजों से मिलते हैं। इस पूरी निर्णय प्रक्रिया को लेकर पारदर्शी स्पष्टीकरण की मांग की गई है।

विशाल डोलस का कहना है कि पंचतारा होटल के लिए आरक्षित भूखंड का उपयोग बदलना नवी मुंबई के स्थानीय युवाओं के रोजगार पर सीधा प्रभाव डालने वाला निर्णय है। यदि यहां होटल परियोजना विकसित की जाती, तो प्रबंधन, रिसेप्शन, हाउसकीपिंग, सुरक्षा, कैटरिंग, शेफ सेवाएं, वाहन चालक, इवेंट मैनेजमेंट, ट्रैवल सेवाएं तथा अन्य सहायक क्षेत्रों में बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होते। साथ ही कॉर्पोरेट बैठकों, सम्मेलनों, पर्यटन, व्यावसायिक आयोजनों और स्थानीय सेवा व्यवसायों को भी बढ़ावा मिलता।
इसके विपरीत, आवासीय परियोजना से केवल निर्माण अवधि तक सीमित रोजगार उपलब्ध होगा, जबकि परियोजना पूरी होने के बाद स्थायी रोजगार के अवसर बहुत सीमित रह जाएंगे। इसके अलावा होटल परियोजना से महानगरपालिका को संपत्ति कर, व्यवसाय लाइसेंस, विज्ञापन शुल्क, इवेंट अनुमति शुल्क, जल उपयोग शुल्क और अन्य राजस्व स्रोतों से आय प्राप्त हो सकती थी। वहीं आवासीय परियोजना के कारण जनसंख्या बढ़ने से जलापूर्ति, सीवरेज, यातायात, पार्किंग, स्वास्थ्य सेवाओं और कचरा प्रबंधन पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका व्यक्त की गई है।
पत्रकार परिषद में सेक्टर-46ए स्थित प्लॉट नंबर 5 और 5ए का मुद्दा भी उठाया गया, जो मूल रूप से फाइव स्टार होटल के लिए आरक्षित था, लेकिन वहां भी आवासीय परियोजना विकसित किए जाने का आरोप लगाया गया। ऐसे मामलों के कारण सार्वजनिक सुविधा भूखंडों के मूल उद्देश्य में बदलाव की प्रक्रिया को लेकर नागरिकों के मन में गंभीर प्रश्न उत्पन्न हो रहे हैं।
पत्रकार परिषद में स्पष्ट किया गया कि, “हमारा विरोध किसी भी विकास परियोजना से नहीं है, बल्कि नवी मुंबई की मूल विकास योजना के संरक्षण, सार्वजनिक सुविधा भूखंडों की सुरक्षा और निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का है।”
इस पृष्ठभूमि में संबंधित मामलों की गहन जांच कराने, पूरी निर्णय प्रक्रिया सार्वजनिक करने, भूमि उपयोग परिवर्तन (Change of Use) संबंधी स्पष्ट नीति घोषित करने तथा नवी मुंबई की मूल विकास योजना की रक्षा करने की मांग की गई है।
पूर्व नगरसेवक विशाल डोलस ने चेतावनी देते हुए कहा, “हमारे शहर के युवाओं के रोजगार पर चोट पहुंचाने वाली प्रशासनिक और राजनीतिक प्रवृत्तियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आवश्यकता पड़ी तो हम सड़क पर उतरेंगे, न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे, लेकिन इस स्थान पर मूल विकास योजना के अनुसार पंचतारा होटल ही बनाया जाना चाहिए। इसके लिए जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा।”
उन्होंने यह भी मांग की कि आरक्षण परिवर्तन करते समय रोजगार, राजस्व, आर्थिक विकास और आधारभूत सुविधाओं पर पड़ने वाले प्रभाव का गहन अध्ययन किया गया था या नहीं, तथा नगर नियोजन विभाग द्वारा ‘अनापत्ति प्रमाणपत्र’ (NOC) देने के पीछे क्या कारण थे—इस संबंध में सिडको और नवी मुंबई महानगरपालिका को पारदर्शी स्पष्टीकरण देना चाहिए।
अंत में विशाल डोलस ने कहा, “आज सवाल केवल एक भूखंड का नहीं है, बल्कि नवी मुंबई की नियोजन व्यवस्था और आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों का है।”

