
निखिल मांडवे का नवी मुंबई मनपा प्रशासन से सीधा सवाल; आयुक्त को सौंपा ज्ञापन
नवी मुंबई : नवी मुंबई महानगरपालिका ने यदि अपने शहरी आरोग्यवर्धिनी केंद्र के निर्माण के लिए सिडको से जमीन का आधिकारिक हस्तांतरण होने से पहले ही उस पर कब्जा कर लिया है, तो इसी आधार पर शहर के दिव्यांग नागरिकों को रोजगार और आजीविका के लिए सिडको के प्रमुख भूखंडों पर स्टॉल लगाने की अनुमति तत्काल क्यों नहीं दी जाती? यह सवाल सामाजिक कार्यकर्ता निखिल रतन मांडवे ने नवी मुंबई महानगरपालिका प्रशासन के समक्ष उठाया है। इस संबंध में उन्होंने मनपा आयुक्त डॉ. कैलास शिंदे को लिखित ज्ञापन सौंपा है।

दिव्यांगों के रोजगार का सवाल
शहर में पिछले कई वर्षों से दिव्यांग नागरिकों के रोजगार और आजीविका का मुद्दा गंभीर बना हुआ है। अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए स्थायी रूप से स्टॉल लगाने हेतु जगह पाने के लिए कई दिव्यांग नागरिक महानगरपालिका के चक्कर लगा रहे हैं। हालांकि, सिडको से भूखंड उपलब्ध नहीं होने का कारण बताकर प्रशासन की ओर से अब तक उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिल पाई है।
आरोग्यवर्धिनी केंद्र के निर्माण का दिया उदाहरण
निखिल मांडवे ने प्रशासन की इस भूमिका पर सवाल उठाते हुए अपने ज्ञापन में कहा कि नेरुल क्षेत्र के सारसोले गांव स्थित प्लॉट क्रमांक 281 को सिडको द्वारा महानगरपालिका के नाम आधिकारिक रूप से हस्तांतरित किए जाने से पहले ही वहां शहरी आरोग्यवर्धिनी केंद्र का निर्माण किया गया है।
मांडवे का सवाल है कि यदि महानगरपालिका अपने प्रकल्प के लिए सिडको की जमीन पर हस्तांतरण से पहले काम शुरू कर सकती है, तो दिव्यांग नागरिकों की आजीविका से जुड़े गंभीर मुद्दे पर इसी प्रकार त्वरित निर्णय क्यों नहीं लिया जा सकता?
दिव्यांगों को स्टॉल के लिए जगह देने की मांग
निखिल मांडवे ने मांग की है कि जिस प्रकार आरोग्यवर्धिनी केंद्र के लिए सिडको की जमीन का उपयोग किया गया, उसी प्रकार दिव्यांग नागरिकों के पुनर्वास और रोजगार को प्राथमिकता देते हुए सिडको के प्रमुख स्थानों पर स्टॉल लगाने के लिए जगह उपलब्ध कराई जाए।
अब इस ज्ञापन के बाद नवी मुंबई महानगरपालिका प्रशासन दिव्यांग नागरिकों के रोजगार के मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है और उन्हें राहत देने के लिए क्या कदम उठाता है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

