कोरोना का कहर : सुस्त पड़ी बाजार की चाल, व्यापारी परेशान,मजदूरों व कामगारों की भी हालत दयनीय

By: Khabre Aaj Bhi
Sep 24, 2020
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लॉक डाउन में परदेश से गांवों को लौटे लोगों की भी हालत खराब,पुनः काम की तलाश में महानगरों को जा रहे वापस


by :शिवप्रसाद अग्रहरि

जौनपुर : एक तरफ जहां पूरा देश कोरोना महामारी का संकट झेल रहा है, तो वही दूसरी तरफ इस कोरोना के चलते बाजारों की रफ्तार भी इस समय धीमी पड़ गई है। बता दें कि कोरोना संक्रमण के शुरुआत में प्रथम लॉक डाउन के दौरान जो जहा पर था,वहां से किसी तरह अपने घर को वापस लौट आया।क्योकि लॉक डाउन के दौरान जरूरत मंद चीजों को छोड़कर बाकी सब काम-काज सरकार द्वारा बंद करा दिए गए। इसके बाद उन लोगों की समस्या और भी बढ़ गई जो लोग परदेश से कमा कर अपने घर परिवार को खरचा-बरचा भेजते थे, वह आमदनी भी कोरोना काल में भेंट चढ़ गया। बता दें कि विगत 22 मार्च को प्रधानमंत्री मोदी जी के आह्वान पर देशव्यापी बंदी के दिन पूरा भारत बंद रहा। इसके बाद 24 मार्च से देशभर में लॉक डाउन लग गया।हालांकि लोगों जरूरतमंद चीजों किराना,सब्जी,फल व दवा को छोड़कर बाकी सब बंद कर दिए गए। कोरोना के संक्रमण को देखते हुए सरकार ने बीच-बीच में लॉक डाउन जारी रखा।इस समय लगभग सभी जगहों पर पाबंदी हटा दी गई है। सरकार ने जरूरी दिशा निर्देश के तहत लोगों को आने जाने के लिए छूट दिया है। इसके अलावा सभी छोटे-मोटे धंधा व्यवसाय करने वाले लोगों को भी छूट दी है। कुल मिलाकर पाबंदी हटा ली गई है।अभी भी लोगों को भीड़ भाड़ वाले इलाके में जाने से बचने को कहा जा रहा है।बाजारों व कही अन्यत्र आने जाने पर मास्क लगाने को कहा गया है। क्योंकि अभी खतरा भी टला नही है।इसलिए कोरोना के प्रति अभी सावधान रहने तथा साफ सफाई रखने की जरूरत है।

एक तरफ जहां लोगों को कोरोना का डर सता रहा है तो वही दूसरी तरफ रोजी-रोजगार की चिंता भी है। क्योंकि लॉक डाउन के दौरान जिस हालात में लोग अपने- अपने घरों को वापस आये थे। अब उनके सामने भी विकट समस्या खड़ी हो गई है कि अगर वह काम नहीं करेंगे तो घर-परिवार कैसे चलाएंगे। बता दें कि उत्तरप्रदेश के विभिन्न जिलों से अधिकांश लोग रोजी रोटी की तलाश बहुत पहले से ही गुजरात,मुम्बई,राजस्थान,दिल्ली आदि पहुंचकर अपना जीविकोपार्जन कर रहे थे। लेकिन कोरोना के कोहराम ने उनकी आमदनी पर विराम लगा दिया।साथ ही उन्हें बदतर हालात से गुजरने के लिए बाध्य भी कर दिया था। इस कोहराम में ठेला, खुमचा लगाने वाले, मेहनतकश मजदूर,मध्यम वर्गीय परिवार को ज्यादा दिक्कतें उठानी पड़ी।आज भी परेशानी साथ छोड़ने का नाम नही ले रही,लेकिन पहले से स्थिति फिर भी बेहतर है।

ट्रेन टिकट की किल्लत, ज्यादा पैसा देकर निजी साधनों से जाने को मजबूर हो रहे लोग, सरकार बेखबर


परदेश से अपने घरों को लौटे लोग अब पुनः जाने की तैयारी में है लेकिन मुसीबत है कि उन्हें ट्रेनों का टिकट नही मिल पा रहा है।अगर मिलता भी है तो २हज़ार पाँच सौ - चार हज़ार के बीच किराया, वह भी ब्लैक में आईटीआरसी के तहत कंप्यूटर सेंटरों,साइबर कैफे द्वारा मांगा जा रहा है,जिसे सुनकर वो खुद हैरान हो जाते है। इस विषय में परदेश जाने वाले कुछ लोगो ने बताया कि लॉक डाउन में वैसे भी किसी तरह करके हम लोगों ने गुजारा किया।अब जाने के लिए भाड़े की भी किल्लत है ऊपर से हम लोग इतना पैसा कहा से लाये।जबकि कितने लोग महानगरों से अपनी निजी साधन ऑटो रिक्शा, कार, ओला कैब, टैक्सी आदि से आये थे। वह लोग भी अब धीरे धीरे लौट रहे हैं। यहां तक कि लोग लग्जरी बसों से भी निकल रहे है।बता दें कि लॉक डाउन के दौरान कामगार मजदूरों की स्थिति बहुत ही दयनीय रही। जिस पर स्थानीय सरकारों व प्रशासन ने पूर्ण रूप से ध्यान नहीं दिया। दुर्भाग्य तो इस बात का है कहने को तो हम सभी भारतवासी है। हिंदुस्तान के किसी भी कोने में जाकर रह सकते है व धन्धा व्यवसाय कर सकते हैं।


लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि भारतीय प्रवासियों पर किसी भी आपत्ति विपत्ति के आने पर उस स्थिति से निपटने के बजाय सियासत शुरू हो जाती है। जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। जबकि परदेश में रोजी रोटी की गरज से गये लोगों को भी अपने ही देश में कही-कही बेगाने की दृष्टि से देखा गया,जो अनुचित है। बता दें कि यूपी,बिहार,झारखंड,मध्यप्रदेश आदि राज्यों से काफी संख्या में लोग काम धंधों के तलाश में मुम्बई,गुजरात,राजस्थान,दिल्ली आदि महानगरों में जाकर कोई नौकरी कर रहा है,कोई अपना छोटा-मोटा व्यवसाय कर रहा है तो कोई दिहाड़ी मजदूरी कर अपना जीविका चला रहा है। ऐसे में जब एकाएक लोगों का धंधा कारोबार,नौकरी बंद हो जाएगी तो सामने समस्या आना स्वाभाविक है।  इधर गांव आये लोगों का कहना है कि लॉक डाउन में इतने दिनों बैठे रहे पैसा भी खत्म हो गया।अब धीरे धीरे काम चालू हो रहा है।कुछ करेंगे नही तो गुजारा कैसे चलेगा।

बात करें बाजारों की तो अभी भी बाजारों की हालत दयनीय है।छोटे-मोटे धंधा व्यवसायी से लेकर बड़े व्यापारी तक सभी परेशान है।जिसका प्रमुख कारण है कि बाजारों में अभी भी काफी सुस्ती है।जिसके चलते लोगों का धंधा व्यवसाय भी प्रभावित हो रहा है।


Khabre Aaj Bhi

Reporter - Khabre Aaj Bhi

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