महाराष्ट्र मुंबई के विनोद शिवडीकर एक सच्चा रक्षक की संघर्ष पथ.

By: Khabre Aaj Bhi
Nov 08, 2019
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जीवन का  ५० सालों में से ३२ साल सेवा किया पुलिस विभाग मे 

by: विनोद कांबले

मुंबई : समाज आज जो सुरक्षित है। हमें दिन रात सेवा दे रही पुलीसमहेकमा है। पुलिस मे भर्ती हो,ऐसा हर छोटे बच्चों के सामने उनके आदर्श का कारण एक सपना बन जाता है।कई बच्चे यह सपना पूरा करने के लिये अखंड संघर्ष करते रहते है।एसा ही संघर्ष भूमी पूत्र मुंबईके कोली समाज मैं पैदा हुआ सहाय्यक पुलीस निरीक्षक विनोद शिवडीकर है । इन्होंने विगत ५० सालों में से ३२ साल यह समाज -सेवा के  पुलिस विभाग मे लिये दिया है।पिछले कई सालों से समाज में से कई कडक अनुभव आज उनके समीप है। मुंबई पुलिस महकमे में सिपाही के तौर पर १९८७ साल में सेवा मे दाखिल हुये। उसके बाद पुलीस नाईक,पुलीस हवालदार,जमादार,पुलीस उपनिरीक्षक, सहाय्यक पुलीस निरीक्षक ऍसे महत्तम पद पर वह कार्यरत हुये। उनके इस सेवा के समय में उनको परीवार कि ओर ध्यान हटाना पडा। इसकी नाराजी भी वह बयान करते है। पुलिस सेवा मे कार्य करते हुये उनकी शिक्षा कि लगन कम  नहीं होने दिया। उन्होंने मुंबई के किर्ती महाविद्यालय से कला शाखा से मराठी ग्रामीण विकास विषय मे १९८९ में स्नातक तक शिक्षा पूरी कीया।                        .


 विनोद शिवडीकर इन्होंने १२ वी तक कि शिक्षा पूरी करके सेवा नियोजन कार्यालय में नाम दर्ज किया।वहाँ से उनकी हवालदार पद पर नियुक्ति हुई। और उन्हे अकोला  प्रशिक्षण के लिये भेजे दिया गया। तब उनकाउत्साह आकाश में समा नही रहाथा। क्यों की बचपन से उनके पुलीस विभाग में दाखिल हुोने का सपना पूरा हो गया ।               उन्होने  यह जानकारी अपनी माँ को दिया और उसके आँखों से आसू निकलने रहे थे और वे बात करते रहे। क्योकि वह सात साल के रहते हुये उनके पिताजी कि छाया सर से  हटा चुका था।।पिताजी रेल विभाग में नौकरी करते थे।  माँ बडे हिम्मत से मछली बिक्री करके उनके सभी छोटा भाई,बहन  लेकिन एसे हालात में उनकी माँ ने हालात पर पराजय नहीं मानी बच्चो का पालन पोषण करती रही।  एसे में उन्होने जिने का संघर्ष शुरू किया था।एसे हालात में भी इन्होने उनकि १२ वी तक शिक्षा बडे आपदाओं का मुकाबला करके पूरा किया। उस समय उन्होंने तिर्ति महाविद्यालय में पढाई करते समय उन्हें शरीरसॊष्ठव प्रतियोगिता नें किर्तीश्री यह पहला खिताब मिला था।

उसके बाद १९९० में मुंबई के पुलिस दल के शस्त्र विभाग में हवालदार,साल १९९० में कुलाबा पुलिस थाने मे दाखिल होने के बाद आजाद मैदान पुलिस थाने मे बदली हुई।१९९८ के सप्टेंबर महीने मे पुलीस उपनिरीक्षक लोकसेवा आयोग कि परीक्षा के लिये पुणे गये।उस समय उन्हें ३अंक से विफलता मिली। आझाद मैदान पुलीस थाने में अपराध शाखा मैं साल २००० तक पुलीस नाईक पदपर कार्यरत थे। साल २००२ से२००५ तक अंमली पदार्थ विरोधी कक्ष मैं हवालदार एवम् जमादार पद कि जिम्मेदारी संभाली। साल २००८ में वह रिश्वत प्रतिबंघक शाखा में कार्यरत थे।उस समय ल.विभाग़ २ ताडदेव यहा रात मे सुरक्षा रक्षक जाँच का कार्य रात को ११ से ०५ बजे सुबह तक किये।इसके बाद ६ बजे सुबह प्रियदर्शनी पार्क ,मलबार हिल,आदिं समेत मुंबई को लगभग सभी मैदानों में सराव करके २००९ मे उनकि पुलिस उपनिरीक्षक पद के लिये चुनाव हुआ। लेकिन लोक सेवा आयोग ने लिये हुये फैसले के खिलाफ कुछ विद्यार्थी मॅटके खिलाफ मुंबई  उच्चत्तम अदालत में जाकर उनका मामला दायर किया था।

उस वजह से परीक्षा सफल होकर भी उनकी वास्तव में नियुक्ति १ साल देरी से हुई।उनका प्रशिक्षण नाशिक पुलिस ऐडकामी में हुआ। २०१०-२०११ में उनकी ४९ वे साल नें प्रशिक्षम लिये हुये एसी अनोखी नींद होने कि जानकारी शिवडीकर देते है। उस समय विद्यमान पुलीस आयुक्त संजय बर्वे यह नाशिक पुलीस  ऐडकामी प्रमुख थे।            उस समय उन्होने शिवडीकर की पीठ थप-थापाई और उनको प्रोत्साहित किये थे।उसके बाद  उनकी रायगड पुलीस उपनिरीक्षक, मसला पुलिस थाने यहा पुलिस उपनिरीक्षककार्य किया ,साल २०१३ से २०१७ तक दहशतगर्द विरोघी पथक काला चौकी मुंबई ,साल २०१७ सहायक पुलीस. निरीक्षक पद पर ,साल २०१७ में अंमली पदार्थ विरोधी  पथक वरली, घाटकोपर यहां डेढ़ साल कार्य किये।


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Reporter - Khabre Aaj Bhi

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