गाजीपुर ने भारत का एक नया इतिहास बनाया एक वंशज और धर्म अलग होते हुए भी दो जिस्म एक जान

By: Khabre Aaj Bhi
Aug 27, 2021
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धर्म के नाम पर बना पाकिस्तान ,जबान के नाम पर बना बड़ा संदेश: इंद्रेश कुमार


By :खान अहमद जावेद ,इजहार खान

 गाजीपुर :  शहीदों की धरती जनपद गाजीपुर एक ऐसा जनपद है !जिसके अंदर आजादी की लड़ाई से लेकर, भारत पाकिस्तान युद्ध के समय वीर अब्दुल हमीद ने अपने आप को शहीद कर के यह सिद्ध कर दिया,, मादरे वतन से बड़ा कोई धर्म नहीं है !इसकी हिफाजत करना पहला धर्म है ।


गाजीपुर जनपद हिंदू मुस्लिम की साझा विरासत की हिफाजत के लिए प्रसिद्ध है और इसका उदाहरण अगर देखना है किसी जनपद गाजीपुर में आ जाए। साझा रास्ते(धर्म) बदलने के बावजूद भी नहीं बदले खून के रिश्ते।जी हां ये कोई फिल्मी कहानी नहीं बल्कि हकीकत है; कौमी भाईचारगी की यह मिशाल आज भी कायम रखा है।तत्कालीन नाम दीनदार नगर अब दिलदारनगर के औरंगजेब कालीन मुगलिया जागीरदार दीनदार खान व इनके पुश्तैनी गांव बिहार प्रांत के कैमूर जिला स्थित समहुता गांव के राजपूत वंशज की दसवीं पीढ़ी के संतानों ने।मौका था दिलदारनगर गांव के 333 वें स्थापना वर्ष का।जहां मुगलिया शासक औरंगजेब के शासन काल में बिहार प्रांत के ग्राम समहुता जिला कैमूर के राजपूत वंशावली के गर्भ से उपजे इस्लाम कबूल करने वाले ख्वाजा दानिश खान जब दिल्ली सल्तनत की ओर औरंगजेब के दत्तक पुत्र के रूप  में कूच किये तो जमानिया परगने की जिम्मेदारी इस्लाम कबूल करनेे के बाद जागीरदार के रूप में अपने भाई कुँअर नवल सिंह को सौंप दिए जो इस्लाम कबूल करने के बाद दीनदार खान के रूप में आज भी जाने और पहचाने जातेे हैं। जिनकी पीढ़ी आज भी अपने रस्मो रवायत को अपने जेहन में सहेजें हुए हैं। इसी क्रम में अल दीनदार शम्सी अकादमी के तत्वावधान में गुरुवार को पूर्वाह्न ११ बजे अल दीनदार शम्सी म्यूजियम एंड रिसर्च सेंटर के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित सेमिनार में विद्वानों ने "ऐतिहासिक दस्तावेज में हिंदु - मुस्लिम की सांझी संस्कृति एक पारिवारिक विरासत" पर अपने विचारों से अवगत करा कौमी एकता का बड़ा ही गंभीर संदेश दिया।


कार्यक्रम का आगाज जनाब हैदर के तिलावते कुरान पाक से हुआ तो वहीं मुख्य अतिथियों के स्वागत में नज्म की सुमधुर आवाज में प्रस्तुती देकर छात्रा द्वय महजबीन खातून, हुमैरा खातून ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया।इसी क्रम में शायर शमीम गाजीपुरी की बिंदास शेरो शायरी ने खूब वाह वाही लूटी मानो लहुरी काशी की इस सरजमी पर काशी की गंगा जमुनी तहजीब लौट आई हो। 


इस सेमिनार में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तथा मार्गदर्शक विशाल भारत संस्थान इन्द्रेश कुमार ने अपने संबोधन में कहे कि हिंदू और मुस्लिम अगर आपसी रिश्ते की डोर समझ जायें तो किसी भी प्रकार के विवाद का कोई मुद्दा नहीं रह जायेगा।विश्व के जितने भी धर्म और धर्मग्रंथ हैं सबने इंसानियत का पाठ पढ़ाया है।इस क्षेत्र में आज धर्म के अलग अलग होने के बावजूद भी मजबूत खून के रिश्ते की डोर देख बहुत ही सुखद आश्चर्य हो रहा है।इस ऐतिहासिक सेमिनार के मंच पर उपस्थित एक वंशज और धर्म अलग होते हुए भी दो जिस्म एक जान की तरह हैं।यह अपने आप मे बेमिसाल है। पूरी दुनिया ने देखा एक धर्म के नाम पर बना देश पाकिस्तान किस तरह भाषा के नाम पर एक दूसरे के प्यासे हो गए और हजारों की संख्या में एक धर्म के होने के बावजूद वाले होने जाने गई


इसी क्रम में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के इतिहासकार डॉ राजीव श्रीवास्तव ने कहा कि मुगलिया सल्तनत के जागीरदार दीनदार खान और औरंगजेब के रिश्ते पर बीएचयू के इतिहास विभाग में शोध कार्य चल रहा है।साथ ही इसे हिंदू मुस्लिम की सांझी विरासत के रूप में भविष्य में पाठ्यक्रम में शामिल करने की योजना है।इस आयोजन में इस वंशावली के 10 वीं पीढ़ी के वंशज बिहार प्रांत के कैमूर जिले के समहुता गांव से आये शिवशंकर सिंह, पूर्व पत्रकार पारस नाथ सिंह,महाराणा प्रताप कॉलेज मोहनियां के भौतिक विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ लक्ष्मण शरण सिंह आदि भी उपस्थित रहे।कार्यक्रम की अध्यक्षता मास्टर इम्तियाज अहमद खान तथा संचालन खान जियाउद्दीन मो कासीम ने किया।धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम संयोजक कुँअर मुहम्मद नसीम रज़ा ख़ाँ ने किया।

स्मारिका का हुआ विमोचन


इस कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य अतिथि इन्द्रेश कुमार द्वारा तथा मंचासीन अतिथियों द्वारा अल दीनदार शम्सी म्यूजियम एंड रिसर्च सेंटर तथा अकादमी के प्रबंधक/सचिव कुंवर नसीम रजा खान द्वारा लिखित स्मारिका "मुहम्मद दीनदार खान : एक मुगलिया जागीरदार तथा वंशावली का विमोचन किया गया।

बाग-ए-दीनदारिया में मुख्य अतिथि ने किया पौध रोपण