अजान पाबंदी के फैसला को गोदी मीडिया द्वारा तोड़ मोड़ कर पेश करने पर लोगों मैं नाराजगी

By: Muzammil Khan
May 18, 2020
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गाज़ीपुर : ( खान अहमद जावेद द्वारा) पूरे भारत में लॉक डाउन के बाद तमाम मस्जिदों से माइक के जरिए अजान होती रही। लोग घर में नमाज पढ़ते रहे। लेकिन एकाएक रमजान के 1 दिन पहले जनपद गाजीपुर ,फर्रुखाबाद और हाथरस के जिलाधिकारी द्वारा मौखिक आदेश देकर के पुलिस बल द्वारा अजान पर प्रतिबंध लगा दिया गया जो पूर्ण रूप से भारत के संविधान के मौलिक अधिकार का हनन था।

दिल्ली में मौजूद संसदीय क्षेत्र गाजीपुर के सांसद अफजाल अंसारी को जब इस बात का इल्म हुआ तो उन्होंने 26 अप्रैल 2020 को जिलाधिकारी और मुख्य न्यायाधीश प्रयागराज हाईकोर्ट को इस समस्या की तरफ अवगत कराते हुए संविधान ने प्राप्त मौलिक अधिकार के तरफ ध्यान दिलाते हुए पत्र भेजाl दूसरी तरफ इस संबंध में पूर्व केंद्रीय मंत्री सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने भी पत्र के माध्यम से मुख्य न्यायाधीश इलाहाबाद को मौलिक अधिकार अजान के संबंध में पत्र प्रस्तुत क्या मौलिक अधिकार हनन के संबंध में सैयद मोहम्मद फजल वरिष्ठ अधिवक्ता ने जनहित याचिका किया तो सांसद अफजाल अंसारी और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद के पत्र को जनहित याचिका नंबर 570 / 2020 मान लिया गया।

5 मई को बहस हो जाने के बाद आदेश सुरक्षित होकर जब 15 मई को 10 दिन के बाद 27 पन्ने का आदेश आया। और कोर्ट ने डीएम के मौखिक आदेश को निरस्त करते हुए आदेश दिया जहां माइक से अजान हो रही है वहां अजान होगी और जहां ध्वनि प्रदूषण एक्ट 2017 के तहत परमिशन नहीं लिया गया है वह परमिशन के लिए उप जिलाधिकारी के यहां दरखास्त प्रस्तुत कर सकते हैं। ध्वनि प्रदूषण एक्ट 2017 के अनुसार पूरे उत्तर प्रदेश में मस्जिद, मंदिर , गुरुद्वारा, मठ ,चर्च ,स्कूल, कॉलेज जहां माइक का प्रयोग होता है सभी ने मजिस्ट्रेट के यहां प्रार्थना पत्र देकर आदेश प्राप्त किया है। आदरणीय कोर्ट शशिकांत गुप्ता और आदरणीय अजीत कुमार की बेंच ने 10 दिन बाद 27 पन्नों की निर्णय के साथ जो मलिक अधिकार हनन हो रहा था से उसे बहाल किया। लेकिन इधर कुछ भारतीय मीडिया का खाना हजम नहीं होता है उनके हाथ समस्या नहीं सिर्फ हिंदू- मुसलमान पाकिस्तान- चीन किए हुए खाना हजम नहीं होता है।  कैसे देश विकास करेगा देश की समस्या क्या है इन मुद्दों पर कभी इन अखबारों और टीवी में बहस नहीं रहता है। भारत के सभी अपने आपको नंबर वन कहने वाले अखबार इस आदेश को तोड मरोड कर पेश किया। सभी का हेडिंग के साथ-साथ अंदर का फैक्ट काफी मिलती-जुलती थी लगता है किसी एक जगह से प्रेस रिलीज जारी करके दूसरा यीशु बनाने का प्रयास किया गया है। लेकिन सच पर कुछ दिनों के लिए पर्दा डाला जा सकता है एक ना एक दिन सच जाहिर होकर रहेगाl जनपद गाजीपुर , फर्रुखाबाद और हाथरस की मस्जिदों में अज़ान पर रोक के मामले में प्रयागराज हाईकोर्ट ने दिनांक 15 मई 2020 के अपने फैसले में इन जिलाधिकारी के आदेश को रद्द कर दिया है तभी तो एक दो जगह छोड़कर सभी जगह अजान हो रही है। हिंदी गोदी मीडिया एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा खबर को तोड़ मरोड़ कर पेश करने पर लोगों में काफी नाराजगी है। मैंने कुछ सच्चाई जानने के लिए अधिवक्ताओं से संपर्क किया जो इस प्रकार है।

मैंने 27 पन्ने के आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट के संतोष सिंह एडवोकेट से जब जानने का प्रयास किया उन्होंने साफ लफ्जो मे कहा आदेश में अजान पर पाबंदी बिल्कुल नहीं है जहां पर माइक से अजान होती थी वहां अजान होगी अफजाल अंसारी ने तो अपनी प्रार्थना पत्र में माइक का जिक्र तक नहीं क्या है।


 इस आदेश के प्रति मोहम्मदाबाद न्यायालय के प्रसिद्ध वरिष्ठ अधिवक्ता सोनू राय से जाने का जब प्रयास किया तो उन्होंने भी यही कहा माइक से जहां अजान होती थी वहां होती रहेगी। जहां परमिशन नहीं है, वह प्रार्थना पत्र देकर हासिल कर सकते हैं। 


मोहम्मदाबाद सिविल बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष सुभाष सिंह यादव से भारतीय मीडिया मे छपी खबर और आदेश की तरफ आकर्षित कराया उनका कहना था देश को आजाद कराने में अखबार का बहुत बड़ा रोल था अब देश को आर्थिक और मानसिक गुलाम बनाने मैं लगे हुए हैं समस्या का निदान कम छापते हैं हिंदू मुसलमान चीन पाकिस्तान अधिक करके मूल समस्याओं से दूर रखना चाहते हैं। साफ लफ्जो में कोर्ट का आदेश है जहां माइक से अजान होती थी वहां होगी जहां परमिशन नहीं है उन्हें परमिशन लेना पड़ेगा। वहीं हाईकोर्ट ने मस्जिदों को अज़ान की अनुमति भी दे दी है। इस दौरान अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि मस्जिदों में अज़ान से कोविड-19 की गाइडलाइन का उल्लंघन नहीं होता है। 

बीएसपी सांसद अफ़ज़ाल अंसारी ने इस मामले में याचिका दाखिल की थी। इस निर्णय पर उन्हें कहा है कि हमें हमेशा अपने संविधान और कोर्ट पर भरोसा रहता है मैं संविधान का पूर्ण रूप से पालन करता हूं मुझे बहुत सारे लोगों ने बहुत कुछ कहा लेकिन मैं ने हालात के तहत कोर्ट का सहारा लिया। मेरे क्षेत्र के लोगों को मात्र परेशान करने के लिए जिलाधिकारी द्वारा मौखिक आदेश देकर गंगा जमुनी तहजीब को कुछ लोगों द्वारा नफरत की आग में धकेलना चाहते हैं। क्षेत्र के लोगों के साथ साथ हमारे पूर्वजों ने भी आजादी के साथ-साथ भारत पाकिस्तान की युद्ध तक हमारे पूर्वजों ने जो कुर्बानियां दी हैं। सब की कुर्बानियों पर भारी है। हमारे नाना ब्रिगेडियर उस्मान अगर शहीद नहीं होते तो कश्मीर पाकिस्तान के हाथ में होता है। हमारे पूर्वज डॉक्टर मुख्तार अहमद अंसारी का एक नंबर दरियागंज दिल्ली का बंगला इंडियन नेशनल कांग्रेस पार्टी का हेडक्वार्टर हुआ करता था। हमारी दरखास्त में मात्र अजान पर प्रतिबंध हटाने के लिए प्रार्थना पत्र था। सरकारी वकील ने अपनी बहस के दौरान माइक का जिक्र करके आदेश में माइक का जिक्र हो गया है और इस समय भारत की गोदी मीडिया की हालत यह है दैनिक जागरण अखबार का उर्दू संस्करण इंकलाब निकलता है। हिंदी राष्ट्रीय सहारा अखबार का हिंदी और इसका उर्दू संस्करण उर्दू के प्रथम पेज पर उर्दू में सही खबर यही खबर हिंदी अखबार में उल्टी खबर छपी है। विडंबना यह है हम इसकी तरफ ध्यान नहीं दे रहे हैं ।यह हिंदी अखबार इस देश को कहां ले जा रहे हैं। हमें खामोशी से अखबारों के प्रति सोचना चाहिए।


Muzammil Khan

Reporter - Khabre Aaj Bhi

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