संघ प्रमुख मोहन भागवत का मुस्लिम प्रेम क्यों : पूर्व डीजीपी मोहम्मद वजीर अंसारी

By: Muzammil Khan
May 06, 2020
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गाज़ीपुर : (जावेद बिन अली द्वारा) राष्ट्रीय अध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री द्वारा मुसलमानों के संबंध में जो नरमी दिखाई दे रही है अब तो संघ प्रमुख मोहन भागवत द्वारा विगत दिनों दिल्ली के विज्ञान भवन में संबोधन करते हुए लोगों को आश्चर्य कर दिया। संघ प्रमुख ने पहली बार कहा हम कहें कि मुसलमान नहीं चाहिए तो हिंदुत्व भी नहीं बचेगा। भारत के तमाम दैनिक पत्रों का मुख्य हेड लाइन बना। इस बयान के आने के बाद मैंने पूर्व डीजीपी मोहम्मद वजीर अंसारी से संघ प्रमुख द्वारा मुस्लिम प्रेम जाहिर करने के संबंध में कुछ जानने का प्रयास किया।

मुसलमानों के बिना हिंदुत्व नहीं संघ प्रमुख भागवत का इतिहासिक कथन से क्या मुराद है 

 इस प्रश्न को सुनते ही उन्होंने साफ़ लफ़्ज़ों में कहा संघ प्रमुख मोहन भागवत जी का बयान ऐसे समय में आया है। जब भारत के गांव से शहर तक मुसलमानों के प्रति सरकार की देखरेख में नफरत की बीज इस कदर दाल दी गई है। कब क्या होगा कुछ कहा नहीं जा सकता है।और यह बयान पूर्ण रूप से लोगों को गुमराह करने के लिए है। दूसरी तरफ पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष भाजपा फिर उसके बाद मन की बात में आदरणीय प्रधानमंत्री जी या संघ प्रमुख मोहन भागवत का सुर इसलिए बदला हुआ है। जिस ट्रंप को गुजरात के शहर अहमदाबाद ,उत्तर प्रदेश के शहर आगरा और दिल्ली में बुलाकर देश का एक सौ करोड़ रुपिया उनके आगमन पर खर्च किया गया। और उसका नतीजा यह निकला की अमेरिका के धार्मिक स्वतंत्रा केंद्रीय आयोग( यू एस सी आई आर एफ) ने भारत के दोनों सदनो से सी ए ए नागरिकता संशोधन बिल पास होने पर गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ अमेरिका में प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है। इस रिपोर्ट में दिल्ली दंगा से लेकर , बिल के खिलाफ पूरे भारत में उठने वाली आवाज को पुलिस बल द्वारा दबाने के साथ-साथ कश्मीर में 370, बिना एसेंबली के मंजूर किए हुए दोनों सदनों से पास करने के बाद पूरे कश्मीर से इंटरनेट कनेक्शन काटकर तमाम मुख्य मंत्रियों एवं मंत्रियों से लेकर छोटे से बड़े नेताओं को गिरफ्तार करके उनकी आवाज को मिलिट्री द्वारा दबाने तक का तमाम हालात का जिक्र है। इस तरह का प्रतिबंध अमेरिका के धार्मिक स्वतंत्र केंद्रीय आयोग (यू एस सी आईआर एफ )आदरणीय प्रधानमंत्री जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे और उस समय दंगा हुआ था। उस समय भी अमेरिका ने उनके खिलाफ प्रतिबंध लगाया था। आज खुद प्रधानमंत्री हैं। 

इसके साथ ही साथ अरब खाड़ी की संगठन ओआईसी ने भी भारत में होने वाले अल्पसंख्यकों पर अत्याचार पर और इनके यहां रहने वाले आर एस एस जेहन रखने वाले कई कर्मचारियों द्वारा इस्लाम के खिलाफ दुष्प्रचार कर रहे थे। एक रिपोर्ट के अनुसार यूएई में तकरीबन 30,000 अरबपति और 30 हिंदुस्तानी खरबपति हैं। भारत से 34 लाख 20000 लो वहां रहते हैं lइसमें अधिकतर गैर मुस्लिम भाई रहते हैं। कर्नाटक के मूल निवासी वीआर सेठी मात्र $8 डॉलर लेकर दुबई गए थे। वहां की सरकार और बैंकों से 6 .6 मिलियन की देनदारी कर लिया है।जबकि उनके पास मात्र 3.5 मिलियन की ही संपत्ति है। जब बैंकों को इसकी जानकारी मिलने पर उनका, उनके रिश्तेदार और दोस्तों के सभी संपत्ति को जबत कर लिया गया है। बीआर सेठी वर्ष 1973 में कर्नाटक के एक छोटी इकाई कि चुनाव जनसंघ से लड़ा था जिसकी प्रचार पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई एवं आदरणीय नरेंद्र मोदी ने भी किया था। चुनाव हारने के बाद यूएई मैं अपना कारोबार फैलाया और अभी 370 हटने के बाद प्रधानमंत्री के पास इस व्यक्ति ने यह प्रस्ताव दिया था कि मुझे 5000 एकड़ भूमि जम्मू ,कश्मीर एवं लद्दाख में मिल रहा है। जहां में फिल्म सिटी बनाना चाहता हूं। हमें काफी अफसोस है। ऐसे कुछ लोगों के कारण भारत का पूरी दुनिया में जग हंसाई हो रही है।और लोग थु थु कर रहे हैं। 

यूएससीआईआरएफ रिपोर्ट के अनुसार कहा गया है की भारत में धार्मिक आजादी खत्म हो गई है। जहां जहां बीजेपी की सरकार है। वहां पर गरीब मजदूर, पिछड़ा अति, अति पिछड़ा , एसटी ,एस सी एवं अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को जहां कहीं पकड़ कर मॉब लिंचिंग करके वीडियो वायरल किया जाता है। जिसे पूरी दुनिया में मेरे महान भारत का सर झुका है। भारतीय अखबार का जंग आजादी में बहुत बड़ा योगदान होने के बावजूद भी आज भारती मीडिया की हालत पूरी दुनिया में 142 वा स्थान पर है। 

क्या मुसलमानों के प्रति संघ परिवार कठोर पन से नरमी की तरफ जा रहा है

उन्होंने साफ लफ्जो मे कहा ऐसी कोई बात नहीं है। दुनिया को दिखाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर भारत की लाज विगत कुछ वर्षों से काफी गिरा है। उसी की वजह से संघ परिवार के प्रमुख ने ऐसा बयान देकर लोगों के जेहन को भटकाने का कार्य किया है। इस समय अमेरिका की नजर में जहां पाकिस्तान खड़ा था उसी कतार में भारत को खड़ा कर दिया गया है। भारतीय जनता पार्टी के प्रवेश वर्मा ,कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर भारतीय जनता पार्टी में होने के कारण जो भी बोले वह सब माफ है।इस समय मोहसिन आई ए एस कर्नाटका ने सिर्फ इतना कह दिया जमातीयों द्वारा कोरोना मरीजों को प्लाज्मा बड़ा नेक कार्य है। आईएएस कनान गोपीनाथन केरला ,अब्दुल रहमान आईपीएस द्वारा सरकार को मशवरा देना महंगा पड़ गया। उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई ?भारत में अघोषित इमरजेंसी जैसा वातावरण बन गया है

 भारत में तेजी से ओबीसी एसटी एससी का रिजर्वेशन खत्म होने के कारण बौद्ध धर्म अपना रहे हैं क्या इसलिए मोहन भागवत ने मुसलमानों के प्रति यह बयान दिया है

 आपने बिल्कुल सही कहा है। इन समुदाय के पढ़े लिखे लोगों मैं यह समझ में आ गया है की इनका रिजर्वेशन बड़ी चतुर चालाकी और आसानी के साथ खत्म कर दिया गया है।तमाम सरकारी कार्य ठेकेदारी प्रथा के माध्यम से पूरे भारत में न्यू इंडिया ,स्मार्ट इंडिया ,डिजिटल इंडिया के नाम से निर्माण चल रहा है। वही काम विभाग से होने पर रिजर्वेशन देना पड़ताl क्योंकि विभाग में रिजर्वेशन है। लेकिन ठेकेदार के यहां कोई रिजर्वेशन नहीं। इन समुदाय के पढ़े-लिखे नौजवान बेकार हो रहे हैं। यह सच है। अधिकांश नौजवान बौद्ध धर्म अपना रहा है। 

हद यह है जफरुल इस्लाम खान चेयरमैन अल्पसंख्यक आयोग दिल्ली ने एक ट्वीट कर के माफी भी मांग लिया फिर भी उन पर देशद्रोह का मुकदमा हो गयाl वहीं दूसरी तरफ भारतीय गोदी मीडिया किस तरह नफरत फैला रही है। उसकी तरफ कोई अंकुश नहीं है। बीजेपी के सांसद महोदय मुस्लिम महिलाओं के प्रति ट्वीट करने पर खाड़ी के देशों ने प्रधानमंत्री का ध्यान आकर्षित कराया था।माननीय भाजपा अध्यक्ष , माननीय प्रधानमंत्री , या माननीय संघ प्रमुख यह लोग आदर पूर्ण जरूर हैं। लेकिन इन लोगों का अपने लोगों पर कोई अंकुश नहीं है। खुलेआम जो जी मैं आता है। नफरत ही नफरत फैलाने का प्रयास होता रहता है। यही वजह है घर से लेकर बाहर तक हमारे देश का फजीहत हो रही हैl आप तमाम महान लोगों को अपनी लोगों पर अंकुश लगाने की जरूरत है। भारत हमारा महान देश है।


Muzammil Khan

Reporter - Khabre Aaj Bhi

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