जौनपुर के शाहगंज के सड़क पर कहारती जिन्दगी

By: Riyazul
Nov 03, 2019
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तुम्हारी फाइलों में गाँव का मौसम गुलाबी है,मगर ये आंकड़े झूठे हैं, और दावा किताबी है

जौनपुर: शाम ढलने के साथ ही परिन्दें भी अपनें आशियाना में पहुंचते है।और उस डाल पर रात में अपना गुजर बसर करतें हैं ।लेकिन आज के इस आधुनिक युग में जबकि हम 21वीं शताब्दी में होंने का दावा करतें हैं,हम दावा करतें हैं विश्व में सारी व्यवस्था चुस्त दुरुस्त हो चुकी है ।आज इस आधुनिक दौर में भी मानव सड़क पर कहरा रहा हैं ,आज भूखे पेट सो रहा है,कुछ ऐसा ही नजारा शाहगंज नगर के जेसीज चौक पर देखने को मिलता है ,असहाय ,वृद्ध , व एक विक्षिप्त बूढ़ी महिला  पिछ्ले कुछ महिनों से नगर में दिन भर इधर उधर करनें के बाद जब सूर्य ढलती हैं तो रात सड़क किनारे खुलें आसमान के निचे  ठण्ड में रात गुजारने को मजबूर होतीं हैं तो यह तस्वीर देखने के बाद आसानी से कहा जा सकता है कि आज सड़क किनारे एक जिन्दगी कहरा रहीं हैं । ,निश्चित तौर पर यह सवाल है समाज पर?,यह सवाल है सरकार पर,यह सवाल है उन नगर के जनप्रतिनिधि पर ,यह सवाल है उन लोगों पर जो दावा करतें हैं कि गरीबों को आशियाना मिल चुका है, रात में असाहयो को ठहरने का इन्तजाम उपलब्ध हैं ,लोगों को ठंड से बचने का पूरी व्यवस्था किया गया है , यह सवाल है उन समाज सेवी संस्थाओं पर जो एक छोटे सा समाजहित मे कार्य करनें के बाद सोशल मीडिया पर फोटो चिपका कर अपनें आप को समाज का ठेकेदार होंने की बात करतें हैं ।(यह तमाचा है प्रशासन पर ,यह तमाचा है शासन पर,यह तमाचा है व्यवस्था पर ,यह तमाचा है उन समाजिक संस्थाओ व शाहगंज के जनप्रतिनिधियों पर) ,जो इस तस्वीर को देखने के बाद कहा जा सकता है ।यह तस्वीर में देखा जा सकता है कि,  एक बूढ़ी महिला रात में सड़क किनारे ठण्ड में कहराते हुए रात गुजारने को मजबूर होतीं हैं ।जब इस बूढ़ी महिला से उसके बारें में जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो वह ठन्ड से कांपती दिखाई दि और बोल नहीं सकीं ।वहीं कुछ नगर के लोगों ने बताया कि यह बूढ़ी महिला पिछ्ले कुछ महिनों से नगर के तमाम इलाकों में देखी जा चुकी हैं । यह कहां की रहने वालीं है इसका पता आज तक कुछ नहीं चल सका।
यदि ठण्ड से कहराते हुए इस बुजुर्ग महिला की मौत होती है तो इसका जिम्मेदार कौन होंगा ? महिला की तकदीर में लिखीं गयीं ठोकर या उसके अपनें, या कोई और जो अपनें आप में एक बड़ा सवाल खड़ा करता हैं।


Riyazul

Reporter - Khabre Aaj Bhi

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